The Digital Teacher
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों को सर्वाधिक प्रोत्साहन की दरकार
            (8 मार्च 2019 विश्व महिला दिवस पर विशेष)

ल 8 मार्च 2019 शुक्रवार को पूरा संसार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनायेगा। हमारे भारतवर्ष में भी जागरूक महिलाएं, जात-पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं। साथ ही पुरुष वर्ग भी इस दिन को महिलाओं के सम्मान में समर्पित करता है। इतिहास को झांकने पर पता चलता है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले 1909 में मनाया गया था। इसे आधिकारिक मान्यता तब दी गई जब 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक थीम के साथ इसे मनाना शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी ’सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर। 19 मार्च 1911 को पहली बार आस्ट्रिया डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। 1913 में इसे ट्रांसफर कर 8 मार्च कर दिया गया और तब से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है।एक शिक्षक होने के नाते हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों को आगे बढ़ाने के जितने भी बेहतर प्रयास हो वो करें। हम सब भली भांति जानते है कि बालिकाओं की जीवन में तीन भूमिकाएं  प्रमुख होती है बेटी, पत्नी और माँ जो कि इन्हे समाज देती है किंतु उन्हे एक बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना हमारी जिम्मेदारी है। बालिकाओं की शिक्षा इस तरह से होनी चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों को उचित तरीके से पूरा करने में सक्षम हो सके। एक शिक्षित महिला अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में अच्छी तरह जानती हैं। वह देश के विकास के लिए पुरुषों के समान या उनसे बेहतर योगदान दे सकती हैं। अपने एक दशक से भी अधिक के शिक्षकीय कार्यकाल का मेरा अनुभव तो यही कहता है कि एक ही माहौल, परिस्थिति और परिवार में रहते हुए भी बेटियां कही ज्यादा आज्ञाकारी और जल्दी सीखने वाली होती है। शायद यही वजह रहा कि जब भी कुछ बेहतर परफार्मेंस कराने का अवसर मिला मैंने अपने विद्यालय में बेटियों को ही यह अवसर दिया और राष्ट्रीय स्तर पर इंस्पायर अवार्ड, राज्य स्तर पर विज्ञान प्रदर्शनी तथा जिला स्तर पर युवा उत्सव जैसे गतिविधियों में चयनित होकर बेटियों ने विद्यालय, गांव तथा जिले का नाम आगे बढ़ाया, बेटियों की इन उपलब्धियों से मुझे लगातार काम करने के लिए ऊर्जा मिलती है। बावजूद इन सबके यह पीड़ा बनी हुई है कि घरेलू परिस्थितियों की वजह से हमारी कई होनहार विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ पाती है। कुछ ऐसे बालिकाओं के घर जाकर उनके माता-पिता से बातचीत करके काफी हद तक इस समस्या को खत्म करने का प्रयास भी किया गया है किंतु पूरी तरह से नहीं। महिला के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकने में भी मदद करती है। शिक्षा महिलाओं को जीवन के मार्ग को चुनने का अधिकार देने का पहला कदम है जिस पर वह आगे बढ़ती है। एक शिक्षित महिला में कौशल, सूचना, प्रतिभा और आत्मविश्वास होता है जो उसे एक बेहतर मां, कर्मचारी और देश का निवासी बनाती है। विद्यालय या समुदाय स्तर पर यदि शिक्षक आपस में कुछ ऐसी योजना बनाये कि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देकर कुछ बेहतर किया जा सके ऐसे प्रयास के तहत कक्षा 8 की बालिकाओं को कम्प्यूटर का प्रारंभिक ज्ञान देने का सिलसिला वर्ष 2017 से मैंने आरंभ किया था जिसके बेहतर परिणाम भी मिले बच्चों की दैनिक उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हुई हालांकि परिस्थितिवश यह गतिविधि लगातार नहीं हो सकी। साल में एक बार बेहतर उपलब्धि वाले विद्यार्थियों को नगद राशि से सम्मानित करने की परंपरा हमारे विद्यालय द्वारा बनी हुई है जिसमें हर बार बालिकाएं ही बाजी मार जाती है, ऐसे बहुत सारी योजनाएं विद्यालय या समुदाय स्तर पर बननी चाहिए जिससे बालिकाओं का हौसला आफजाई हो सके। आज महिला दिवस के पावन अवसर पर मैं अपने पूरे राज्य के उन महिला शिक्षिकाओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं जिनसे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर मुझे सीखने सिखाने का अवसर मिला है तथा जिनके शैक्षणिक गतिविधियों से मैं समय-समय पर प्रेरित होते रहता हूं। इसके साथ ही हम सबको यह संकल्प लेने की जरूरत है कि हम अपने विद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों को आगे बढ़ने का हर संभव अवसर दे, उन्हें किसी भी विकास के अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। बालिकाओं के प्रति हमारी नजरों में तिरस्कार या लघुता का भाव नहीं होना चाहिए। सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब हम बालिकाओं के लिए कुछ बेहतर करेंगे विद्यालय का माहौल ऐसा बनाये जहां बालिकाएं स्वयं को सर्वोच्च महसूस करें जहां वह सिर उठा कर अपने लड़की होने पर गर्व करे, न कि पश्चाताप, कि काश मैं एक लड़का होती। 
विश्व महिला दिवस पर डिजिटल विद्यालय में गांव की महिलाओं का होगा सम्मान ..
विश्व महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2019 शुक्रवार को शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा में गांव की माताओं का सम्मान कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम के संयोजक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में माताओं की भूमिका सर्वोपरि होती है। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों की माताओं को विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाना है। महिला दिवस पर महिलाओं के महत्ता पर आधारित चलचित्र का प्रदर्शन व अतिथियों छात्राओं तथा माताओं का उद्बोधन होगा। कार्यक्रम की तैयारी में प्रधान पाठक कन्हैया लाल मरावी, संतोष कुमार श्रीवास, हीरालाल कर्ष, राजेश कुमार सूर्यवंशी, साधराम यादव सहित विद्यार्थीगण जुटे हुए है। आप सभी इस आयोजन में सादर आमंत्रित है ...
 वूमेन्स डे 2019 को लेकर भारत सरकार के वेबसाइट पर क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर मिला प्रमाण पत्र



महिला दिवस 2019 पर विद्यालय की बालिकाओं द्वारा चित्रकारी





                  

सभी पाठकों से सादर अनुरोध इस पोस्ट पर कमेंट के माध्यम से आप अपना विचार व्यक्त कर सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं। शैक्षणिक नवाचारी गतिविधियों पर मेरे लेख को अपने ई मेल पर प्राप्त करने के लिए आप मुझे सबक्राइब कर सकते है...





3 comments:

  1. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  2. बहुत ही प्रेरणादायी लेख है, सरकारी स्कूल में आप जैसे समर्पित शिक्षकों का होना गर्व की बात है..

    ReplyDelete

डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...