जिला मुख्यालय जांजगीर के हाईस्कूल मैदान में 1 से 3 नवंबर 2014 तक राज्य स्थापना दिवस पर राज्योत्सव का धूमधाम से आयोजन किया गया। इस दौरान सभी सरकारी विभागों द्वारा पण्डाल लगाकर अपने विभागीय योजनाओं व विकास कार्यों की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गयी। इसी कड़ी में आदिम जाति कल्याण विभाग के स्टाल में आश्रम शाला अमलडीहा सक्ती के शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने मंगलयान का जीवंत माडल प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। इस दौरान पूरे तीन दिनों तक स्टाल में स्कूली विद्यार्थियों सहित लोगों की भीड़ जुटती रही जहां शिक्षक श्री पाण्डेय द्वारा विस्तार पूर्वक सभी को उसकी कार्यविधि से अवगत कराया गया। इसके अलावा उनके द्वारा निर्मित इव्हीएम मशीन को भी लोगों ने खूब सराहा। अधिकारियों द्वारा स्टाल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सहित अधिकारियों ने श्री पाण्डेय की इस प्रस्तुति की खूब सराहना की। वही शा.उ.मा.शाला चांटीपाली डभरा में पदस्थ व्याख्याता पंचायत विजय कुमार पाण्डेय ने पण्डाल स्थल पर तीनों दिवस उपस्थित रहकर एक बैटरी से पंखा का घूमना, चुंबकीय बल रेखाएं, दाब का प्रभाव, पर्यावरण के घटक, हाइड्रोलिक पावर जैसे गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। राज्योत्सव के द्वितीय दिवस पण्डाल का सहायक आयुक्त एचआर चौहान, अधीक्षक डी आजाद, एसएल शतरंज, श्री कश्यप, शिव कुमार सिदार, रामकुमार कांत आदि ने उपस्थित होकर गतिविधियों से रूबरू हुए।
गौरतलब हो कि विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय द्वारा मंगलयान का डेमों सहित राकेट व मिसाइल पीएसएलवी 25 व उपग्रह मंगलयान सहित हाइड्रोलिक माडल, इव्हीएम मशीन, पर्यावरण के घटक, जैक मशीन व गणितीय गणना से भाई बहन की संख्या बताने का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि अनुपयोगी सामानों से किस तरह से शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एसोसिएशन फार रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन बेसिक सांइस एजुकेशन नागपुर द्वारा राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन 23 से 26 सितंबर 2014 तक नागपुर में किया गया। जिसमें वे प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए थे। खगोल विज्ञान जागरूकता के इस कार्यक्रम से लौटने के बाद उन्होंने मंगलयान का जीवंत डेमो तीन दिन और तीन रात की कड़ी मेहनत कर तैयार किया जिसके बाद उसे राज्योत्सव की प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि इसरो द्वारा साल भर पहले 5 नवंबर 2013 को मंगलयान पृथ्वी से मंगल ग्रह के लिए भेजा गया था जो कि 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। इस अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें वे भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों के अलावा देश के प्रतिष्ठित खगोल वैज्ञानिकों के साथ शामिल हुए थे।
गौरतलब हो कि विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय द्वारा मंगलयान का डेमों सहित राकेट व मिसाइल पीएसएलवी 25 व उपग्रह मंगलयान सहित हाइड्रोलिक माडल, इव्हीएम मशीन, पर्यावरण के घटक, जैक मशीन व गणितीय गणना से भाई बहन की संख्या बताने का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि अनुपयोगी सामानों से किस तरह से शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। विज्ञान शिक्षक शैल पाण्डेय ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एसोसिएशन फार रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन बेसिक सांइस एजुकेशन नागपुर द्वारा राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन 23 से 26 सितंबर 2014 तक नागपुर में किया गया। जिसमें वे प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए थे। खगोल विज्ञान जागरूकता के इस कार्यक्रम से लौटने के बाद उन्होंने मंगलयान का जीवंत डेमो तीन दिन और तीन रात की कड़ी मेहनत कर तैयार किया जिसके बाद उसे राज्योत्सव की प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि इसरो द्वारा साल भर पहले 5 नवंबर 2013 को मंगलयान पृथ्वी से मंगल ग्रह के लिए भेजा गया था जो कि 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। इस अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय मंगल महोत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें वे भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों के अलावा देश के प्रतिष्ठित खगोल वैज्ञानिकों के साथ शामिल हुए थे।
शैल पाण्डेय और राजेश सूर्यवंशी जी आप दोनों के नवाचार तो पूरे राज्य में प्रसिद्ध है दोनों को सादर बधाई
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