The Digital Teacher : समाज और देश को बदलना है तो पहले सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलनी होगा

समाज और देश को बदलना है तो पहले सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलनी होगा


साथियों, इस वर्ष हम अपना 70 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। हमारा देश संविधान के द्वारा समप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया। हमारा संविधान भारत के नागरिकों के बीच न्याय, स्वतंत्रता और सम्मान को सुनिश्चित करता है। गणतंत्र का अर्थ है देश में सभी देशवासियों के लिए समान व्यवस्था और कानून स्थापित करना। हमारे देश में सभी धर्मों को, संप्रदायों को समान अधिकार और स्थान दिया गया है। हम सभी के लिए 26 जनवरी एक गौरव पूर्ण दिन है। हम सब यह प्रतिज्ञा करते है कि हमारा समाज, हमारा गांव व देश विकास की दिशा में प्रगति करें और इसके लिए हमें सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को बदलने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
सरकारी विद्यालयों में विकट से विकट परिस्थितियां होती है ऐसे में गरीबी व अभावग्रस्त तबकों से आने वाले बच्चों के लिए शिद्दत से काम करने वाले शिक्षकों की मौजूदगी सरकारी स्कूलों को खास बना सकती है। हमें सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षकों का शुक्रगुजार होना चाहिए जो तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने काम को पूरी लगन और मेहनत के साथ अंजाम दे रहे हैं। नकारात्मक विचारों को भाव न देकर, काम के सकारात्मक असर और खुशी को समाज के लोगों के साथ साझा कर रहे हैं। एक शिक्षक के रूप में हमें ऐसा काम करना चाहिए जिससे बच्चों को खुशी मिले। स्कूल में उनका आना सार्थक हो। वे अपने जीवन में तमाम बाधाओं को पार करके आगे बढ़ें। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक जानते हैं कि यहां आने वाले बच्चे ऐसे समुदाय से हैं जो समाज में उपेक्षित है, पिछड़ा है, शिक्षा के महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं है। एक शिक्षक के रूप में हम अपने छात्रों को अपने बेस्ट अनुभवों से आगे बढ़ने का अवसर और माहौल दें, उन्हें ऐसे असाइनमेंट दें, जो उनकी रूचि के साथ मेल खाते हों। उन्हें खुद करके सीखने का अनुभव दें उनको अहसास दिलाएं कि आप बतौर शिक्षक उनकी परवाह करते हैं। छात्रों को उनकी प्रगति के बारे में व्यक्तिगत फीडबैक भी दें। छात्रों को स्थानीय परिवेश के साथ अपने ज्ञान व समझ को जोड़ने का अनुभव दें। क्लासरूम में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाली रणनीति अपनाएं और छात्रों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। किसी विषय की गहराई में उतरना छात्रों में एक रूचि का निर्माण करता है जो ज्यादा स्थायी होती है। इससे छात्र आगे भी सीखने के लिए तत्पर रहेंगे। वास्तव में बच्चों का पहला ‘रोल माडल’ उनका शिक्षक ही होता है। ऐसा मैंने बच्चों के घर व उनके परिवेश में संपर्क बनाने के बाद जाना और महसूस भी किया, विद्यालय में एक बच्चा बहुत से विद्यार्थियों को अपने शिक्षक की बात मानता हुआ, उनके इशारे पर किसी काम को करते हुए और नेतृत्व करते हुए देखता है तो भीतर ही भीतर प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता है किंतु यह उन्ही शिक्षकों के लिए लागू होता है जो अपने पेशन में तन्मयता और प्रभावशीलता के साथ डूबा हुआ हो। हमें अपने विद्यार्थियों को स्नेह देते हुए भविष्य के लिए जिम्मेदारी लेने वाला, अपनी गलती स्वीकार करने वाला और अपनी गलतियों के सीखकर आगे बढ़ने वाला एक बेहतर इंसान बनाने की जरूरत है ताकि वह जीवन में प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ सके। एक शिक्षक के रूप में मेरा यह सदैव प्रयास रहता है कि बच्चे स्कूल से रोजाना कुछ न कुछ सीख करके जाएं। आप सभी पालकों से आग्रह करूंगा कि घर में बच्चों के अध्यापन को लेकर जागरूक रहे, आप अपने बच्चों के साथ उनकी रोज की पढ़ाई लिखाई को लेकर जरूरत संवाद करे, बातचीत करके बच्चों की परेशानी को समझने की कोशिश करे और आप हम सब मिलकर उनकी मुश्किलों का समाधान करें। मैंने अपने शिक्षकीय जीवन में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई शिक्षक प्रशिक्षण लिये और जिला व ब्लाक स्तर पर बतौर मास्टर ट्रेनर सैकड़ों की संख्या में शिक्षक साथियों के साथ काम करने का सौभाग्य भी मिल रहा है जिससे मुझे स्वयं बहुत गहरा अनुभव मिल रहा है मेरा अनुभव रहा है कि कोई नया विचार धीरे-धीरे स्वीकृति पाता है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले प्रशिक्षण इन समस्याओं का समाधान तलाशने की दिशा में कोशिश करते हैं। हाल ही में विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन (लीडरशिप) पर केंद्रित प्रशिक्षण ऐसा ही एक प्रशिक्षण है जिसे यदि शिक्षक सही मायने में स्वीकार करता है तो एक बड़ा व्यापक परिवर्तन वह ला सकता है। एक शिक्षक चाहें कितना ही ज्ञानी क्यों न हों, अगर वह सहज, सरल और सौम्य नहीं है तो उसका ज्ञान स्वयं उसके लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन छात्रों के लिए वह निरर्थक होगा। बच्चे स्वयं बहुत सहज, सरल और सौम्य होते हैं, इसलिये शिक्षक को पहले बच्चों जैसा बनना होगा। बच्चों के उठने-बैठने पर अधिक ध्यान नहीं देकर उसकी सुविधा पर अधिक ध्यान देते हुए उनके साथ समय व्यतीत करें। क्योंकि छोटे बच्चों को स्वयं करके ही सिखाना सही होगा। वे हमारा अवलोकन करके खुद ही बहुत सी बातें सीख लेंगे। 
बहरहाल आज के दिन के महत्व को हर भारतीय को समझना बहुत ही आवश्यक है। इससे हम आने वाली पीढ़ी को भी समझा पाएंगे की गणतंत्र दिवस हमारे जीवन में क्या मूल्य और महत्व है। गणतंत्र का अर्थ होता है लोगों द्वारा चलाए जाने वाले देश। यानी कि एक ऐसा देश जहां लोगों का निर्णय ही सर्वोपरि होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज तक हमारे देश ने बहुत विकास किया है और ताकतवर देशों में गिना जाने लगा है। विकास के साथ, कुछ कमियाँ भी खड़ी हुई हैं जैसे असमानता, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा आदि। अपने देश को विश्व का एक बेहतरीन देश बनाने के लिये समाज में ऐसे समस्याओं को सुलझाने के लिये हमें सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में तन्मयता से काम करने की जरूरत है, प्रतिज्ञा लेने की जरुरत है। इस पावन बेला पर अपने राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिये ईश्वर से प्रार्थना करता हूं 
                                                                          जय हिंद, जय भारत, जय छत्तीसगढ़ महतारी ....

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