The Digital Teacher

18 संकुल केन्द्रों के 204 प्रायमरी व 108 मिडिल स्कूलों के 312 रसोईयों को दिया गया प्रशिक्षण ...


मध्यान्ह भोजन योजना में कसावट लाने, मीनू आधारित गुणवत्तायुक्त मध्यान्ह भोजन बच्चों तक पहुंचाने 11 व 12 फरवरी 2019 को सामुदायिक भवन नवागढ़ में ब्लाक अंतर्गत समस्त 18 संकुल केन्द्रों अंतर्गत 204 शासकीय प्राथमिक व 108 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 312 महिला-पुरूष रसोईयों को गहन प्रशिक्षण दिया गया। प्रथम दिवस 11 फरवरी सोमवार को 9 संकुल केन्द्रों कटौद, शिवरीनारायण, मिसदा, केरा, सलखन, गोधना, किरीत, नवागढ़, सिउड़ अंतर्गत विद्यालयों तथा द्वितीय दिवस 12 फरवरी मंगलवार को संकुल केन्द्र धुरकोट, सेमरा, अवरीद, धनेली, सिवनी, गौशाला नैला, सदर जांजगीर, अमोदा व खोखरा संकुल के रसोईयों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रभारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री राजीव नयन शर्मा व एबीईओ श्री संजय देवांगन के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने परिचय सत्र से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने सभी महिला पुरूषों को इस महत्वपूर्ण सेवाभावी जवाबदेही के लिए सदैव तैयार रहने की बात कही। श्री सूर्यवंशी ने बताया कि शासन द्वारा प्रायमरी में प्रति विद्यार्थी 400 कैलोरी व 12 ग्राम प्रोटीन तथा मिडिल में प्रति विद्यार्थी 700 कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन देना तय किया गया है जिसे पौष्टिक भोजन के द्वारा पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कीचन स्थल की नियमित सफाई, दीवाल पर मीनू सहित समूह व रसोईयों का नाम अंकित करने व पकाये जा रहे दाल व चांवल का सैम्पल रखने, स्वयं का समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहने जैसे जानकारी दी। प्रभारी बीईओ आर.एन. शर्मा ने समस्त रसोईयों को उनके मानदेय में हुए वृद्धि की बधाई देते हुए उन्हे सेवाभाव के साथ इस कार्य में संलग्न रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि आप सभी को अपने विद्यालय का नाम, समूह का नाम, संकुल का नाम तथा विद्यालय में कितने बच्चे दर्ज है और प्रतिदिन की उपस्थिति कितनी है इन बातों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए तथा निरीक्षण के दौरान पूछे जाने पर बताया जाये। उन्होंने कहा कि आप सब के सहयोग से मध्यान्ह भोजन योजना को पूरे ब्लाक में बढ़िया तरीके से संचालित कर पा रहे है। एबीईओ संजय देवांगन ने बताया कि छ.ग. बीज एवं कृषि विकास निगम में उचित दर पर सोया बड़ी, सोया पापड़, फोर्टिफाइड दाल लेने की सलाह दी जिसमें पर्याप्त प्रोटीन होती है। उन्होंने हरी सब्जियों की उपलब्धता व आचार, पापड़, सोयाबीन बड़ी की गुणवत्ता तथा उपलब्धता की जानकारी देते हुए कहा कि उच्च कार्यालय का निर्देश है कि चांवल को बिना माढ़ निकाले पकाया जाये इससे पर्याप्त मात्रा में कैलोरी पायी जाती है। मध्यान्ह भोजन आपरेटर विनोद शर्मा ने मीनू आधारित भोजन, खाद्यान्न आबंटन, भोजन पकाते व परोसते समय विभाग द्वारा दी गयी गणवेश को पहनने सहित आवश्यक सावधानियों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राथ. स्तर पर प्रति विद्यार्थी 20 ग्राम दाल, 50 ग्राम हरी सब्जी व 100 ग्राम चांवल तय है इसी तरह से मिडिल स्तर पर प्रति विद्यार्थी 30 ग्राम दाल, 75 ग्राम हरी सब्जी व 150 ग्राम चांवल तय है जिसे बच्चों तक बेहतर ढंग से पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे रसोईयों की समस्याओं पर भी विनोद शर्मा ने चर्चा कर रजिस्टर में दर्ज किया। प्रशिक्षण में पंजीयन प्रभारी श्री रामकृष्ण कटकवार, नाश्ता की व्यवस्था शैक्षिक समन्वयक मुबारक खान व प्रशिक्षण कक्ष की व्यवस्था बनाने में इकबाल खान सहित कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।



शहीद चन्द्रशेखर ’आजाद’ की पुण्यतिथि पर डिजिटल स्कूल में बायोपिक का प्रदर्शन

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी शहीद चन्द्रशेखर ’आजाद’ की आज 27 फरवरी को शहादत तिथि पर डिजिटल विद्यालय में उनकी जीवनी पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन कर बच्चों को उनकी बलिदान से अवगत कराया गया। 
विदित हो कि बाल संसद की अगुवाई में महापुरूषों की जीवनी पर विद्यालय में फिल्म प्रदर्शन कर महापुरूषों के जीवनगाथा से विद्यार्थियों को रूबरू कराने की परंपरा शा.पूर्व मा.शाला नवापारा अमोदा (नवागढ़) के डिजिटल क्लास रूम में चली आ रही है। इसी कड़ी में चंद्रशेखर आजाद जिनका आज ही के दिन 27 फरवरी 1931 को शहादत हुआ था। उनकी जीवनी पर आधारित सिनेमा का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद उनकी जीवनी पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को डिजिटल क्लास रूम के संचालक नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य महापुरूषों की जीवनी से आज की पीढ़ी को अवगत कराना है। उन्होंने बताया कि आजाद का जन्म 2३ जुलाई 1906 को हुआ तथा 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे। वे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारी साथियों में से थे। सन् 1922 में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण उनकी विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रान्तिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन के सक्रिय सदस्य बन गये। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में पहले 9 अगस्त 1925 को काकोरी काण्ड किया और फरार हो गये। इसके पश्चात् सन् 1927 में ’बिस्मिल’ के साथ ४ प्रमुख साथियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत की सभी क्रान्तिकारी पार्टियों को मिलाकर एक करते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन का गठन किया तथा भगत सिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की मौत का बदला साण्डर्स का हत्या करके लिया एवं दिल्ली पहुँच कर असेम्बली बम काण्ड को अंजाम दिया। 1919 में हुए अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार ने देश के नवयुवकों को उद्वेलित कर दिया। चन्द्रशेखर उस समय पढाई कर रहे थे किंतु उनके मन में देश के प्रति बलिदान की भावना जागृत हो गयी थी। चन्द्रशेखर आज़ाद के ही सफल नेतृत्व में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया था। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज सैनिकों ने उन्हे धोखे से घेर लिया और खूब गोलीबारी हुई किंतु आजाद ने अपनी ही बंदूक की गोली से अपने सिर पर वार कर शहीद हो गये। इसके बाद क्रांतिकारियों में देश को आजाद कराने की लहर दौड़ गयी। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। वृक्ष के
तने के इर्द-गिर्द झण्डियाँ बाँध दी गयीं। लोग उस स्थान की माटी को कपडों में शीशियों में भरकर ले जाने लगे। वर्तमान में वह स्थान ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थल बन चुका है। आजाद प्रखर देशभक्त थे। काकोरी काण्ड में फरार होने के बाद से ही उन्होंने छिपने के लिए साधु का वेश बनाना बखूबी सीख लिया था और इसका उपयोग उन्होंने कई बार किया। प्रायः सभी क्रान्तिकारी उन दिनों रूस की क्रान्तिकारी कहानियों से अत्यधिक प्रभावित थे आजाद भी थे लेकिन वे खुद पढ़ने के बजाय दूसरों से सुनने में ज्यादा आनन्दित होते थे। इस अवसर पर प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, कर्मचारी साधराम यादव, एसएमसी के सदस्यगण सहित विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समाज और देश को बदलना है तो पहले सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलनी होगा


साथियों, इस वर्ष हम अपना 70 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। हमारा देश संविधान के द्वारा समप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया। हमारा संविधान भारत के नागरिकों के बीच न्याय, स्वतंत्रता और सम्मान को सुनिश्चित करता है। गणतंत्र का अर्थ है देश में सभी देशवासियों के लिए समान व्यवस्था और कानून स्थापित करना। हमारे देश में सभी धर्मों को, संप्रदायों को समान अधिकार और स्थान दिया गया है। हम सभी के लिए 26 जनवरी एक गौरव पूर्ण दिन है। हम सब यह प्रतिज्ञा करते है कि हमारा समाज, हमारा गांव व देश विकास की दिशा में प्रगति करें और इसके लिए हमें सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर को बदलने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
सरकारी विद्यालयों में विकट से विकट परिस्थितियां होती है ऐसे में गरीबी व अभावग्रस्त तबकों से आने वाले बच्चों के लिए शिद्दत से काम करने वाले शिक्षकों की मौजूदगी सरकारी स्कूलों को खास बना सकती है। हमें सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षकों का शुक्रगुजार होना चाहिए जो तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने काम को पूरी लगन और मेहनत के साथ अंजाम दे रहे हैं। नकारात्मक विचारों को भाव न देकर, काम के सकारात्मक असर और खुशी को समाज के लोगों के साथ साझा कर रहे हैं। एक शिक्षक के रूप में हमें ऐसा काम करना चाहिए जिससे बच्चों को खुशी मिले। स्कूल में उनका आना सार्थक हो। वे अपने जीवन में तमाम बाधाओं को पार करके आगे बढ़ें। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक जानते हैं कि यहां आने वाले बच्चे ऐसे समुदाय से हैं जो समाज में उपेक्षित है, पिछड़ा है, शिक्षा के महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं है। एक शिक्षक के रूप में हम अपने छात्रों को अपने बेस्ट अनुभवों से आगे बढ़ने का अवसर और माहौल दें, उन्हें ऐसे असाइनमेंट दें, जो उनकी रूचि के साथ मेल खाते हों। उन्हें खुद करके सीखने का अनुभव दें उनको अहसास दिलाएं कि आप बतौर शिक्षक उनकी परवाह करते हैं। छात्रों को उनकी प्रगति के बारे में व्यक्तिगत फीडबैक भी दें। छात्रों को स्थानीय परिवेश के साथ अपने ज्ञान व समझ को जोड़ने का अनुभव दें। क्लासरूम में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाली रणनीति अपनाएं और छात्रों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। किसी विषय की गहराई में उतरना छात्रों में एक रूचि का निर्माण करता है जो ज्यादा स्थायी होती है। इससे छात्र आगे भी सीखने के लिए तत्पर रहेंगे। वास्तव में बच्चों का पहला ‘रोल माडल’ उनका शिक्षक ही होता है। ऐसा मैंने बच्चों के घर व उनके परिवेश में संपर्क बनाने के बाद जाना और महसूस भी किया, विद्यालय में एक बच्चा बहुत से विद्यार्थियों को अपने शिक्षक की बात मानता हुआ, उनके इशारे पर किसी काम को करते हुए और नेतृत्व करते हुए देखता है तो भीतर ही भीतर प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता है किंतु यह उन्ही शिक्षकों के लिए लागू होता है जो अपने पेशन में तन्मयता और प्रभावशीलता के साथ डूबा हुआ हो। हमें अपने विद्यार्थियों को स्नेह देते हुए भविष्य के लिए जिम्मेदारी लेने वाला, अपनी गलती स्वीकार करने वाला और अपनी गलतियों के सीखकर आगे बढ़ने वाला एक बेहतर इंसान बनाने की जरूरत है ताकि वह जीवन में प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ सके। एक शिक्षक के रूप में मेरा यह सदैव प्रयास रहता है कि बच्चे स्कूल से रोजाना कुछ न कुछ सीख करके जाएं। आप सभी पालकों से आग्रह करूंगा कि घर में बच्चों के अध्यापन को लेकर जागरूक रहे, आप अपने बच्चों के साथ उनकी रोज की पढ़ाई लिखाई को लेकर जरूरत संवाद करे, बातचीत करके बच्चों की परेशानी को समझने की कोशिश करे और आप हम सब मिलकर उनकी मुश्किलों का समाधान करें। मैंने अपने शिक्षकीय जीवन में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई शिक्षक प्रशिक्षण लिये और जिला व ब्लाक स्तर पर बतौर मास्टर ट्रेनर सैकड़ों की संख्या में शिक्षक साथियों के साथ काम करने का सौभाग्य भी मिल रहा है जिससे मुझे स्वयं बहुत गहरा अनुभव मिल रहा है मेरा अनुभव रहा है कि कोई नया विचार धीरे-धीरे स्वीकृति पाता है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले प्रशिक्षण इन समस्याओं का समाधान तलाशने की दिशा में कोशिश करते हैं। हाल ही में विद्यालय नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन (लीडरशिप) पर केंद्रित प्रशिक्षण ऐसा ही एक प्रशिक्षण है जिसे यदि शिक्षक सही मायने में स्वीकार करता है तो एक बड़ा व्यापक परिवर्तन वह ला सकता है। एक शिक्षक चाहें कितना ही ज्ञानी क्यों न हों, अगर वह सहज, सरल और सौम्य नहीं है तो उसका ज्ञान स्वयं उसके लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन छात्रों के लिए वह निरर्थक होगा। बच्चे स्वयं बहुत सहज, सरल और सौम्य होते हैं, इसलिये शिक्षक को पहले बच्चों जैसा बनना होगा। बच्चों के उठने-बैठने पर अधिक ध्यान नहीं देकर उसकी सुविधा पर अधिक ध्यान देते हुए उनके साथ समय व्यतीत करें। क्योंकि छोटे बच्चों को स्वयं करके ही सिखाना सही होगा। वे हमारा अवलोकन करके खुद ही बहुत सी बातें सीख लेंगे। 
बहरहाल आज के दिन के महत्व को हर भारतीय को समझना बहुत ही आवश्यक है। इससे हम आने वाली पीढ़ी को भी समझा पाएंगे की गणतंत्र दिवस हमारे जीवन में क्या मूल्य और महत्व है। गणतंत्र का अर्थ होता है लोगों द्वारा चलाए जाने वाले देश। यानी कि एक ऐसा देश जहां लोगों का निर्णय ही सर्वोपरि होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज तक हमारे देश ने बहुत विकास किया है और ताकतवर देशों में गिना जाने लगा है। विकास के साथ, कुछ कमियाँ भी खड़ी हुई हैं जैसे असमानता, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा आदि। अपने देश को विश्व का एक बेहतरीन देश बनाने के लिये समाज में ऐसे समस्याओं को सुलझाने के लिये हमें सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में तन्मयता से काम करने की जरूरत है, प्रतिज्ञा लेने की जरुरत है। इस पावन बेला पर अपने राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिये ईश्वर से प्रार्थना करता हूं 
                                                                          जय हिंद, जय भारत, जय छत्तीसगढ़ महतारी ....

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति किया गया सजग ...

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति किया गया सजग ...
आज 28 फरवरी 2019 गुरूवार को डिजिटल विद्यालय शा.पूर्व मा.शाला नवापारा अमोदा (नवागढ़) में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन कर विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में भारत के परमाणु ऊर्जा व अन्य अविष्कारों पर आधारित विडियों का प्रदर्शन किया गया। परिचर्चा के माध्यम से यह मंगलकामना की गयी कि समाज के लोगों का जीवन स्तर विज्ञान के अविष्कारों से अधिकाधिक खुशहाल हो सके व देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति करता रहे।
गौरतलब हो कि विज्ञान दिवस पर ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करने, भारत के वैज्ञानिकों व उनकी खोजों से अवगत कराने तथा उन्हें नये प्रयोगों के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से डिजिटल क्लासरूम में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व पर चर्चा करते हुए नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि महान भौतिक वैज्ञानिक प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने वर्ष 1928 में कोलकाता में रमन प्रभाव की खोज की थी और वर्ष 1930 को उन्हे इसके लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था जिसके बाद वर्ष 1986 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को पूरे भारतवर्ष में विज्ञान दिवस मनाया जाता है। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने रमन प्रभाव के संबंध में बताया कि रमन प्रभाव में एकल तरंग मोनो क्रोमेटिक किरणें जब किसी पारदर्शी माध्यम ठोस, द्रव्य या गैस से होकर गुजरती है तो इसकी छितराई किरणों का अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा स्थिर अंतर पर बहुत कमजोर तीव्रता की किरणें भी उपस्थित होती है इन्हीं किरणों को रमन प्रभाव कहा गया। यह किरणें माध्यम के कणों के कंपन्न एवं घूर्णन की वजह से मूल प्रकाश की किरणों में उर्जा में लाभ या हानि होने से उत्पन्न होती है। यह अविष्कार अनुसंधान की अन्य शाखाओं औषधि विज्ञान, जीव, भौतिकी, खगोल व दूर संचार के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण खोज है। इस अवसर पर प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, कर्मचारी साधराम यादव, एसएमसी के सदस्यगण सहित विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
              बच्चों ने देखी मिराज फाइटर प्लेन 2000 की गतिविधि आधारित विडियों
विज्ञान दिवस के अवसर पर डिजिटल विद्यालय में विद्यार्थियों को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान मिराज 2000 की गतिविधियों पर आधारित विडियों का प्रदर्शन कर अवगत कराया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि भारतीय वायुसेना का यह विमान वज्र भी कहलाता है। इसकी रफ्तार 2500 कि.मी. प्रति घंटा है जो कि हवा से हवा में तथा हवा से जमीन में बम या मिसाइल गिरा सकती है। यह विमान 6000 कि.ग्रा. से भी अधिक का वजन उठाकर आकाश में उड़ सकती है।


विश्व हिंदी दिवस संगोष्ठी का आयोजन, मातृभाषा के महत्व से अवगत हुए विद्यार्थी ...







हिंदी जन-जन की भाषा ही नहीं बल्कि पूरे भारत की आशा भी है। विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। पूरी दुनिया में हिंदी की पहचान बनाने के लिए सभी को और प्रयास करने की जरूरत है। हम सभी को विद्यार्थी जीवन से ही शुद्ध हिंदी बोलने व लिखने तथा व्यवहार में लाने के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत है।
उक्त बातें दलित साहित्य अकादमी के जांजगीर-चांपा जिलाध्यक्ष ने कही। वे आज 14 सितंबर 2018 हिंदी दिवस के अवसर पर नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा में आयोजित एक संगोष्ठी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। श्री लहरे ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति में रची-बसी है, रगों-रगों में घुली-मिली हुई है। यह एक विशाल समाज की भाषा है। बहुसंख्यक नागरिकों से संपर्क के लिए हिंदी अनिवार्य है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को राजभाषा का दर्जा प्राप्त हिंदी वर्तमान में कई राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, उत्तरप्रदेश, राजस्थान आदि की भाषा है। इनका प्रशासनिक कार्य हिंदी के माध्यम से ही चलता है। इस सत्य के बावजूद लोगों का अंग्रेजी के प्रति आकर्षण कम होता नजर नहीं आता है। हिंदी हमारी मातृभाषा है और इस भाषा के प्रति हमारे मन में लगाव होना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि अपनी भाषा तो भावनात्मक रूप से हमारे दिल में बसती है और हमें हिंदी भाषा को बचाने, उसे समृद्ध करने एवं प्रचारित करने के किए काम करने की जरूरत है। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती की पूजा अर्चना व अतिथियों के स्वागत सत्कार के साथ किया गया। कार्यक्रम में बच्चों व समुदाय के समक्ष हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए विडियों का प्रदर्शन किया गया। इस बीच मुख्य अतिथि व प्रधान पाठक ने बाल केबिनेट के प्रधानमंत्री दुर्गा कर्ष सहित सभी मंत्रियों अरूण यादव, हिमानी यादव, राज यादव, कुमारी नागेश्वरी साहू, लक्ष्मीसागर केंवट, करन कर्ष व लक्ष्मीन केंवट को बुके भेंटकर उनका अभिनंदन कर उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ कराया। कार्यक्रम का संचालन उच्च वर्ग शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने तथा आभार प्रदर्शन प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी ने किया। इस दौरान साधराम यादव, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रीमती सावित्री बाई चोहान, श्रीमती रूपा चैहान, श्रीमती कांति बाई साहू, नर्मदा साहू सहित समुदाय के लोग, महिला समिति के सदस्यगण व विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
 

मोटिवेशनल स्पीकर सारवत हुसैन नकवी के प्रेरणादायी संबोधन से प्रेरित हुए विद्यार्थी व शिक्षक





एक विद्यार्थी के रूप में हमें चीजों को देखना है, सुनना और समझना है और शिक्षकों की मदद से उस पर प्रयोग करना है। शिक्षकों को परीक्षा के दौरान बच्चों को मनोवैज्ञानिक रूप से सहज बनाने की जरूरत होती है ताकि परीक्षा के हौव्वा से वो उपर उठकर काम कर सके। परीक्षा के दौरान लिखने में मौलिकता होनी चाहिए रटकर उसे जस का तस लिख देने से मौलिकता नहीं आती है। जीवन में खूब पढ़ो आगे बढ़ो लेकिन हमें रोज एक घंटे अपने देश के लिए और एक घंटे अपने देह के लिए जरूर निकालना चाहिए। अपने आप को लगातार प्रेरित करते रहिए ताकि सीखने सिखाने की प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहे।
उक्त बातें रायपुर से पहुंचे नेशनल लेप्रोसी इरेडीकेशन प्रोग्राम के पब्लिक हेल्थ कोआर्डिनेटर राज्य प्रभारी व मोटिवेशनल स्पीकर सारवत हुसैन नकवी ने कही, देश विदेश में भ्रमण कर अनेक भाषाओं के ज्ञाता श्री नकवी 12 सितंबर 2018 को अपने सहयोगियों के साथ जांजगीर-चांपा जिले के प्रथम डिजिटल स्कूल शासकीय पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा के अवलोकन पर पहुंचे श्री नकवी ने विद्यार्थियों, शिक्षकों व समुदाय के लोगों को अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि कुछ चीजे ऐसी होती है जिसे हम अपने मन में भ्रांति बनाकर रखते है कि हम ये नहीं कर सकते वो नहीं कर सकते किंतु दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ भी करना संभव हो जाता है। मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि से रहा हूं सरकारी स्कूल में पढ़ा हूं हमारे समय में टेक्नालाजी नहीं होता था आज ब्लूटूथ, इंटरनेट व ई मेल की सुविधा है कुछ साल पहले तक इनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था किंतु हमारे कुछ अच्छे शिक्षकों के द्वारा दी गयी शिक्षा की वजह से ही आज हम बेहतर व्यक्ति बनकर आप लोगों के सामने बोल पा रहे है। उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि आज एक शिक्षक अपने बच्चों को जो ज्ञान देता है बीस साल बाद उसे देश प्राप्त करता है। आने वाले समय में आप सब विविध क्षेत्रों में जाकर देश व समाज की सेवा करेंगे और अपने शिक्षक से मिली संस्कार से आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करेंगे। श्री नकवी ने शिक्षक राजेश सूर्यवंशी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आप सब सौभाग्यशाली है कि आपके बीच ऐसा सेवाभावी शिक्षक मौजूद है जो अपना समय ही नहीं बल्कि पैसा और संसाधन लगाकर विद्यालय के बेहतरी के लिए काम कर रहे है, बड़े पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर यहां सुविधा संसाधन मौजूद है जो कि यहां के शिक्षकों के सेवाभावना को इंगित करता है। उन्होंने आगे कहा कि इस स्कूल के बारे में बहुत बार सुना था और यहां आने की प्रबल इच्छा हुई और आज आप सबके बीच पहुंचकर विद्यालय में हुए पर्यावरण व डिजिटल क्षेत्र में हुए कार्य को देखकर अभिभूत हूं। श्री नकवी ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के पास अनेक डिग्रिया थी मैं उनसे प्रेरित होकर लगातार पढ़ रहा हूं और पढ़ने की इच्छा इतनी प्रबल रही कि कनाडा व यूरोप तक गया और डिग्रिया हासिल की। हमारे देश व विदेश की शिक्षा पद्धति में भारी अंतर है सांस्कृतिक विविधता से लेकर बोलचाल की भाषा में बड़ा अंतर है। श्री नकवी ने कहा कि हमें हिंदी व अंग्रेजी बोलने का निरंतर अभ्यास करना चाहिए बोलते समय व्याकरण के सही गलत की चिंता न करें बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखे और संकोच न करें। ऐसे कार्य में हमें मदद देने की जरूरत है उनकी टूटी फूटी भाषा के लिए उन्हें हतोत्साहित न करें बल्कि प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विदेश की शिक्षा में बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में निखारने का काम होता है जबकि अपने यहां उल्टा होता है यहां रटकर लिखने की प्रवृत्ति पर बल दिया जाता है। हमें इस सिस्टम को बदलने की जरूरत है। हमारे देश में आज भी एकजुटता, एकरूपता का अभाव है और भ्रांतिया, अंधविश्वास व छुआछूत जैसे भावनाएं प्रबल है। अपने देश में हम सब अनेक वर्गों में विभाजित है किंतु बाहर जाने पर हमारी एक ही पहचान होती है कि हम भारतीय है। गौरतलब हो कि सारवत हुसैन नकवी जी कनाडा, यूरोप जैसे विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे सेवा क्षेत्रों में काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था से जुड़कर काम कर चुके है तथा वर्तमान में नेशनल लेप्रोसी इरेडीकेशन प्रोग्राम में पब्लिक हेल्थ कोआर्डिनेटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। इनके पास वर्तमान में महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ का प्रभार है। इस अवसर पर सरगुजा विश्व विद्यालय के सहा.प्राध्यापक गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी भी विशेष रूप से मौजूद रहे उन्होंने विद्यार्थियों का कैरियर मार्गदर्शन किया। इससे पूर्व सभी अतिथियों का विद्यार्थियों ने गुलदस्ता भेंटकर व प्रेरणा गीत हम हांेगे कामयाब गीत गाकर स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम का संचालन उच्च वर्ग शिक्षक हीरालाल कर्ष ने तथा आभार प्रदर्शन प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी ने किया। इस दौरान संतोष कुमार श्रीवास, राजेश कुमार सूर्यवंशी, साधराम यादव, दी लेप्रोसी मिशन चांपा से अनिल धीवर, धरम सिंह सिदार, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रीमती सावित्री बाई चैहान, साधराम यादव, बाल केबिनेट के प्रधानमंत्री कुमारी दुर्गा कर्ष, अरूण यादव, हिमानी यादव, राज यादव, कुमारी नागेश्वरी साहू, लक्ष्मीसागर केंवट, करन कर्ष, पूजा यादव, लक्ष्मीन केंवट, समुदाय के लोग, महिला समिति के सदस्यगण व विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे..
(मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट के बारे में अपनी राय साझा करिए। अपने नाम के साथ अपनी टिप्पणी कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। शिक्षा से जुड़े कोई सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो मुझे जरूर साझा करें। मैं उसे अपने ब्लाग पर लेने का प्रयास करूंगा ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।)

अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन की बेहतर पहल, पी.एल.सी. के साथ सीखने सिखाने की पहल की अब होगी शुरूआत ...

















19 से 22 जून 2018 तक जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ और नवागढ़ ब्लाक के सभी संकुल केन्द्रों से मिडिल के पांचों विषयों व प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण विषय के साथ उन्मुखीकरण कार्यशाला संपन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य सभी संकुलों से विषयवार एक-एक ऐसे शिक्षक तैयार करना जो संबंधित विषय पर अपनी बेहतर समझ के साथ अपने संकुल के विषयवार शिक्षकों के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बनाते हुए सीखने सिखाने की परंपरा को नयी उर्जा दे सके। इसी उद्देश्य को लेकर अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के जांजगीर व शिवरीनारायण इकाई ने उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। नवागढ़ के शासकीय महाविद्यालय के छह कक्षों में विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, गणित व प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण विषय को लेकर नवागढ़ विकासखण्ड के 18 संकुल केन्द्रों अमोदा, अवरीद, धनेली, धुरकोट, गौशाला नैला, गोधना, कटौद, किरीत, केरा, खोखरा, मिसदा, नवागढ़, सदर जांजगीर, सलखन, सेमरा, शिवरीनारायण, सिउड़ व सिवनी तथा पामगढ़ ब्लाक के सभी 14 संकुल केन्द्रों तनौद, खपरी, भदरा, भैसों, भिलौनी, कोसा, खरौद, मुलमुला, कोसला, लोहर्सी, पामगढ़, राहौद, रसौटा व ससहा से शिक्षकों ने हिस्सा लिया। विज्ञान कार्यशाला में हमने प्रथम दिवस 19 जून को कोशिका को लेकर लर्निंग आउटकम तैयार किये और सूक्ष्मदर्शी से कोशिका का अवलोकन से लेकर उसके महत्व पर बातचीत की, द्वितीय दिवस पदार्थों के वर्गीकरण व पृथ्थककरण पर गतिविधि के साथ काम किये तो वही तीसरे दिवस व चतुर्थ दिवस के मध्यान्ह तक को प्रकाश की अवधारणा पर काम किये, इस दौरान पिन होल कैमरा का निर्माण कर उसका अवलोकन किया गया। उन्मुखीकरण कार्यशाला के अंतिम दिवस आज 22 जून को जिला परियोजना अधिकारी श्री संतोष कश्यप, सहायक श्री जायसवाल जी सहित डाइट के वरिष्ठ व्याख्याता श्री प्रद्युम्न शर्मा व श्री गोपेश कुमार साहू ने पहुंचकर सभी का न केवल उत्साहवर्धन किया बल्कि अपने विचारों से भी हम सबको अवगत कराया। कक्षा में परंपरागत अध्ययन अध्यापन के साथ-साथ अब हमें, ऐसा कुछ करने की जरूरत है जिससे कि हमें एक बड़ा मंच मिले और हम विषयवार शिक्षक साथी आपस में अपने अनुभवों को साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें। ताकि एक सीखने वाले समुदाय के रूप में हम शिक्षकों’ की पहचान बने और हमारी शिक्षा संस्कृति का विकास हो सके। इसी क्रम में शिक्षा के प्राथमिक व माध्यमिक दोनों स्तरों पर शिक्षक और शिक्षकों की क्षमता में बढ़ोत्तरी के लिए अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है अब इस गंभीरता को बनाये रखना हम सबकी बड़ी जिम्मेदारी है यदि हम इस पर कामयाब होते है तो जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में हम सभी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बहरहाल इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए हम सभी शिक्षकों के बीच आपसी संवाद को रचनात्मक दिशा देने और मिलकर अकादमिक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रयासरत रहना होगा और इसके लिए टीएलसी की साप्ताहिक बैठकों में हमें अपनी बेहतर उपस्थिति दर्ज करानी होगी। पामगढ़ व नवागढ़ विकासखण्ड के संदर्भ में प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का आइडिया कितना प्रभावशाली होता है यह भविष्य के गर्भ में है किंतु इतना तो तय है कि इससे हम अपनी खुद की दक्षता को इतना बढ़ा सकते है कि हजारों की भीड़ में अपनी अकादमिक क्षमता का प्रदर्शन कर अपनी खुद की पहचान को संकुल, ब्लाक, जिला और राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर सकते है, फिलहाल मैं यही कर रहा हूं, एक शिक्षक के रूप में कुछ बेहतर करने की मेरी जिद ने मुझे सदैव ही सीखते रहने के लिए प्रेरित किया है। अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन से मुझे लगातार अकादमिक समर्थन मिल रहा है जिसके लिए मैं सदैव इनके प्रति नतमस्तक रहूंगा। विज्ञान विषय पर मुझे बतौर मास्टर टेªनर्स सहभागिता करने का अवसर मिला मैंने अपने साथी मास्टर टेªनर्स श्री पीतांबर लहरे जी के साथ अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन जांजगीर इकाई के मुखिया श्री सुभाष जी के मार्गदर्शन में पूरे चार दिनों तक जीव विज्ञान के शरीर की रचनात्मक व कार्यात्मक इकाई कोशिका, रसायन विज्ञान के पदार्थों का वर्गीकरण व पृथ्थककरण तथा भौतिक विज्ञान के प्रकाश पर खूब सारी गतिविधियों, चर्चाओं के माध्यम से सीखने सिखाने की प्रक्रिया को गति प्रदान किये। पूरे कार्यशाला में अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के कुमारी अर्चना, कुमारी मारिया, श्री नवनीत वर्मा जी, श्री विवेक जी, श्री नीरज राणा जी, श्री मनोज जी, श्री अरिजीत जी सहित शिक्षक साथियों श्री संतोष सर्वे पूर्व मा.शाला कामता सलखन, श्री महेश्वर पुरी गोस्वामी पूर्व मा.शाला बनारी गौशाला नैला, श्री सुरित महर्षि पूर्व मा.शाला बोरदा गोधना, श्रीमती अनिता धु्रर्वे पूर्व मा.शाला धाराशिव खोखरा, अराधना लकड़ा पूर्व मा.शाला पामगढ़, श्री रामनाथ कैवर्त पूर्व मा.शाला सेमरिया कोसा, श्री सोमक्ष टण्डन पूर्व मा.शाला लोहर्सी, श्री रूपलाल खूंटे पूर्व मा.शाला खपरी, श्री डार्विन जोगी पूर्व मा.शाला भैसों, श्री अशोक यादव पूर्व मा.शाला रसौटा, श्री देवेन्द्र साहू पूर्व मा.शाला कुटरा धनेली, श्री दलेश्वर प्रसाद मांझी पूर्व मा.शाला सिंघुल शि.ना., श्रीमती मनीषा साहू पूर्व मा.शाला नगारीडीह केरा, श्रीमती ज्योति शुक्ला पूर्व मा.शाला तुलसी मिसदा, श्री सरकार सिंह लहरे पूर्व मा.शाला हीरागढ़ सिउड़, श्री महेन्द्र कुमार साहू पूर्व मा.शाला ढाबाडीह भिलौनी, श्रीमती सुनीता यादव पूर्व मा.शाला खरौद, श्री गनेश्वर लाल साहू पूर्व मा.शाला धरदेई, श्री उमाशंकर सूर्यवंशी पूर्व मा.शाला अमोदा, श्री राजू पालिया पूर्व मा.शाला शुक्लाभाठा, श्रीमती धरमिन गढ़वाल पूर्व मा.शाला सुकली धुरकोट, श्री पवन कुमार साहू पूर्व मा.शाला तुस्मा कटौद व श्री सतीश कुमार पटेल पूर्व मा.शाला चैराभाठा अवरीद से इस चार दिवसीय कार्यशाला में मुझे जुड़ने और सीखने का जो सौभाग्य वह मेरे लिए सदैव अविस्मरणीय रहेगा, आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए अपनी बात समाप्त कर रहा हूं...
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डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...