26 जनवरी 2019 को हम अपने गणतंत्र का 69 वां गणतंत्र दिवस मना रहे है। तिरंगा हमारे रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुंओर खुशियों की सौगात है। भारत का संविधान जो कि विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, हमें इस देश का निवासी होने का गौरव मिला है। इस गौरव को दिलाने, मातृभूमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिए असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्ति की गाथाओं से भारतीय इतिहास के पृष्ठ भरे हुए है। देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत हजारों की संख्या में भारत माता के वीर सपूतों ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणाम स्वरूप हमारा देश गणतांत्रिक देश हो सका है। गणतंत्र अर्थात गण$तंत्र जिसका अर्थ होता है जनता के द्वारा जनता के लिए शासन। इस व्यवस्था को हम सभी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है। वैसे तो भारत में सभी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते है परंतु गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते है। इस पर्व का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे सभी जाति एवं वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते है। गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को ही मनाते है क्योंकि जब अंग्रेज सरकार की मंशा भारत को एक स्वतंत्र उपनिवेश बनाने की नजर नहीं आ रही थी तभी 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की शपथ ली थी। पूर्ण स्वराज्य के अभियान को पूरा करने के लिए सभी आंदोलन तेज कर दिये गये थे। सभी देशभक्तों ने अपने-अपने तरीके से आजादी के लिए कमर कस ली थी। एकता में बल है, की भावना को चरितार्थ करती विचारधारा में अंततः अंग्रेजों को पीछे हटना ही पड़ा। अंततोगत्वा 1947 में भारत आजाद हुआ तभी से यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1929 की निर्णायक तिथि को गणतंत्र दिवस के रूप में मनायेंगे। वही 26 जनवरी 1950 की तिथि इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान इसी दिन अस्तित्व में आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बन गया। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बड़ा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डा. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक संपूर्ण गणतांत्रिक देश बन गया। देश को गौरवशाली गणतंत्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तों ने अपना बलिदान दिया उन्हें याद करके आदरांजलि देने का पर्व है 26 जनवरी। अंग्रेज जो सर्वप्रथम भारत में व्यापार करने के इरादे से पहुंचे थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने यहां के राजाओं और सामंतों पर अपनी कूटनीति चाल से अधिकार कर लिया। आजादी की पहली आग मंगल पाण्डेय ने 1857 में कोलकाता के पास बैरकपुर में जलाई थी, किंतु कुछ संचार संसाधनों कमी से ये आग ज्वाला नहीं बन सकी परंतु इस आग की चिंगारी कभी बुझी नहीं थी। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर इंदिरा गांधी तक मंगल पाण्डे से लेकर सुभाषचंद्र बोस तक, नाना साहेब से लेकर सरदार पटेल तक, लाल (लाला लाजपतराय), बाल (बाल गंगाधर तिलक), पाल (विपिन चंद्र पाल) हो या गोपाल कृष्ण गोखले, गांधी नेहरू सभी के हृदय में धधक रही थी। 13 अप्रैल 1919 की जलियावाला बाग हत्याकाण्ड की घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे दुखद घटना थी। जब जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चलाकर निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हजारों लोगों को घायल कर दिया था। यह वही घटना थी जिसने भगत सिंह और उधम सिंह जैसे, क्रांतिकारियों को जन्म दिया। अहिंसा के पुजारी हो या हिंसात्मक विचारक क्रांतिकारी, सभी का हृदय आजादी की आग से जलने लगा था। हर वर्ग भारत माता के चरणों में बलिदान देने को तत्पर था। अतः 26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारतवर्ष के कोने-कोने में बड़े उत्साह तथा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष इस दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती है। जांजगीर-चांपा का जिला मुख्यालय जांजगीर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत देश की राजधानी दिल्ली में यह त्यौहार उल्लास व गर्व के साथ मनाया जाता है।
26 जनवरी का मुख्य समारोह जिले स्तर पर हाईस्कूल मैदान जांजगीर में मनाने की परंपरा रही है जहां जिले सहित राज्य भर के विभिन्न भागों से असंख्य व्यक्ति इस समारोह की शोभा देखने पहुंचते है। इस दौरान आकाश में गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जायेंगे जो कि शांति और एकता के प्रतीक को दर्शाते है। पुलिस, एनसीसी, स्काउट की टुकड़िया सीना तानकर अपनी साफ सुथरी वेशभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृश्य मनोहारी होगा और यह भव्य दृश्य देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा देश सेवा के लिए उत्साह का संचार होगा। इस दौरान बैण्ड की धुन सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्रप्रेम की भावना से गुंजायमान करेंगे। विभिन्न शासकीय विभागों की झांकिया वहां के सांस्कृतिक जीवन, वेशभूषा, रीति रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करेंगे। अनेकता में एकता का ये परिदृश्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतंत्र दिवस की संध्या पर सभी शासकीय भवनों व विद्यालयों में रौशनी की जा रही है। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का पर्व देशभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक भारतीय को अपने देश की आजादी प्यारी है। भारत की भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है - “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है” ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है हमारा गणतांत्रिक देश भारत। 26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्जवलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुंओर खुशियों की सौगात है। हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमर करें, वंदन करें, अभिनंदन करें।
भारतीय संविधान हम सबका मान सम्मान है, इस सुंदर लेख के लिए आपको ढेरों बधाईयां, लगातार लिखते रहे
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