सरकारी स्कूल व बच्चों के बेहतर शिक्षा दीक्षा के लिए पूरी तरह से समर्पित शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी अपने स्कूल में न केवल अपना समय लगा रहे है बल्कि अपने वेतन से पैसे लगाकर भी बेहतर कार्य कर रहे है, जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) आज राज्य स्तर पर नवाचारी गतिविधियों के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। यहां के शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने एक से बढ़कर एक नवाचार किये है, जिसमें शून्य बजट से लेकर लाखों रूपये के नवाचार कर बड़ी सफलता हासिल की है। इन्हांने विद्यार्थियों, स्टाफ व समुदाय के सहयोग से पानी की किल्लत से जूझ रहे स्कूल के खाली मैदान को ड्रीप इरीगेशन का नवाचार कर करीब दो साल के दरमियान हरे भरे पेड़ पौधों से भरे मैदान में तब्दील कर दिया जिसमें वर्तमान में 200 से भी अधिक पेड़ है जो तेजी से बढ़ रहे है और पूरा स्कूल परिसर आक्सीजन जोन बन गया है। इसके अलावा डिजिटल क्लास रूम की स्थापना उनकी बड़ी सोच व मेहनत का परिणाम है जिसमें उन्होंने अपने वेतन से प्रत्येक माह पैसे बचा बचाकर लाखों रूपये एकत्र कर लिये फिर प्रोजेक्टर, लैपटाप, कैमरा, प्रिंटर, स्कैनर, होम थियेटर, साउण्ड सिस्टम, लैक्चर स्टेण्ड सहित तमाम तकनीकी संसाधन क्रय किये और फिर तैयार हुआ डिजिटल क्लास रूम जहां गत 13 फरवरी 2017 को इसका विधिवत शुभारंभ जिला पुलिस अधीक्षक अजय यादव व पूर्व विस उपाध्यक्ष श्री चंदेल ने पहुंचकर किया। बच्चों को इस क्लास रूम में न केवल किताबी ज्ञान मिलती है वरन देश दुनिया से जुड़ी घटनाओं से जोड़ा जाता है। किताबों को पीडीएफ फाईल के रूप में बच्चे बड़े स्क्रीन पर पढ़ते है, किताबों में दी गयी उदाहरणों को विडियो के रूप में देखते व सुनते है और उस पर चर्चा होती है। जांजगीर-चांपा जिले के इस प्रथम डिजिटल क्लास के मेन्टेनेंस के लिए यह शिक्षक प्रत्येक माह अपने वेतन का एक निश्चित हिस्सा खर्च करते आ रहे है।
विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं
शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी कहते है कि केवल किताबी ज्ञान परोसना ही बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है, उन्हे रचनात्मक कार्यों से बेहतर जीवन के लिए प्रेरित करना साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए जल का सदुपयोग करने और अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। शिक्षक ने बताया कि वो यही करते है प्रत्येक दिवस विद्यालय में देश दुनिया की घटनाओं को डिजिटल क्लास रूम में प्रदर्शित करते है उन पर चर्चा परिचर्चा करते है। प्रत्येक दिवस प्रेरणा गीत के साथ कक्षा की शुरूआत होती है जिसमें बच्चे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है। महापुरूषों के जयंतियों विशेष दिवसों का बेहतर ढंग से गरिमामय आयोजन कर बच्चों को आदर्श जीवन के लिए प्रेरित किया जाता है। समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों को बतौर मेहमान आमंत्रित कर बच्चों के साथ जोड़ने का प्रयास करते है।
शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी कहते है कि केवल किताबी ज्ञान परोसना ही बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है, उन्हे रचनात्मक कार्यों से बेहतर जीवन के लिए प्रेरित करना साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए जल का सदुपयोग करने और अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। शिक्षक ने बताया कि वो यही करते है प्रत्येक दिवस विद्यालय में देश दुनिया की घटनाओं को डिजिटल क्लास रूम में प्रदर्शित करते है उन पर चर्चा परिचर्चा करते है। प्रत्येक दिवस प्रेरणा गीत के साथ कक्षा की शुरूआत होती है जिसमें बच्चे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है। महापुरूषों के जयंतियों विशेष दिवसों का बेहतर ढंग से गरिमामय आयोजन कर बच्चों को आदर्श जीवन के लिए प्रेरित किया जाता है। समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों को बतौर मेहमान आमंत्रित कर बच्चों के साथ जोड़ने का प्रयास करते है।
पहले नवाचार करते है, सफल होने पर करते है स्टाल में प्रदर्शन
राज्य स्तर पर नवाचारी रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्धि पा चुके, शिक्षक प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाने वाले शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी विद्यालय में नित नये नवाचार करते रहते है, जब इसमें सफलता प्राप्त कर लेते है तब उसे शैक्षणिक स्टाल व सेमीनार आदि के माध्यम से प्रस्तुत करते है। हाल ही में 24 से 26 दिसंबर तक सिवनी नैला में आयोजित सूर्यांश शिक्षा महा महोत्सव में विद्यार्थियों व शिक्षकों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण सरंक्षण के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने तथा सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम की तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें अनुपयोगी सामानों से अत्यंत ही कम खर्चे में तैयार हस्तचलित और परस्पर क्रियाशील चलायमान विज्ञान माडलों को देखने जोरदार भीड़ उमड़ी। स्टाल में अत्यंत कम खर्चे में तैयार सरल सूक्ष्मदर्शी का माडल जिसमें प्याज की झिल्ली से कोशिकाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, खगोली घटनाओ को दिखाते हुए सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण व सौरमण्डल का जीवंत माडल, घरेलू वेस्ट मटेरियल से तथा कम क्षमता वाली मोटर व बैटरी से चलने वाली हवाई जहाज, बबल गन, जीवंत गोबर गैस माडल, सेंसर के माध्यम से आटोमेटिक पानी टंकी भर जाने पर अलार्म बजना, श्वसन प्रक्रिया, टेलीस्कोप, पेरिस्कोप, राकेट लांचर, कोसे का जीवन चक्र, ज्वालामुखी, दिशा सूचक यंत्र, पानी इंडिकेटर आदि क्रियाविधि के साथ स्टाल में दिखाया गया। स्टाल में डिजिटल क्लास रूम का प्रदर्शन किया गया तो वही वनों की कटाई से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव एवं पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी बताये जा रहे है और अनुपयोगी प्लास्टिक बाटलों से पर्यावरण संरक्षण का माडल प्रस्तुत करते हुए बताया गया। इसके पूर्व भी अनेक सार्वजनिक व सामाजिक आयोजनों में उनके द्वारा इस तरह के स्टाल लगाकर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदर्शन किया जा चुका है, खास बात यह है कि ऐसे सारे गतिविधियों में आने वाली खर्चों को वे स्वयं वहन करते है।
अनेक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त कर चुके है शिक्षक
शिक्षक पंचायत के रूप में राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कई बार राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर विभागीय प्रशिक्षणों व कार्यशालाओं में हिस्सा लिया है। उन्हे बेहतर कार्य करने के लिए अब तक शासन प्रशासन सहित कई सार्वजनिक मंचों से सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके है, ऐसे पुरस्कारों से जो राशि प्राप्त होती है उसे वे अपने स्कूल में नवाचार कार्य के लिए खर्च करते है। हाल ही में उन्हे स्व. कांशीराम गढ़ेवाल स्मृति उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ जिसमें शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र सहित 5 हजार रूपये नगद राशि मिली किंतु उन्होंने मंच से ही उक्त राशि समाज हित में आयोजन समिति को भेंट कर दिया। शिक्षक का मानना है कि हमने जिस समाज में जन्म लिया है उसके प्रति हमारे कर्तव्य है जिसे पूरा करना हमारी महती जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अब तक उन्हे कुल 17 सम्मान प्राप्त हो चुके है, यह सम्मान उन्हे और भी बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
राज्य स्तर पर नवाचारी रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्धि पा चुके, शिक्षक प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाने वाले शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी विद्यालय में नित नये नवाचार करते रहते है, जब इसमें सफलता प्राप्त कर लेते है तब उसे शैक्षणिक स्टाल व सेमीनार आदि के माध्यम से प्रस्तुत करते है। हाल ही में 24 से 26 दिसंबर तक सिवनी नैला में आयोजित सूर्यांश शिक्षा महा महोत्सव में विद्यार्थियों व शिक्षकों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण सरंक्षण के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने तथा सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम की तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें अनुपयोगी सामानों से अत्यंत ही कम खर्चे में तैयार हस्तचलित और परस्पर क्रियाशील चलायमान विज्ञान माडलों को देखने जोरदार भीड़ उमड़ी। स्टाल में अत्यंत कम खर्चे में तैयार सरल सूक्ष्मदर्शी का माडल जिसमें प्याज की झिल्ली से कोशिकाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, खगोली घटनाओ को दिखाते हुए सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण व सौरमण्डल का जीवंत माडल, घरेलू वेस्ट मटेरियल से तथा कम क्षमता वाली मोटर व बैटरी से चलने वाली हवाई जहाज, बबल गन, जीवंत गोबर गैस माडल, सेंसर के माध्यम से आटोमेटिक पानी टंकी भर जाने पर अलार्म बजना, श्वसन प्रक्रिया, टेलीस्कोप, पेरिस्कोप, राकेट लांचर, कोसे का जीवन चक्र, ज्वालामुखी, दिशा सूचक यंत्र, पानी इंडिकेटर आदि क्रियाविधि के साथ स्टाल में दिखाया गया। स्टाल में डिजिटल क्लास रूम का प्रदर्शन किया गया तो वही वनों की कटाई से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव एवं पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी बताये जा रहे है और अनुपयोगी प्लास्टिक बाटलों से पर्यावरण संरक्षण का माडल प्रस्तुत करते हुए बताया गया। इसके पूर्व भी अनेक सार्वजनिक व सामाजिक आयोजनों में उनके द्वारा इस तरह के स्टाल लगाकर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदर्शन किया जा चुका है, खास बात यह है कि ऐसे सारे गतिविधियों में आने वाली खर्चों को वे स्वयं वहन करते है।
अनेक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त कर चुके है शिक्षक
शिक्षक पंचायत के रूप में राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कई बार राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर विभागीय प्रशिक्षणों व कार्यशालाओं में हिस्सा लिया है। उन्हे बेहतर कार्य करने के लिए अब तक शासन प्रशासन सहित कई सार्वजनिक मंचों से सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके है, ऐसे पुरस्कारों से जो राशि प्राप्त होती है उसे वे अपने स्कूल में नवाचार कार्य के लिए खर्च करते है। हाल ही में उन्हे स्व. कांशीराम गढ़ेवाल स्मृति उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ जिसमें शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र सहित 5 हजार रूपये नगद राशि मिली किंतु उन्होंने मंच से ही उक्त राशि समाज हित में आयोजन समिति को भेंट कर दिया। शिक्षक का मानना है कि हमने जिस समाज में जन्म लिया है उसके प्रति हमारे कर्तव्य है जिसे पूरा करना हमारी महती जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अब तक उन्हे कुल 17 सम्मान प्राप्त हो चुके है, यह सम्मान उन्हे और भी बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।






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