The Digital Teacher : बस्तर राज्य स्तरीय कार्यशाला 2015 में शामिल हुए नवाचारी शिक्षक शैल पाण्डेय व राजेश सूर्यवंशी

बस्तर राज्य स्तरीय कार्यशाला 2015 में शामिल हुए नवाचारी शिक्षक शैल पाण्डेय व राजेश सूर्यवंशी



 विज्ञान विषय के वैज्ञानिक तकनीक को स्कूली बच्चों तक पहुंचाने के लिए राज्य कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन रायपुर, जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर व डाईट बस्तर के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय विज्ञान कार्यशाला का आयोजन बस्तर जिले के जगदलपुर कलेक्टर कार्यालय में 16 से 19 जुलाई 2015 तक आयोजित किया गया। चार दिवसीय कार्यशाला में विद्युत चुंबकीय किरणों के उपयोग की आसान समझ व न्यूटन के तीसरे नियम का प्रयोग। पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, व्यर्थ पदार्थों का उपयोग और वाहनों से निकलने वाले धुएं का शोधन। जीवन की ऐसी ही कई समस्याओं के आसान समाधान व विज्ञान की जटिलताओं को सरलता के साथ दिखाया गया। 
कार्यशाला में रायपुर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर, रायगढ़, दुर्ग, कोण्डागांव, कांकेर, कवर्धा, महासमुंद, धमतरी,  नारायणपुर, राजनांदगांव, सूरजपुर, सरगुजा, बीजापुर, कोरिया, बलरामपुर, गरियाबंद व जांजगीर-चांपा
के कुल 40 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में जांजगीर-चांपा जिले से डीईओ आरएन हीराधर, डीपीसी श्री आदित्य, एपीसी एमडी दीवान, विनोद शर्मा, बीईओ नवागढ़ बी एक्का, बीआरसी ऋषिकांता राठौर, बीईओ सक्ती राधेश्याम सिदार, बीआरसी सक्ती गिरधारी लाल चैहान के निर्देशन में दो विज्ञान शिक्षक सक्ती ब्लाक के आश्रम शाला अमलडीहा से शैल कुमार पाण्डेय तथा नवागढ़ ब्लाक के पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) से शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी ने अपने द्वारा बनाये गये विज्ञान के सहायक सामग्री का प्रदर्शन किया। आयोजन में मास्टर टेनर्स के रूप में नागपुर से सुरेश अग्रवाल व उनकी टीम के सदस्यों ने विज्ञान आधारित सहायक सामग्री का कैसे निर्माण करें व कैसे प्रदर्शन करें पर आधारित प्रदर्शन दिखाया। प्रशिक्षण में राज्य परियोजना अधिकारी राजीव गांधी शिक्षा मिशन रायपुर एम.सुधीश मार्गदर्शन के लिए उपस्थित रहे। कार्यशाला से लौटकर शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने बताया कि बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं प्रकृति को गहराई से समझने की प्रवृत्ति विकसित करने प्रत्येक विज्ञान शिक्षक को स्कूलों में प्रायोगिक सहायक सामग्री का उपयोग करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए विज्ञान किताबों तक ही सीमित है। हमारी कोशिश है कि वह किताबों से बाहर आकर अपने आसपास विज्ञान को देखें व महसूस करें। ऐसा करने से विज्ञान के सिद्धांत आसानी से विद्यार्थियों की समझ में आने लगेगी। शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि विज्ञान के प्रयोगों को किताबों की कैद से बाहर लाकर उसे गतिविधियों के माध्यम से बच्चों से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण विज्ञान विषय को सीखने में बच्चों को मदद करेगा। चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में राज्य भर के बीस जिलों से पहुंचे विज्ञान विषय के शिक्षकों को स्कूलों में विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम के लिए एक्टिविटी कराने गुर सीखाया गया। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस एसपीओ रागाशिमि रायपुर ने बताया कि यहा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत आप सभी मास्टर टेªनर्स के रूप में अपने जिले के सभी विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र ही जानकारी जिला कार्यालय को भेजने की बात कही गयी है। इस दौरान जिले से पहुंचे दोनों विज्ञान शिक्षकों ने बस्तर जिले के विनोबा ग्राम डिमरापाल स्थित
माता रूकमणि कन्या आश्रम उ.मा.शाला में विज्ञान की गतिविधि आधारित प्रदर्शन किया। जहां करीब एक घंटे के इस आयोजन से प्रभावित होकर आश्रम के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने प्रशस्ति पत्र से दोनों शिक्षकों को सम्मानित किया।
                   तीरथगढ़ जलप्रपात व बस्तर रथयात्रा का किये शैक्षणिक भ्रमण
दुनिया में जलप्रपातों की कमी नहीं लेकिन बस्तर जगदलपुर का तीरथगढ़ जलप्रपात जैसी सुंदरता कहीं नहीं है, जहां जलप्रपात के अलावा चट्टानों का सीना चीरकर नदी निकली हो। प्रकृति का यह अनमोल उपहार केवल तीरथगढ़ जलप्रपात को मिला है। वैसे तो पूरा बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य की स्थली है लेकिन मुनगाबहार नाला में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात में मानो प्रकृति ने सुंदरता का खजाना उड़ेल दिया हो। तीरथगढ़ जलप्रपात की चट्टानीवादियों का जितना महत्व भूगर्भशास्यिं, पुरातत्ववेत्ताओं के बीच है, उतना ही धार्मिक भी है। गर्मी बढ़ते ही जहां हर तरफ जल संकट के हालात बनते नजर आते हैं तो वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय जगदलपुर से से करीब 30 किलोमीटर दूर मुनगाबहार नाला में पानी ही पानी होता है। यह संभव हो सका है बेहतर वॉटर मेनेजमेंट से। यहां रहने वाले लोग यह जानते हैं कि जंगल रहेगा तो ही पानी मिलेगा। उक्त बातें तीरथगढ़ जल प्रपात का शैक्षणिक भ्रमण कर लौटने के बाद शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने कही। गौरतलब हो कि जांजगीर जिले से शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय व राजेश कुमार सूर्यवंशी जुलाई 2015 में राज्य स्तरीय विज्ञान कार्यशाला में शामिल हुए जिसके तहत राज्य परियोजना अधिकारी सर्व शिक्षा अभियान एम. सुधीश के नेतृत्व में तीरथगढ़ जल प्रपात का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण मुनगाबहार नाले पर स्थित यह जलप्रपात सदियों से लगातार बह रहा है और पूरे अंचल के ग्रामीणों की जरूरतों को पूरा करता आ रहा है। यहां पीने से लेकर खेती तक के लिए भरपूर पानी है। जलप्रपात से लगे आसपास के गांवों को इससे रोजगार मिल रहा है। भीषण गर्मी में भी यहां पानी उपलब्ध रहता है। यहां के ग्रामीण बताते हैं कियह जल धारा कभी भी नहीं सूखा है। जल धारा को देखने के लिए यहां अलग-अलग स्थान बनाये गये हैं। जलप्रपात में स्नान करने के लिए तथा नीचे तक सीढ़ियों के माध्यम से उतरकर इस दृश्य को निहारने के लिए स्थल बनाये गये है। क्षेत्रीय ग्रामीण बताते है कि इस प्राकृतिक जलस्रोत के कारण ही पूरे अंचल के गांवों में कभी भी पानी का संकट नहीं होता है। इसके अलावा बस्तर के प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होकर बस्तर के सांस्कृतिक गतिविधियों को जानने व समझने का अवसर भी इन शिक्षकों को मिला है।


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