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102 स्कूलों के प्रधान पाठकों ने लिया विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन पर प्रशिक्षण


  
नवागढ़ ब्लाक स्तरीय विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन पर 2 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन नवागढ़ के सामुदायिक भवन में संपन्न हुआ। आज 23 जनवरी 2019 को देर शाम प्रशिक्षण का समापन हुआ। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री जायसवाल व खण्ड समन्वयक नवागढ़ श्रीमती रिषीकांता राठौर के मार्गदर्शन व सहा.वि.ख.शिक्षा अधिकारी राजीव नयन शर्मा के नेतृत्व में प्रशिक्षण
कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमें नवागढ़ ब्लाक के कुल 7 संकुलों शिवरीनारायण, गोधना, कटौद, केरा, किरीत, मिसदा, नवागढ़ व सलखन से कुल 67 मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक व 35 प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठक शामिल हुए। दो दिवसीय प्रशिक्षण के प्रथम दिवस बीईओ व बीआरसीसी द्वारा मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया जिसके बाद एबीईओ श्री शर्मा ने सोच एवं आचरण को प्रभावित करने वाले कारक, पाठ्यचर्या की रूपरेखा के मुख्य क्षेत्र 1 विद्यालय नेतृत्व का दृष्टिकोण, मुख्य क्षेत्र 2 स्वयं का विकास तथा मुख्य क्षेत्र 3 शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का रूपांतरण पर विस्तार पूर्वक चर्चा कर उदाहरणों के माध्यम से प्रकाश डाला। उन्होंने स्वाट माडल के क्षमता, कमजोरी, अवसर व बाधाएं पर स्पीच के माध्यम से समझ बनाया। इससे पूर्व सभी प्रतिभागियों का योग्यता परीक्षण कराया गया जिसमें प्रधान पाठकों की कार्यवृत्ति सारिणी के 22 बिंदूओं पर प्रधान पाठकों द्वारा अंक भरे गये। प्रथम दिवस की गतिविधि राजेश कुमार सूर्यवंशी के द्वारा करायी गयी जिसके बाद नवाचारों को किस तरह से क्रियान्यवन किया जाये, इस पर चर्चा हुई। द्वितीय दिवस 23 जनवरी को फीडबैक के साथ प्रशिक्षण की शुरूआत हुई और एबीईओ राजीव नयन शर्मा व बीआरसीसी श्रीमती रिषीकांता राठौर द्वारा पाठ्यचर्चा के मुख्य क्षेत्र 4 दल बनाना तथा दल का नेतृत्व करना, मुख्य क्षेत्र 5 नवाचारों का नेतृत्व, मुख्य क्षेत्र 6 साझेदारियों का नेतृत्व तथा मुख्य क्षेत्र 7 विद्यालय प्रशासन का नेतृत्व पर चर्चा व गतिविधि के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। बीआरसीसी श्रीमती रिषीकांता राठौर ने वित्त, बजट व प्रशासन पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। श्री शर्मा ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर चर्चा कर उसे कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने गतिविधि व विडियों प्रदर्शन के माध्यम से  विद्यालय प्रमुखां में सृजनात्मकता और नवाचार हेतु प्रोत्साहित किया। द्वितीय दिवस सभी प्रधान पाठकों को विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन पर ढाई माह का आनलाईन कोर्स के लिए प्रेरित करते हुए राजेश कुमार सूर्यवंशी द्वारा पंजीयन की प्रक्रिया व कोर्स के बारे में विस्तार पूर्वक अवगत कराया गया। पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान गतिविधियों में बनाये गये सामग्री का संग्रह, फीडबेक, नवाचार प्रतिवेदन व योग्यता परीक्षण के पत्रों का संग्रह किया गया। प्रशिक्षण में पंजीयन प्रभारी सरकार सिंह लहरे, भोजन व चाय नाश्ता की व्यवस्था शैक्षिक समन्वयक मुबारक खान, लोमेश श्रीवास व गिरधर निराला तथा प्रशिक्षण कक्ष की व्यवस्था बनाने में रामकृष्ण कटकवार, सुधांशु चतुर्वेदी, योगेश चौहान, इकबाल खान, विनय सहित शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान डाइट जांजगीर के उप प्राचार्य एल.के. पाण्डेय ने प्रशिक्षण का अवलोकन कर संबोधन किये तो वही द्वितीय दिवस 23 जनवरी को प्राचार्य श्रीमती सविता राजपूत व लेक्चरर एम.के. मजूमदार ने प्रशिक्षण का अवलोकन कर विद्यालय में सक्रिय रूप से बेहतर कार्य करने के लिए प्रधान पाठकों को प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण में भोजन व आवास सहित चाक चौबंद व्यवस्था व प्रशिक्षणार्थियों की शत प्रतिशत उपस्थिति से प्राचार्य श्रीमती राजपूत ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा जब आप सभी अपने विद्यालयों में जाकर सीखे हुए बातों पर अमल करें।


रीडिंग कार्ड मटेरियल डवलपमेंट वर्कशाप में शामिल हुए जिले के नवाचारी शिक्षक


गुरूघासीदास केन्द्रीय विश्व विद्यालय बिलासपुर में दो दिवसीय अंग्रेजी भाषा रीडिंग कार्ड मटेरियल डवलपमेंट फार इलेमेंटरी लर्नर वर्कशाप 28 से 29 जनवरी 2019 तक संपन्न हुआ। डा.सी.एस.वजलवार (एच.ओ.डी.) के मार्गदर्शन तथा डा. सुधीर सुदाम कावरे, डा. ज्योति वर्मा, श्रीमती जे.सी. कुरियन सहा. प्राध्यापक एससीईआरटी रायपुर, प्रो. भट्टाचार्य सहा. प्राध्यापक डाइट दुर्ग के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला में राज्य भर के 23 सहायक प्राध्यापकों व शिक्षकों ने हिस्सा लिया। रीडिंग कार्ड मटेरियल डेवलपमेंट का यह तीसरा व अंतिम वर्कशाप रहा जिसमें जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लाक से नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी व सरकार सिंह लहरे ने सहभागिता कर रीडिंग कार्ड निर्माण की बारिकियों को सीखा।
गौरतलब हो कि पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन के तहत डिपार्टमेंट आफ एजुकेशन यू.जी.सी.- मानव संसाधन विकास केन्द्र (एच.आर.डी.सी.) कोनी में यह कार्यशाला आयोजित था जिसमें छोटे-छोटे कहानियों को लेकर बच्चों के लिए रीडिंग कार्ड बनाने की तरीकों को बताया गया साथ ही कार्ड निर्माण भी कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों के बीच ग्रुप डिस्कशन, सेल्फ लर्निंग मटेरियल, मोरल एजुकेशन, एम.सी.क्यू., ओपन एण्ड क्लोज क्वेशचन जैसे प्रश्न निर्माण की गतिविधियां करायी गयी। प्रथम दिवस 28 जनवरी को कार्यशाला का शुभारंभ प्रोफेसर मनीषा दुबे डीन सोशल साइंस ने किया।
उन्होंने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि हम किताबों को सरसरी तौर पर न पढ़े उन्हे ध्यान से पढ़े अपने दिमाग में बैठाये और उसे आचरण में उतारे। उन्होंने कहा कि आप इलेमेंटरी लर्नर के लिए काम कर रहे है जब यह सब पब्लिश होगी और बच्चों तक पहुंचेगी तो आप सभी की मेहनत सार्थक होगी। कार्यशाला में आबजेक्टिव टाइप क्वेशचन, ग्लोसरी, कार्ड विवरण, थीम निर्माण व आवश्यकतानुसार चित्रकारी करने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। द्वितीय दिवस 29 जनवरी को रीडिंग कार्ड को अंतिम रूप देते हुए सभी प्रतिभागियों का फोटो सेशन कर सर्टिफिकेट वितरण किया गया। कार्यशाला से लौटकर शिक्षक राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि आने वाले दिनों में इस कार्यशाला से सीखे गये गतिविधियों का प्रयोग अपने विद्यालय में किया जायेगा और बच्चों के लिए छोटे-छोटे कहानी तैयार कर उसे किताबों का रूप दिया जायेगा जिसे बच्चे मनोरंजन के तौर पर पढ़कर ज्ञान अर्जित करेंगे।


सहसंज्ञानात्मक गतिविधि में विद्यार्थियों ने कागज पर उकेरे एक से बढ़कर एक चित्र ...


नवागढ़ ब्लाक के डिजिटल विद्यालय शा.पूर्व मा.शाला नवापारा अमोदा में गत 5 व 7 फरवरी को सहसंज्ञानात्मक (रचनात्मक गतिविधि) के अंतर्गत वृहद स्तर पर चित्रकारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें कक्षा 6 से
8 तक के 77 विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर विज्ञान विषय के अंतर्गत सौर परिवार, पर्यावरण के सजीव घटक, वर्षा जल संग्रहण, पृथक्करण, पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, कचरा प्रबंधन, कोशिका, सूक्ष्मजीव सहित सामाजिक विज्ञान
विषय अंतर्गत ग्लोब, नक्शा, हाट बाजार, आदि मानवों पर एक से बढ़कर एक चित्र बनाते हुए उसमें रंग भरकर अपने कला कौशल का प्रदर्शन किया। नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में डिजिटल क्लास में बच्चों को ड्राइंग शीट, पेंसिल, रबर, मोम कलर, स्केच पेन सहित आवश्यक सामग्री के साथ यह गतिविधि करायी गयी। चित्रकारी में बच्चों ने चित्रों के माध्यम से जैव विविधता पर मानव के प्रयासों से पड़ रहे विपरीत प्रभाव को उल्लेखित किया। इस दौरान चित्रकारी की बारिकियों, कलर मैचिंग, बार्डर आदि के बारे में आवश्यक जानकारी नवाचारी शिक्षक राजेश सूर्यवंशी ने बच्चों से शेयर करते हुए कहा कि चित्रकारी में ब्राइट कलर्स देखने में आकर्षक तो लगते ही हैं, यह खुशी का प्रतीक भी होते है। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने बताया कि सहसंज्ञानात्मक गतिविधि के अंतर्गत दो क्षेत्र होते है प्रथम सह शैक्षिक क्षेत्र जिसमें चित्रकला, साहित्यिक, सांस्कृतिक नाटक, योग व खेलकूद तथा कार्यानुभव की गतिविधि होती है तो वही द्वितीय क्षेत्र व्यक्तिगत एवं सामाजिक गुण का होता है जिसके तहत अनुशासन, स्वच्छता व समयबद्धता के गुण विकसित किये जाते है। इसी कड़ी में इस गतिविधि के जरिये बच्चों का सर्वागीण विकास करने की दिशा में काम किया जा रहा है और इसका नतीजा भी सकारात्मक मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, उवशि संतोष कुमार श्रीवास, कन्हैया लाल मरावी व कर्मचारी साधराम यादव के सहयोग से इस तरह की रचनात्मक गतिविधियां करायी जा रही है। बच्चों के द्वारा बनाये सभी चित्रों का संकलन कर पिक्चर बुक का रूप दिया जायेगा ताकि आने वाले समय में अन्य बच्चे भी इस तरह की गतिविधियों के लिए प्रेरित हो सके।


18 संकुल केन्द्रों के 204 प्रायमरी व 108 मिडिल स्कूलों के 312 रसोईयों को दिया गया प्रशिक्षण ...


मध्यान्ह भोजन योजना में कसावट लाने, मीनू आधारित गुणवत्तायुक्त मध्यान्ह भोजन बच्चों तक पहुंचाने 11 व 12 फरवरी 2019 को सामुदायिक भवन नवागढ़ में ब्लाक अंतर्गत समस्त 18 संकुल केन्द्रों अंतर्गत 204 शासकीय प्राथमिक व 108 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 312 महिला-पुरूष रसोईयों को गहन प्रशिक्षण दिया गया। प्रथम दिवस 11 फरवरी सोमवार को 9 संकुल केन्द्रों कटौद, शिवरीनारायण, मिसदा, केरा, सलखन, गोधना, किरीत, नवागढ़, सिउड़ अंतर्गत विद्यालयों तथा द्वितीय दिवस 12 फरवरी मंगलवार को संकुल केन्द्र धुरकोट, सेमरा, अवरीद, धनेली, सिवनी, गौशाला नैला, सदर जांजगीर, अमोदा व खोखरा संकुल के रसोईयों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रभारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री राजीव नयन शर्मा व एबीईओ श्री संजय देवांगन के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने परिचय सत्र से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने सभी महिला पुरूषों को इस महत्वपूर्ण सेवाभावी जवाबदेही के लिए सदैव तैयार रहने की बात कही। श्री सूर्यवंशी ने बताया कि शासन द्वारा प्रायमरी में प्रति विद्यार्थी 400 कैलोरी व 12 ग्राम प्रोटीन तथा मिडिल में प्रति विद्यार्थी 700 कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन देना तय किया गया है जिसे पौष्टिक भोजन के द्वारा पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कीचन स्थल की नियमित सफाई, दीवाल पर मीनू सहित समूह व रसोईयों का नाम अंकित करने व पकाये जा रहे दाल व चांवल का सैम्पल रखने, स्वयं का समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहने जैसे जानकारी दी। प्रभारी बीईओ आर.एन. शर्मा ने समस्त रसोईयों को उनके मानदेय में हुए वृद्धि की बधाई देते हुए उन्हे सेवाभाव के साथ इस कार्य में संलग्न रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि आप सभी को अपने विद्यालय का नाम, समूह का नाम, संकुल का नाम तथा विद्यालय में कितने बच्चे दर्ज है और प्रतिदिन की उपस्थिति कितनी है इन बातों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए तथा निरीक्षण के दौरान पूछे जाने पर बताया जाये। उन्होंने कहा कि आप सब के सहयोग से मध्यान्ह भोजन योजना को पूरे ब्लाक में बढ़िया तरीके से संचालित कर पा रहे है। एबीईओ संजय देवांगन ने बताया कि छ.ग. बीज एवं कृषि विकास निगम में उचित दर पर सोया बड़ी, सोया पापड़, फोर्टिफाइड दाल लेने की सलाह दी जिसमें पर्याप्त प्रोटीन होती है। उन्होंने हरी सब्जियों की उपलब्धता व आचार, पापड़, सोयाबीन बड़ी की गुणवत्ता तथा उपलब्धता की जानकारी देते हुए कहा कि उच्च कार्यालय का निर्देश है कि चांवल को बिना माढ़ निकाले पकाया जाये इससे पर्याप्त मात्रा में कैलोरी पायी जाती है। मध्यान्ह भोजन आपरेटर विनोद शर्मा ने मीनू आधारित भोजन, खाद्यान्न आबंटन, भोजन पकाते व परोसते समय विभाग द्वारा दी गयी गणवेश को पहनने सहित आवश्यक सावधानियों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राथ. स्तर पर प्रति विद्यार्थी 20 ग्राम दाल, 50 ग्राम हरी सब्जी व 100 ग्राम चांवल तय है इसी तरह से मिडिल स्तर पर प्रति विद्यार्थी 30 ग्राम दाल, 75 ग्राम हरी सब्जी व 150 ग्राम चांवल तय है जिसे बच्चों तक बेहतर ढंग से पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे रसोईयों की समस्याओं पर भी विनोद शर्मा ने चर्चा कर रजिस्टर में दर्ज किया। प्रशिक्षण में पंजीयन प्रभारी श्री रामकृष्ण कटकवार, नाश्ता की व्यवस्था शैक्षिक समन्वयक मुबारक खान व प्रशिक्षण कक्ष की व्यवस्था बनाने में इकबाल खान सहित कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।



शहीद चन्द्रशेखर ’आजाद’ की पुण्यतिथि पर डिजिटल स्कूल में बायोपिक का प्रदर्शन

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी शहीद चन्द्रशेखर ’आजाद’ की आज 27 फरवरी को शहादत तिथि पर डिजिटल विद्यालय में उनकी जीवनी पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन कर बच्चों को उनकी बलिदान से अवगत कराया गया। 
विदित हो कि बाल संसद की अगुवाई में महापुरूषों की जीवनी पर विद्यालय में फिल्म प्रदर्शन कर महापुरूषों के जीवनगाथा से विद्यार्थियों को रूबरू कराने की परंपरा शा.पूर्व मा.शाला नवापारा अमोदा (नवागढ़) के डिजिटल क्लास रूम में चली आ रही है। इसी कड़ी में चंद्रशेखर आजाद जिनका आज ही के दिन 27 फरवरी 1931 को शहादत हुआ था। उनकी जीवनी पर आधारित सिनेमा का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद उनकी जीवनी पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को डिजिटल क्लास रूम के संचालक नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य महापुरूषों की जीवनी से आज की पीढ़ी को अवगत कराना है। उन्होंने बताया कि आजाद का जन्म 2३ जुलाई 1906 को हुआ तथा 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे। वे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारी साथियों में से थे। सन् 1922 में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रान्तिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में पहले 9 अगस्त 1925 को काकोरी काण्ड किया और फरार हो गये। इसके पश्चात् सन् 1927 में ’बिस्मिल’ के साथ ४ प्रमुख साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रान्तिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला साण्डर्स का हत्या करके लिया एवं दिल्ली पहुँच कर असेम्बली बम काण्ड को अंजाम दिया। 1919 में हुए अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार ने देश के नवयुवकों को उद्वेलित कर दिया। चन्द्रशेखर उस समय पढाई कर रहे थे किंतु उनके मन में देश के प्रति बलिदान की भावना जागृत हो गयी थी। चन्द्रशेखर आज़ाद के ही सफल नेतृत्व में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया था। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज सैनिकों ने उन्हे धोखे से घेर लिया और खूब गोलीबारी हुई किंतु आजाद ने अपनी ही बंदूक की गोली से अपने सिर पर वार कर शहीद हो गये। इसके बाद क्रांतिकारियों में देश को आजाद कराने की लहर दौड़ गयी। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। वृक्ष के
तने के इर्द-गिर्द झण्डियाँ बाँध दी गयीं। लोग उस स्थान की माटी को कपडों में शीशियों में भरकर ले जाने लगे। वर्तमान में वह स्थान ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थल बन चुका है। आजाद प्रखर देशभक्त थे। काकोरी काण्ड में फरार होने के बाद से ही उन्होंने छिपने के लिए साधु का वेश बनाना बखूबी सीख लिया था और इसका उपयोग उन्होंने कई बार किया। प्रायः सभी क्रान्तिकारी उन दिनों रूस की क्रान्तिकारी कहानियों से अत्यधिक प्रभावित थे आजाद भी थे लेकिन वे खुद पढ़ने के बजाय दूसरों से सुनने में ज्यादा आनन्दित होते थे। इस अवसर पर प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, कर्मचारी साधराम यादव, एसएमसी के सदस्यगण सहित विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समाज और देश को बदलना है तो पहले सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलनी होगा


साथियों, इस वर्ष हम अपना 70 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। हमारा देश संविधान के द्वारा समप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया। हमारा संविधान भारत के नागरिकों के बीच न्याय, स्वतंत्रता और सम्मान को सुनिश्चित करता है। गणतंत्र का अर्थ है देश में सभी देशवासियों के लिए समान व्यवस्था और कानून स्थापित करना। हमारे देश में सभी धर्मों को, संप्रदायों को समान अधिकार और स्थान दिया गया है। हम सभी के लिए 26 जनवरी एक गौरव पूर्ण दिन है। हम सब यह प्रतिज्ञा करते है कि हमारा समाज, हमारा गांव व देश विकास की दिशा में प्रगति करें और इसके लिए हमें सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को बदलने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
सरकारी विद्यालयों में विकट से विकट परिस्थितियां होती है ऐसे में गरीबी व अभावग्रस्त तबकों से आने वाले बच्चों के लिए शिद्दत से काम करने वाले शिक्षकों की मौजूदगी सरकारी स्कूलों को खास बना सकती है। हमें सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षकों का शुक्रगुजार होना चाहिए जो तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने काम को पूरी लगन और मेहनत के साथ अंजाम दे रहे हैं। नकारात्मक विचारों को भाव न देकर, काम के सकारात्मक असर और खुशी को समाज के लोगों के साथ साझा कर रहे हैं। एक शिक्षक के रूप में हमें ऐसा काम करना चाहिए जिससे बच्चों को खुशी मिले। स्कूल में उनका आना सार्थक हो। वे अपने जीवन में तमाम बाधाओं को पार करके आगे बढ़ें। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक जानते हैं कि यहां आने वाले बच्चे ऐसे समुदाय से हैं जो समाज में उपेक्षित है, पिछड़ा है, शिक्षा के महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं है। एक शिक्षक के रूप में हम अपने छात्रों को अपने बेस्ट अनुभवों से आगे बढ़ने का अवसर और माहौल दें, उन्हें ऐसे असाइनमेंट दें, जो उनकी रूचि के साथ मेल खाते हों। उन्हें खुद करके सीखने का अनुभव दें उनको अहसास दिलाएं कि आप बतौर शिक्षक उनकी परवाह करते हैं। छात्रों को उनकी प्रगति के बारे में व्यक्तिगत फीडबैक भी दें। छात्रों को स्थानीय परिवेश के साथ अपने ज्ञान व समझ को जोड़ने का अनुभव दें। क्लासरूम में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाली रणनीति अपनाएं और छात्रों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। किसी विषय की गहराई में उतरना छात्रों में एक रूचि का निर्माण करता है जो ज्यादा स्थायी होती है। इससे छात्र आगे भी सीखने के लिए तत्पर रहेंगे। वास्तव में बच्चों का पहला ‘रोल माडल’ उनका शिक्षक ही होता है। ऐसा मैंने बच्चों के घर व उनके परिवेश में संपर्क बनाने के बाद जाना और महसूस भी किया, विद्यालय में एक बच्चा बहुत से विद्यार्थियों को अपने शिक्षक की बात मानता हुआ, उनके इशारे पर किसी काम को करते हुए और नेतृत्व करते हुए देखता है तो भीतर ही भीतर प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता है किंतु यह उन्ही शिक्षकों के लिए लागू होता है जो अपने पेशन में तन्मयता और प्रभावशीलता के साथ डूबा हुआ हो। हमें अपने विद्यार्थियों को स्नेह देते हुए भविष्य के लिए जिम्मेदारी लेने वाला, अपनी गलती स्वीकार करने वाला और अपनी गलतियों के सीखकर आगे बढ़ने वाला एक बेहतर इंसान बनाने की जरूरत है ताकि वह जीवन में प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ सके। एक शिक्षक के रूप में मेरा यह सदैव प्रयास रहता है कि बच्चे स्कूल से रोजाना कुछ न कुछ सीख करके जाएं। आप सभी पालकों से आग्रह करूंगा कि घर में बच्चों के अध्यापन को लेकर जागरूक रहे, आप अपने बच्चों के साथ उनकी रोज की पढ़ाई लिखाई को लेकर जरूरत संवाद करे, बातचीत करके बच्चों की परेशानी को समझने की कोशिश करे और आप हम सब मिलकर उनकी मुश्किलों का समाधान करें। मैंने अपने शिक्षकीय जीवन में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई शिक्षक प्रशिक्षण लिये और जिला व ब्लाक स्तर पर बतौर मास्टर ट्रेनर सैकड़ों की संख्या में शिक्षक साथियों के साथ काम करने का सौभाग्य भी मिल रहा है जिससे मुझे स्वयं बहुत गहरा अनुभव मिल रहा है मेरा अनुभव रहा है कि कोई नया विचार धीरे-धीरे स्वीकृति पाता है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले प्रशिक्षण इन समस्याओं का समाधान तलाशने की दिशा में कोशिश करते हैं। हाल ही में विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन (लीडरशिप) पर केंद्रित प्रशिक्षण ऐसा ही एक प्रशिक्षण है जिसे यदि शिक्षक सही मायने में स्वीकार करता है तो एक बड़ा व्यापक परिवर्तन वह ला सकता है। एक शिक्षक चाहें कितना ही ज्ञानी क्यों न हों, अगर वह सहज, सरल और सौम्य नहीं है तो उसका ज्ञान स्वयं उसके लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन छात्रों के लिए वह निरर्थक होगा। बच्चे स्वयं बहुत सहज, सरल और सौम्य होते हैं, इसलिये शिक्षक को पहले बच्चों जैसा बनना होगा। बच्चों के उठने-बैठने पर अधिक ध्यान नहीं देकर उसकी सुविधा पर अधिक ध्यान देते हुए उनके साथ समय व्यतीत करें। क्योंकि छोटे बच्चों को स्वयं करके ही सिखाना सही होगा। वे हमारा अवलोकन करके खुद ही बहुत सी बातें सीख लेंगे। 
बहरहाल आज के दिन के महत्व को हर भारतीय को समझना बहुत ही आवश्यक है। इससे हम आने वाली पीढ़ी को भी समझा पाएंगे की गणतंत्र दिवस हमारे जीवन में क्या मूल्य और महत्व है। गणतंत्र का अर्थ होता है लोगों द्वारा चलाए जाने वाले देश। यानी कि एक ऐसा देश जहां लोगों का निर्णय ही सर्वोपरि होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज तक हमारे देश ने बहुत विकास किया है और ताकतवर देशों में गिना जाने लगा है। विकास के साथ, कुछ कमियाँ भी खड़ी हुई हैं जैसे असमानता, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा आदि। अपने देश को विश्व का एक बेहतरीन देश बनाने के लिये समाज में ऐसे समस्याओं को सुलझाने के लिये हमें सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में तन्मयता से काम करने की जरूरत है, प्रतिज्ञा लेने की जरुरत है। इस पावन बेला पर अपने राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिये ईश्वर से प्रार्थना करता हूं 
                                                                          जय हिंद, जय भारत, जय छत्तीसगढ़ महतारी ....

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति किया गया सजग ...

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति किया गया सजग ...
आज 28 फरवरी 2019 गुरूवार को डिजिटल विद्यालय शा.पूर्व मा.शाला नवापारा अमोदा (नवागढ़) में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन कर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में भारत के परमाणु ऊर्जा व अन्य अविष्कारों पर आधारित विडियों का प्रदर्शन किया गया। परिचर्चा के माध्यम से यह मंगलकामना की गयी कि समाज के लोगों का जीवन स्तर विज्ञान के अविष्कारों से अधिकाधिक खुशहाल हो सके व देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति करता रहे।
गौरतलब हो कि विज्ञान दिवस पर ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करने, भारत के वैज्ञानिकों व उनकी खोजों से अवगत कराने तथा उन्हें नये प्रयोगों के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से डिजिटल क्लासरूम में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व पर चर्चा करते हुए नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि महान भौतिक वैज्ञानिक प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने वर्ष 1928 में कोलकाता में रमन प्रभाव की खोज की थी और वर्ष 1930 को उन्हे इसके लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था जिसके बाद वर्ष 1986 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को पूरे भारतवर्ष में विज्ञान दिवस मनाया जाता है। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने रमन प्रभाव के संबंध में बताया कि रमन प्रभाव में एकल तरंग मोनो क्रोमेटिक किरणें जब किसी पारदर्शी माध्यम ठोस, द्रव्य या गैस से होकर गुजरती है तो इसकी छितराई किरणों का अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा स्थिर अंतर पर बहुत कमजोर तीव्रता की किरणें भी उपस्थित होती है इन्हीं किरणों को रमन प्रभाव कहा गया। यह किरणें माध्यम के कणों के कंपन्न एवं घूर्णन की वजह से मूल प्रकाश की किरणों में उर्जा में लाभ या हानि होने से उत्पन्न होती है। यह अविष्कार अनुसंधान की अन्य शाखाओं औषधि विज्ञान, जीव, भौतिकी, खगोल व दूर संचार के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण खोज है। इस अवसर पर प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, कर्मचारी साधराम यादव, एसएमसी के सदस्यगण सहित विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
              बच्चों ने देखी मिराज फाइटर प्लेन 2000 की गतिविधि आधारित विडियों
विज्ञान दिवस के अवसर पर डिजिटल विद्यालय में विद्यार्थियों को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान मिराज 2000 की गतिविधियों पर आधारित विडियों का प्रदर्शन कर अवगत कराया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि भारतीय वायुसेना का यह विमान वज्र भी कहलाता है। इसकी रफ्तार 2500 कि.मी. प्रति घंटा है जो कि हवा से हवा में तथा हवा से जमीन में बम या मिसाइल गिरा सकती है। यह विमान 6000 कि.ग्रा. से भी अधिक का वजन उठाकर आकाश में उड़ सकती है।


डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...