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भारत के मानचित्र में राज्यों व राजधानियों को अंकित करने की दक्षता विकास पर लघु शोध कार्य पूर्ण








जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना अंतर्गत शिक्षा सत्र 2018-19 में क्रियात्मक अनुसंधान (एक्शन रिसर्च) कराया गया। जिसमें मैंने (राजेश कुमार सूर्यवंशी, उच्च वर्ग शिक्षक) शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नवापारा (अमोदा), संकुल केन्द्र अमोदा, विकासखण्ड नवागढ़, जिला-जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ से  ”कक्षा 6 के विद्यार्थियों में भारत के मानचित्र में राज्यों व राजधानियों को पहचानते हुए अंकित करने की दक्षता का विकास करना“ विषय पर क्रियात्मक अनुसंधान करते हुए विद्यार्थियों की दक्षता विकास में सफलता पायी है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट जांजगीर के प्राचार्य श्रीमती सविता राजपूत के संरक्षकत्व में, समन्वयक श्री एम.के.मजूमदार सहा. प्राध्यापक तथा श्री के.एम. जायसवाल के मार्गदर्शन में उक्त शोध कार्य दिसंबर 2018 से मार्च 2019 के मध्य (50 स्कूल कार्य दिवस) में मैंने पूर्ण किया है। क्रियात्मक शोध के उद्देश्य, आवश्यकता व उपादेयता आदि की पूर्ति के लिए मेरे द्वारा अपने विद्यालय के कक्षा 6 वीं के सभी 27 विद्यार्थियों अंजली, हेमलता, जयकुमार, खुशी, लक्ष्मीन, मंगली, राजकुमार, सुखसागर, सूरज, सविता, शंकर लाल, उमेन्द्र, विजय, देवेश, करन, राकेश, सुमित, शिवानी, सोनिया, सरोजनी, दीपक, रविकांत, कृतिका, प्रभा, नंदनी, प्रियांशु व आरती का चयन न्यादर्श के रूप में किया गया था। कार्ययोजना के तहत 6 दिवस में भारत के राजनैतिक मानचित्र का गहन अध्ययन, बच्चों व स्टाफ के साथ अनुसंधान संबंधी चर्चा व क्रियात्मक अनुसंधान से संबंधित फाईलों का अध्ययन किया गया। 3 दिवस में पूर्व परीक्षण हेतु प्रपत्र निर्माण व भारत का कोरा मानचित्र वितरित कर में परीक्षण संपन्न कराया गया। 4 दिवस में भूमि पर व दीवाल पर मानचित्र का निर्माण कर अनुसंधान के लिए अन्य आवश्यक सहायक सामग्री का निर्माण किया गया। अगले 16 दिवसों में मानचित्र का प्रदर्शन कर समझाते हुए राज्यों व राजधानियों को पहचानते हुए अंकित करने का व्यवहारिक अभ्यास कराया गया जिसके बाद बच्चों में दक्षता आयी और अगले 4 दिवस में पश्च परीक्षण हेतु प्रपत्र निर्माण व भारत का कोरा मानचित्र वितरित कर सभी 27 विद्यार्थियों का परीक्षण किया गया जिसके बाद परीक्षण का मूल्यांकन व आंकड़ों का संकलन व वर्गीकरण किया गया। 6 दिवस में आंकड़ों के आधार पर परिणाम निकाला गया तथा अंतिम 8 कार्य दिवस में शोध कार्य का दस्तावेजीकरण, फ्लेक्सी प्रिटिंग, कम्प्यूटर टायपिंग, फोटोकापी, स्पायरल बाइडिंग, सी.डी. निर्माण आदि का कार्य पूर्ण किया गया। शोध कार्य पश्चात परिणाम की समीक्षा करने पर परिणाम इस प्रकार रहा जिसमें- पूर्व परीक्षण के दौरान भारत के मानचित्र में राज्य को अंकित करने की गतिविधि में कुल 27 विद्यार्थियों में से 5 विद्यार्थियों ने 8 राज्यों, 7 विद्यार्थियों ने 9 राज्यों, 6 विद्यार्थियों ने 10 राज्यों, 6 विद्यार्थियों ने 11 राज्यों तथा 3 विद्यार्थियों ने 12 राज्यों की सही-सही पहचान किया तथा शेष राज्यों को पहचान कर अंकित करने में त्रुटि हुई। वही पश्च परीक्षण की गतिविधि में कुल 27 विद्यार्थियों में से 10 विद्यार्थियों ने 21 राज्यों, 11 विद्यार्थियों ने 22 राज्यों, 5 विद्यार्थियों ने 23 राज्यों तथा 1 विद्यार्थी ने 25 राज्यों की सही-सही पहचान किया। इस तरह से पूर्व परीक्षण में उपलब्धि का औसत 9.81 से बढ़कर पश्च परीक्षण में 21.11 हो गया। उपलब्धि का औसत 11.3 रहा।
इसी तरह से पूर्व परीक्षण के दौरान भारत के मानचित्र में राज्यों के राजधानियों को अंकित करने की गतिविधि में कुल 27 विद्यार्थियों में से 8 विद्यार्थियों ने 4 राजधानियों, 13 विद्यार्थियों ने 5 राजधानियों तथा 6 विद्यार्थियों ने 6 राजधानियों की सही-सही पहचान किया तथा शेष राज्यों को पहचान कर अंकित करने में बड़ी त्रुटि हुई। वही पश्च परीक्षण की गतिविधि में कुल 27 विद्यार्थियों में से 1.1 विद्यार्थी ने 14 व 15 राजधानियों, 10 विद्यार्थियों ने 16 राजधानियों, 3 विद्यार्थियों ने 17 राजधानियों, 5 विद्यार्थियों ने 18 राजधानियों, 4 विद्यार्थियों ने 19 राजधानियों तथा शेष 3 विद्यार्थियों ने 20 राजधानियों का सही-सही पहचान किया। इस तरह से पूर्व परीक्षण में उपलब्धि का औसत 4.92 से बढ़कर पश्च परीक्षण में 17.25 हो गया। उपलब्धि का औसत 12.33 रहा। मेरे इस शोध कार्य को संपन्न करने में डाइट स्टाफ के अलावा श्री आर.एल. जायसवाल बीईओ नवागढ़, श्री राजीव नयन शर्मा एबीईओ नवागढ़, श्री संजय देवांगन एबीईओ नवागढ़, श्रीमती रिषीकांता राठौर बीआरसी नवागढ़, श्रीमती सावित्री चौहान अध्यक्ष शाला प्रबंधन व विकास समिति, श्री कन्हैया लाल मरावी प्र. प्रधान पाठक, श्री हीरालाल कर्ष उ.व.शि., श्री संतोष कुमार श्रीवास उ.व.शि. व सफाई कर्मचारी श्री साधराम यादव व सभी विद्यार्थियों सहित प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग करने वाले सभी शिक्षकों का सराहनीय योगदान मिला है जिनके प्रति मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं







विश्व महिला दिवस 8 मार्च 2019 पर विद्यार्थियों के माताओं की डिजिटल स्कूल में लगी क्लास


सरकारी स्कूल का शैक्षणिक माहौल बेहतर बनाने विद्यार्थियों की माताओं को जोड़ने के उद्देश्य से आज 8 मार्च 2019 शुक्रवार विश्व महिला दिवस पर जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा (डिजिटल विद्यालय) में मातृ सम्मेलन का आयोजन कर मोटिवेट कर अपील की गयी कि अपने बच्चों की बेहतरी के लिए विद्यालय से जुड़े तथा अपने बच्चों को घर में पढ़ने लिखने के लिए माहौल और समय दे। इस दौरान डिजिटल रूम में महिलाओं के सशक्तिकरण व उनकी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए विडियों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती कमलेश जांगड़े (सदस्य प्रदेश भाजपा कार्यसमिति महिला मोर्चा व अनुसूचित जाति मोर्चा छ.ग.) ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय नारी जिसे अबला कहा जाता रहा है, ने आज अपने कौशल एवं जज्बे से विश्वभर में अपनी एक अलग पहचान कायम की है, आज भारतीय नारी चूल्हे-चौके से बाहर आकर समाज एवं देश निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे रही है। अपने जीवन को दांव पर लगाकर वंश चलाने वाली इस नारी को यदि हम भयमुक्त वातावरण देने और आत्मसम्मान के साथ खड़ा करने में सहयोगी बन सके, तो यह समाज के लिए गौरव की बात होगी। उन्होंने सभी माताओं का नारियल व बुके भेंटकर उनका सम्मान करते हुए कहा कि आप सभी अपने बच्चों की बेहतरी के लिए विद्यालय से जुड़े तथा अपने बच्चों को घर में पढ़ने लिखने के लिए माहौल और समय दे। कार्यक्रम के संयोजक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि विद्यार्थी महज 6 घंटे विद्यालय में रहते है जबकि 18 घंटे वे घर परिवार में व्यतीत करते है ऐसे में बच्चों की बेहतर क्षमता संवर्धन में माताओं की सर्वाधिक महत्वूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि आप सभी माताएं समय-समय पर विद्यालय आये और हम सबका मार्गदर्शन करते रहे। इससे पूर्व सभी माताओें व अतिथियों का पुष्पाहार से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ हुआ, विद्यार्थियों ने स्वागत व प्रेरणा गीत हम होंगे कामयाब गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रधान पाठक श्री कन्हैया लाल मरावी, सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदय मधुकर, श्री योम प्रकाश लहरे, श्री बसंत जांगड़े, श्री साधराम यादव सहित विद्यार्थी पूजा यादव, दुर्गा कर्ष व नागेश्वरी साहू महिला दिवस के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए रूढ़ीवादी मान्यताओं को तोड़ते हुए विद्यालयीन गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने की बात कही। कार्यक्रम में एसएमसी अध्यक्ष श्रीमती सावित्री बाई चौहान, महिला स्व सहायता समूह अध्यक्ष कुमारी बेदबाई साहू, श्रीमती सुमित्रा बाई यादव, श्रीमती बूटानाबाई, श्रीमती नीता बाई, श्रीमती रामबाई साहू, श्रीमती कांतिबाई साहू, श्रीमती अनिता बाई यादव, श्रीमती मालती बाई साहू, श्रीमती लीला बाई साहू, श्रीमती पुष्पा बाई यादव, श्रीमती महेतरीन बाई साहू, श्रीमती बिमला बाई यादव, श्रीमती सरस्वती बाई कंवर, श्रीमती तेरसबाई बरेठ, श्रीमती दीपक बाई सहित ग्राम नवापारा व केवा की महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रही।








विश्व महिला दिवस पर कुमारी दुर्गा कर्ष कक्षा 8 वीं के स्पीच...
आज 8 मार्च विश्व महिला दिवस पर मैं कुमारी दुर्गा कर्ष आप सभी अतिथियों का अपने विद्यालय में हार्दिक स्वागत करती हूं। हम सब जानते है कि माताओं का भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- ’यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवताः। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। हम सबको इस परंपरा को बनाये रखना है। भारतीय संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किया जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है। मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है।  जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है। आप सभी को विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई प्रेषित करते हुए अंत में मैं इस पंक्ति के साथ अपनी बात समाप्त करूंगी कि-
नारी तुम केवल श्रध्दा हो, विश्वास रजत नग पद तल में ..
पीयूष स्रोत सी बहा करों, जीवन के सुंदर समतल में ..

            
विश्व महिला दिवस पर कुमारी पूजा यादव कक्षा 7 वीं के स्पीच...
सभी को चरण स्पर्श करते हुए मैं कुमारी पूजा यादव आप विश्व महिला दिवस के अवसर पर अपनी बात रखना चाहूंगी। भारतीय संस्कृति में नारी को माता के पद पर प्रतिष्ठित किया गया है नारी को देवी मानकर उसकी पूजा की जाती है  प्राचीन इतिहास पर गौर करें तो पता चलता है कि कैकेयी जो रणभूमि में पति की सारथी बनी, गांधारी जिन्होंने अंधे पति के लिए जीवन पर्यंत आँखों पर पट्टी बाँध ली, सीता जिन्होंने पति के साथ स्वेच्छा से वन गमन किया या फिर शास्त्रार्थ के लिए पुरुषों को ललकारने वाली गार्गी मैत्रेयी आदि आदर्श चरित्र नारियों का प्रंसग उल्लेखनीय हैं। नारी के प्रति ऐसी उदात्त अवधारणा समभवतः कही और देखने को नहीं मिलती है। आधुनिक काल में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने रणभूमि में अग्रेजों को, महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमारी चौहान ने श्रेष्ठ साहित्य का सृजन करके, इंदिरा प्रियदर्शिनी ने देश को कुशल नेतृत्व प्रदान करके, प्रथम आइपीएस अधिकारी किरण वेदी कठोर प्रशासकीय दायित्वों का सकुशल निर्वहण करके, मदर टरेसा ने अनाथों को गले लगाकर और कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने आकाश की ऊचाईयों को छूकर नारी दृ सामर्थ का अभिनव परिचय प्रस्तुत किया है। हम सबको इन पर गर्व है। आप सभी को इस अवसर पर बधाई प्रेषित करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करती हूं। जय हिंद जय भारत ..

            
विश्व महिला दिवस पर कुमारी नागेश्वरी साहू कक्षा 6 वीं के स्पीच...
मैं कुमारी नागेश्वरी साहू आप सभी का अपने डिजिटल विद्यालय परिवार में हार्दिक अभिनंदन करती हूं, आज हम विश्व महिला दिवस मनाने के लिए यहां पर एकत्रित हुए है, हर साल 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व साल दर साल बढ़ रहा है और यह महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा, प्रेम और आदर दर्शाने का अवसर है। आप सबको यह जानकर बहुत खुशी होगी कि हमारे विद्यालय में यह आयोजन प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। हम सबको महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। मुझे इस कार्यक्रम में बोलने का मौका दिया गया है और मैं बहुत प्रसन्न हूं क्योंकि यह मेरे लिए उन सभी माताओं का शुक्रिया अदा करने का एक अवसर है जिन्होंने मेरे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शायद मैंने इन महिलाओं को ’अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर कभी धन्यवाद नहीं कहा लेकिन मेरे हृदय की गहराई से मैं हमेशा उनको मेरे जीवन में मेरा साथ देने और मुश्किलों से बचाने के लिए उनका धन्यवाद करती हूं ...






सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों को सर्वाधिक प्रोत्साहन की दरकार
            (8 मार्च 2019 विश्व महिला दिवस पर विशेष)

कल 8 मार्च 2019 शुक्रवार को पूरा संसार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनायेगा। हमारे भारतवर्ष में भी जागरूक महिलाएं, जात-पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं। साथ ही पुरुष वर्ग भी इस दिन को महिलाओं के सम्मान में समर्पित करता है। इतिहास को झांकने पर पता चलता है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले 1909 में मनाया गया था। इसे आधिकारिक मान्यता तब दी गई जब 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक थीम के साथ इसे मनाना शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी ’सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर। 19 मार्च 1911 को पहली बार आस्ट्रिया डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। 1913 में इसे ट्रांसफर कर 8 मार्च कर दिया गया और तब से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है।एक शिक्षक होने के नाते हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों को आगे बढ़ाने के जितने भी बेहतर प्रयास हो वो करें। हम सब भली भांति जानते है कि बालिकाओं की जीवन में तीन भूमिकाएं  प्रमुख होती है बेटी, पत्नी और माँ जो कि इन्हे समाज देती है किंतु उन्हे एक बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना हमारी जिम्मेदारी है। बालिकाओं की शिक्षा इस तरह से होनी चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों को उचित तरीके से पूरा करने में सक्षम हो सके। एक शिक्षित महिला अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में अच्छी तरह जानती हैं। वह देश के विकास के लिए पुरुषों के समान या उनसे बेहतर योगदान दे सकती हैं। अपने एक दशक से भी अधिक के शिक्षकीय कार्यकाल का मेरा अनुभव तो यही कहता है कि एक ही माहौल, परिस्थिति और परिवार में रहते हुए भी बेटियां कही ज्यादा आज्ञाकारी और जल्दी सीखने वाली होती है। शायद यही वजह रहा कि जब भी कुछ बेहतर परफार्मेंस कराने का अवसर मिला मैंने अपने विद्यालय में बेटियों को ही यह अवसर दिया और राष्ट्रीय स्तर पर इंस्पायर अवार्ड, राज्य स्तर पर विज्ञान प्रदर्शनी तथा जिला स्तर पर युवा उत्सव जैसे गतिविधियों में चयनित होकर बेटियों ने विद्यालय, गांव तथा जिले का नाम आगे बढ़ाया, बेटियों की इन उपलब्धियों से मुझे लगातार काम करने के लिए ऊर्जा मिलती है। बावजूद इन सबके यह पीड़ा बनी हुई है कि घरेलू परिस्थितियों की वजह से हमारी कई होनहार विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ पाती है। कुछ ऐसे बालिकाओं के घर जाकर उनके माता-पिता से बातचीत करके काफी हद तक इस समस्या को खत्म करने का प्रयास भी किया गया है किंतु पूरी तरह से नहीं। महिला के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकने में भी मदद करती है। शिक्षा महिलाओं को जीवन के मार्ग को चुनने का अधिकार देने का पहला कदम है जिस पर वह आगे बढ़ती है। एक शिक्षित महिला में कौशल, सूचना, प्रतिभा और आत्मविश्वास होता है जो उसे एक बेहतर मां, कर्मचारी और देश का निवासी बनाती है। विद्यालय या समुदाय स्तर पर यदि शिक्षक आपस में कुछ ऐसी योजना बनाये कि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देकर कुछ बेहतर किया जा सके ऐसे प्रयास के तहत कक्षा 8 की बालिकाओं को कम्प्यूटर का प्रारंभिक ज्ञान देने का सिलसिला वर्ष 2017 से मैंने आरंभ किया था जिसके बेहतर परिणाम भी मिले बच्चों की दैनिक उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हुई हालांकि परिस्थितिवश यह गतिविधि लगातार नहीं हो सकी। साल में एक बार बेहतर उपलब्धि वाले विद्यार्थियों को नगद राशि से सम्मानित करने की परंपरा हमारे विद्यालय द्वारा बनी हुई है जिसमें हर बार बालिकाएं ही बाजी मार जाती है, ऐसे बहुत सारी योजनाएं विद्यालय या समुदाय स्तर पर बननी चाहिए जिससे बालिकाओं का हौसला आफजाई हो सके। आज महिला दिवस के पावन अवसर पर मैं अपने पूरे राज्य के उन महिला शिक्षिकाओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं जिनसे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर मुझे सीखने सिखाने का अवसर मिला है तथा जिनके शैक्षणिक गतिविधियों से मैं समय-समय पर प्रेरित होते रहता हूं। इसके साथ ही हम सबको यह संकल्प लेने की जरूरत है कि हम अपने विद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों को आगे बढ़ने का हर संभव अवसर दे, उन्हें किसी भी विकास के अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। बालिकाओं के प्रति हमारी नजरों में तिरस्कार या लघुता का भाव नहीं होना चाहिए। सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब हम बालिकाओं के लिए कुछ बेहतर करेंगे विद्यालय का माहौल ऐसा बनाये जहां बालिकाएं स्वयं को सर्वोच्च महसूस करें जहां वह सिर उठा कर अपने लड़की होने पर गर्व करे, न कि पश्चाताप, कि काश मैं एक लड़का होती। 
विश्व महिला दिवस पर डिजिटल विद्यालय में गांव की महिलाओं का होगा सम्मान ..
विश्व महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2019 शुक्रवार को शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा में गांव की माताओं का सम्मान कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम के संयोजक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में माताओं की भूमिका सर्वोपरि होती है। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों की माताओं को विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाना है। महिला दिवस पर महिलाओं के महत्ता पर आधारित चलचित्र का प्रदर्शन व अतिथियों छात्राओं तथा माताओं का उद्बोधन होगा। कार्यक्रम की तैयारी में प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, संतोष कुमार श्रीवास, हीरालाल कर्ष, राजेश कुमार सूर्यवंशी, साधराम यादव सहित विद्यार्थीगण जुटे हुए है। आप सभी इस आयोजन में सादर आमंत्रित है ...
 वूमेन्स डे 2019 को लेकर भारत सरकार के वेबसाइट पर क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर मिला प्रमाण पत्र



महिला दिवस 2019 पर विद्यालय की बालिकाओं द्वारा चित्रकारी





                  

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राज्योत्सव 2014 में अमलडीहा सक्ती का मंगलयान रहा आकर्षण का केन्द्र


जिला मुख्यालय जांजगीर के हाईस्कूल मैदान में 1 से 3 नवंबर 2014 तक राज्य स्थापना दिवस पर राज्योत्सव का धूमधाम से आयोजन किया गया। इस दौरान सभी सरकारी विभागों द्वारा पण्डाल लगाकर अपने विभागीय योजनाओं व विकास कार्यों की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गयी। इसी कड़ी में आदिम जाति कल्याण विभाग के स्टाल में आश्रम शाला अमलडीहा सक्ती के शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने मंगलयान का जीवंत माडल प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। इस दौरान पूरे तीन दिनों तक स्टाल में स्कूली विद्यार्थियों सहित लोगों की भीड़ जुटती रही जहां शिक्षक श्री पाण्डेय द्वारा विस्तार पूर्वक सभी को उसकी कार्यविधि से अवगत कराया गया। इसके अलावा उनके द्वारा निर्मित इव्हीएम मशीन को भी लोगों ने खूब सराहा। अधिकारियों द्वारा स्टाल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सहित अधिकारियों ने श्री पाण्डेय की इस प्रस्तुति की खूब सराहना की। वही शा.उ.मा.शाला चांटीपाली डभरा में पदस्थ व्याख्याता पंचायत विजय कुमार पाण्डेय ने पण्डाल स्थल पर तीनों दिवस उपस्थित रहकर एक बैटरी से पंखा का घूमना, चुंबकीय बल रेखाएं, दाब का प्रभाव, पर्यावरण के घटक, हाइड्रोलिक पावर जैसे गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। राज्योत्सव के द्वितीय दिवस पण्डाल का सहायक आयुक्त एचआर चौहान, अधीक्षक डी आजाद, एसएल शतरंज, श्री कश्यप, शिव कुमार सिदार, रामकुमार कांत आदि ने उपस्थित होकर गतिविधियों से रूबरू हुए।

गौरतलब हो कि विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय द्वारा मंगलयान का डेमों सहित राकेट व मिसाइल पीएसएलवी 25 व उपग्रह मंगलयान सहित हाइड्रोलिक माडल, इव्हीएम मशीन, पर्यावरण के घटक, जैक मशीन व गणितीय गणना से भाई बहन की संख्या बताने का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि अनुपयोगी सामानों से किस तरह से शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एसोसिएशन फार रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन बेसिक सांइस एजुकेशन नागपुर द्वारा राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन 23 से 26 सितंबर 2014 तक नागपुर में किया गया। जिसमें वे प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए थे। खगोल विज्ञान जागरूकता के इस कार्यक्रम से लौटने के बाद उन्होंने मंगलयान का जीवंत डेमो तीन दिन और तीन रात की कड़ी मेहनत कर तैयार किया जिसके बाद उसे राज्योत्सव की प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि इसरो द्वारा साल भर पहले 5 नवंबर 2013 को मंगलयान पृथ्वी से मंगल ग्रह के लिए भेजा गया था जो कि 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। इस अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें वे भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों के अलावा देश के प्रतिष्ठित खगोल वैज्ञानिकों के साथ शामिल हुए थे।


भारत को हासिल है विश्व का सबसे बड़ा संविधान होने का गौरव ..


26 जनवरी 2019 को हम अपने गणतंत्र का 69 वां गणतंत्र दिवस मना रहे है। तिरंगा हमारे रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुंओर खुशियों की सौगात है। भारत का संविधान जो कि विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, हमें इस देश का निवासी होने का गौरव मिला है। इस गौरव को दिलाने, मातृभूमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिए असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्ति की गाथाओं से भारतीय इतिहास के पृष्ठ भरे हुए है। देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत हजारों की संख्या में भारत माता के वीर सपूतों ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणाम स्वरूप हमारा देश गणतांत्रिक देश हो सका है। गणतंत्र अर्थात गण$तंत्र जिसका अर्थ होता है जनता के द्वारा जनता के लिए शासन। इस व्यवस्था को हम सभी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है। वैसे तो भारत में सभी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते है परंतु गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते है। इस पर्व का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे सभी जाति एवं वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते है। गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को ही मनाते है क्योंकि जब अंग्रेज सरकार की मंशा भारत को एक स्वतंत्र उपनिवेश बनाने की नजर नहीं आ रही थी तभी 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की शपथ ली थी। पूर्ण स्वराज्य के अभियान को पूरा करने के लिए सभी आंदोलन तेज कर दिये गये थे। सभी देशभक्तों ने अपने-अपने तरीके से आजादी के लिए कमर कस ली थी। एकता में बल है, की भावना को चरितार्थ करती विचारधारा में अंततः अंग्रेजों को पीछे हटना ही पड़ा। अंततोगत्वा 1947 में भारत आजाद हुआ तभी से यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1929 की निर्णायक तिथि को गणतंत्र दिवस के रूप में मनायेंगे। वही 26 जनवरी 1950 की तिथि इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान इसी दिन अस्तित्व में आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बन गया। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बड़ा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डा. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक संपूर्ण गणतांत्रिक देश बन गया। देश को गौरवशाली गणतंत्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तों ने अपना बलिदान दिया उन्हें याद करके आदरांजलि देने का पर्व है 26 जनवरी। अंग्रेज जो सर्वप्रथम भारत में व्यापार करने के इरादे से पहुंचे थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने यहां के राजाओं और सामंतों पर अपनी कूटनीति चाल से अधिकार कर लिया। आजादी की पहली आग मंगल पाण्डेय ने 1857 में कोलकाता के पास बैरकपुर में जलाई थी, किंतु कुछ संचार संसाधनों कमी से ये आग ज्वाला नहीं बन सकी परंतु इस आग की चिंगारी कभी बुझी नहीं थी। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर इंदिरा गांधी तक मंगल पाण्डे से लेकर सुभाषचंद्र बोस तक, नाना साहेब से लेकर सरदार पटेल तक, लाल (लाला लाजपतराय), बाल (बाल गंगाधर तिलक), पाल (विपिन चंद्र पाल) हो या गोपाल कृष्ण गोखले, गांधी नेहरू सभी के हृदय में धधक रही थी। 13 अप्रैल 1919 की जलियावाला बाग हत्याकाण्ड की घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे दुखद घटना थी। जब जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चलाकर निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हजारों लोगों को घायल कर दिया था। यह वही घटना थी जिसने भगत सिंह और उधम सिंह जैसे, क्रांतिकारियों को जन्म दिया। अहिंसा के पुजारी हो या हिंसात्मक विचारक क्रांतिकारी, सभी का हृदय आजादी की आग से जलने लगा था। हर वर्ग भारत माता के चरणों में बलिदान देने को तत्पर था। अतः 26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारतवर्ष के कोने-कोने में बड़े उत्साह तथा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष इस दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती है। जांजगीर-चांपा का जिला मुख्यालय जांजगीर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत देश की राजधानी दिल्ली में यह त्यौहार उल्लास व गर्व के साथ मनाया जाता है।
26 जनवरी का मुख्य समारोह जिले स्तर पर हाईस्कूल मैदान जांजगीर में मनाने की परंपरा रही है जहां जिले सहित राज्य भर के विभिन्न भागों से असंख्य व्यक्ति इस समारोह की शोभा देखने पहुंचते है। इस दौरान आकाश में गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जायेंगे जो कि शांति और एकता के प्रतीक को दर्शाते है। पुलिस, एनसीसी, स्काउट की टुकड़िया सीना तानकर अपनी साफ सुथरी वेशभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृश्य मनोहारी होगा और यह भव्य दृश्य देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा देश सेवा के लिए उत्साह का संचार होगा। इस दौरान बैण्ड की धुन सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्रप्रेम की भावना से गुंजायमान करेंगे। विभिन्न शासकीय विभागों की झांकिया वहां के सांस्कृतिक जीवन, वेशभूषा, रीति रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करेंगे। अनेकता में एकता का ये परिदृश्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतंत्र दिवस की संध्या पर सभी शासकीय भवनों व विद्यालयों में रौशनी की जा रही है। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का पर्व देशभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक भारतीय को अपने देश की आजादी प्यारी है। भारत की भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है - “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है” ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है हमारा गणतांत्रिक देश भारत। 26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्जवलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुंओर खुशियों की सौगात है। हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमर करें, वंदन करें, अभिनंदन करें।


विश्व जल दिवस 22 मार्च 2016 जल संरक्षण को सिद्धांत से व्यवहार में उतारना जरूरी-राजेश सूर्यवंशी



 आज 22 मार्च को पूरे जिले भर में विश्व जल दिवस का आयोजन किया जा रहा है। साल में एक दिन आने वाले इस दिवस पर जल बचाने संकल्प लिये जाते है किंतु उसे केवल सिद्धांत में ही रखा जाता है जबकि जरूरत है इसे व्यवहार में लागू करने की। विश्व जल दिवस पर सीखों-सिखाओं विज्ञान क्लब के संयोजक शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी जल दिवस के संबंध में जानकारी देते हुए जनमानस से उन्हे सिद्धांत से व्यवहार में उतारने की अपील की है।
गौरतलब हो कि विश्व जल दिवस जल संरक्षण के उपायों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसके संबंध में शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी कहते है कि विश्व जल दिवस की अंतरराष्ट्रीय पहल रियो डि जेनेरियो में 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में की गई। जिसके बाद वर्ष 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में जल दिवस के मौके पर जल के संरक्षण और रखरखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया। जल है तो कल है हम सब यह मानते हैं लेकिन वर्तमान आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इसे केवल सिद्धांत में ही लागू कर पा रहे है जबकि व्यवहार इसके विपरित ही है। प्राकृतिक सुंदरता के वाहक पेड़ों की हरियाली, सुरक्षा के पहरेदार पहाड़ और रत्नगर्भा धरती का गर्भ सूखता जा रहा है। सालों पहले जहां कुएं, तालाब, पोखर, झील या अन्य स्वरूपों में जलस्रोतों की मौजूदगी थी वहां अब रिहायशी मकान और अन्य निर्माण हो चुके है। आज मानवीय सोच और कुरूप विकास ने पानी की समस्या को न सिर्फ बढ़ा दिया है, बल्कि प्रकृति के अवैध दोहन से धरती का जलस्तर भी रसातल की ओर चल पड़ा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। यही कारण है कि वर्षाकाल की स्थिती भी अब बिगड़ चुकी है। मानवीय भूलों के चलते तालाबों और नदी-नालों की सेहत जिस तरह से कमजोर दिखाई दे रही है उससे भीषण जलसंकट की भयावहता से इंकार नहीं किया जा सकता है। पूरे जिले में अपेक्षा से कम बारिश होने के बावजूद अंचल में जल संरक्षण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे है। मानवीय उदासीनता के कारण न सिर्फ जिले के प्राचीन जलस्रोत अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे हैं बल्कि पानी का संरक्षण और संवर्धन भी नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही जल प्रदूषण भी चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि अधिकतर बीमारियां दूषित जल से ही पनपती हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर बच्चों को जलशुद्धिकरण के व्यावहारिक उपायों को सिखाना बेहद जरूरी है। श्री सूर्यवंशी ने कहा कि वर्तमान में जलस्रोत लगातार सूख रहे हैं। भावी पीढ़ी को जल संकट से बचाने के लिए शीघ्र इनके संरक्षण के उपाय करने होंगे। आज हमारे देश में हजारों की तादात में ऐसे लोग है जिनको पीने का शुद्ध पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। प्रकृति जीवनदायी संपदा जल हमें एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, हम भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। वर्षों से मां प्रकृति के प्रति हमारा जो लापरवाह और गैर जिम्मेदाराना रवैया रहा है, उसमें परिवर्तन करना ही होगा। इसके लिए सर्वप्रथम हमें ऐसी जीवन शैली को अपनाना होगा जो प्रकृति एवं उसके संसाधनों को बनाए रखने में मदद करें। पानी प्रकृति का चालक है। हम सभी अच्छी तरह से यह जानते हैं की जल ही जीवन है और जीवन को बनाए रखने के लिए अपरिहार्य जल की उपलब्धता निरंतर आवश्यक है, किन्तु पिछले कुछ वर्षों में मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विभिन्न अनुसंधान के अनुसार वर्तमान समग्र विश्व में भारी जल संकट की परिस्थिति निर्मित हो गई है, जिसका सीधा असर मनुष्यों के सामान्य जनजीवन पर पड़ता दिख रहा है। वैज्ञानिकों के मतानुसार बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण का प्रसार जल संकट को गहराने का काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि हम जीवित रहना चाहते हैं तो फिर जल संरक्षण के बिना यह संभव नहीं होगा और जल संरक्षण के लिए संकल्प लेने का यह बेहतर अवसर है आइये हम सब संकल्प ले कि जीवन के लिए जल को बचाएं, इसका दुरूपयोग रोके और आने वाले कल के लिए सहेजकर रखने उपायों को सिद्धांत से व्यवहार में उतारने का सार्थक प्रयास करें।

क्रियात्मक अनुसंधान 2016 से विद्यालय का माहौल बना रोचक


क्रियात्मक अनुसंधान के बाद विद्यालय का भौतिक वातावरण में रौनकता आ गयी है। यही नहीं बच्चों में भी विद्यालयीन परिवेश को स्वच्छ रखने में रूचि देखी जा रही है। इस संबंध में अनुसंधानकर्ता शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि केन्द्र प्रवर्तित योजना अंतर्गत शिक्षा सत्र 2015-16 में मेरे द्वारा डाइट जांजगीर के प्राचार्य के.एस. तोमर, सहा. प्राध्यापक यू.के. रस्तोगी, व्याख्याता सुशील कुमार राठौर व प्रद्युम्न कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नवापारा (अमोदा), संकुल केन्द्र अमोदा, विकासखण्ड नवागढ़, जिला-जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों में विद्यालयीन परिवेश को स्वच्छ रखने की आदतों का विकास करना विषय पर क्रियात्मक अनुसंधान किया गया है। इस हेतु कुल 85 में से 50 विद्यार्थियों का चयन किया गया था जहां पूर्व परीक्षण में ए ग्रेड प्राप्त विद्यार्थियों की तादात 0 प्रतिशत थी जो मध्य परीक्षण में बढ़कर 27 तथा अंतिम परीक्षण में 94 प्रतिशत पर पहुंच गयी। इस हेतु कुल 49 दिनों की कार्ययोजना बनायी गयी थी। शिक्षक पंचायत श्री सूर्यवंशी ने बताया कि क्रियात्मक अनुसंधान एक ऐसा अनुसंधान है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में लागू करके हम कई समस्याओं का बेहतर ढंग से निदान कर सकते है। शिक्षा सत्र 2015-16 जिसे डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे समय में मेरे द्वारा क्रियात्मक अनुसंधान कर विद्यालय की कुछ नकारात्मक व्यवहारों को दूर किया गया है जिससे अब विद्यालय का वातावरण और भी स्वच्छ व अनुशासित प्रतीत होता है। विद्यालयीन परिवेश को स्वच्छ रखने से विद्यार्थी का न केवल चित्त स्वस्थ्य होता है अपितु वह एक स्वस्थ्य राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते है। अतः हर शिक्षक को अपने विद्यार्थियों में ऐसी आदतों का विकास करना चाहिए जिससे कि वे विद्यालय के परिवेश को स्वच्छ रख सके और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर सके। इस शोध कार्य को संपन्न कराने में बी. एक्का बीईओ नवागढ़, श्रीमती रिषीकांता राठौर बीआरसी नवागढ़, सोनाराम साहू सरपंच ग्राम पंचायत नवापारा (अमोदा), कौशल प्रसाद साहू अध्यक्ष शाला प्रबंधन व विकास समिति, कन्हैया लाल मरावी प्र. प्रधान पाठक, हीरालाल कर्ष उ.व.शि., संतोष कुमार श्रीवास उ.व.शि. व सफाई कर्मचारी साधराम यादव का बेहतर सहयोग प्राप्त हुआ है।

डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...