The Digital Teacher : एस.सी.ई.आर.टी. के राज्य स्तरीय शोध सेमीनार 2014 में शामिल हुए शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी

एस.सी.ई.आर.टी. के राज्य स्तरीय शोध सेमीनार 2014 में शामिल हुए शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी



राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर में क्रियात्मक अनुसंधान पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय शोध सेमीनार संपन्न हुआ जिसमें जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती ब्लाक से दो शिक्षकों ने हिस्सा लिया। 28 फरवरी व 1 मार्च 2014 को संपन्न हुए सेमीनार में राज्य भर के अलग-अलग जिलों से कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती ब्लाक के शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी व सहायक शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने हिस्सा लेकर अपने लघु शोध के संबंध में व्याख्यान दी। दो दिवसीय राज्य स्तरीय शोध सेमीनार में कार्यक्रम मार्गदर्शन प्रदान करने एन.सी.ई.आर.टी. दिल्ली से डा. एन.के. गुप्ता, श्रीमती डा. एस. फ्रांसिस विप्र महाविद्यालय रायपुर, श्रीमती कल्पना देशमुख व कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. ज्योति चक्रवर्ती उपस्थित रहे।
गौरतलब हो कि उक्त दोनों शिक्षकों द्वारा शिक्षा सत्र 2012-13 शैक्षिक मुद्दों पर शोध पत्र लिखा गया था जिसमें सक्ती ब्लाक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डोड़की में पदस्थ शिक्षक पंचायत ने  “ छात्रों में गृह कार्य के आदतों का विकास करना “ संबंधी विषय पर एक लघु शोध किया था। राज्य स्तरीय शोध सेमीनार के दौरान पावर प्वाइंट आधारित अपने व्याख्यान में शिक्षक राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि आमतौर पर सभी स्कूलों में यह आम समस्या हो चली है कि बच्चे गृह कार्य के प्रति अरूचि रखते है ऐसे में इस ज्वलंत समस्या का लघु शोध के द्वारा निदान करने का प्रयास किया गया है। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने बताया कि हम बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार विविधि गतिविधि आधारित कार्य देकर उन्हे जिम्मेदारी का अहसास कराये बाद में धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होगी और उसके आत्मविश्वास व कार्यक्षमता का उपयोग गृह कार्य के प्रति कर सकेंगे। इसके अलावा बच्चों द्वारा किये जाने वाले त्रुटियुक्त छोटे-छोटे कार्यों की सराहना करके भी उन्हे गृह कार्य के प्रति उत्साहित किया जाये ताकि वे अपने महत्व का अहसास कर सके और शिक्षक के निर्देशों का पालन करें, इसके अलावा भी बच्चों से भावनात्मक रूप से जुड़कर उन्हे नियमित रूप से गृहकार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

इसी तरह से आश्रम शाला अमलडीहा में पदस्थ शिक्षक शैल कुमार पाण्डेय ने “ छात्रों में स्व अध्ययन की प्रेरणा जागृत करना “ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि शिक्षक की अनुपस्थिति में कक्षा में बच्चे अध्ययन के बजाय खेलकूद में व्यस्त हो जाते है, ऐसे में उनमें स्व अध्ययन की प्रेरणा जागृत कर उन्हे कक्षा में लगातार अध्यापन कार्य में व्यस्त रखा जा सकता है। श्री पाण्डेय ने पावर पाइंट में बताया कि बच्चों को समूह में विभाजित कर उनके रूचि अनुसार कार्य सौंपी जाये, उनसे शिक्षण अधिगम सामग्री का निर्माण कराया जाये, बच्चों द्वारा उनके समूह में उनके द्वारा बनाये गये सामग्री का प्रदर्शन कराया जाये तथा शिक्षक बच्चों द्वारा बनाये सामग्री से अध्यापन कार्य करें ऐसे तमाम गतिविधियों से बच्चों में स्व अध्ययन की प्रेरणा जागृत की जा सकेगी। कार्यशाला में पहुंचे प्रतिभागी अंतर्यामी प्रधान पिथौरा महासमुंद द्वारा बच्चों में कला के क्षेत्र में रूचि जागृत करना, लक्ष्मीनाथ सकरिया महासमुंद द्वारा बच्चों में शारीरिक स्वच्छता के प्रति रूचि जगाना, विजय कुमार राय कांकेर द्वारा बच्चों में जल संरक्षण के प्रति रूचि जगाना, अशफाक उल्ला खान कोरिया द्वारा हिंदी भाषा के अक्षर लिखने के दौरान हुई त्रुटियों में सुधार करना, श्रीमती मधुदानी रायपुर द्वारा पर्यवेक्षकों में शिशुओं के शारीरिक विकास के आंकलन की समझ बढ़ाना, श्रीमती वंदना वर्मा रायपुर द्वारा भारत के राजनैतिक मानचित्र में राज्यों के चिन्हांकन में त्रुटि सुधार करना, श्रीमती महजबी खान बस्तर द्वारा सामाजिक बुराईयों से ग्रसित विद्यार्थियों को शाला की मुख्य धारा से जोड़ना, विधुशेखर झा बस्तर द्वारा आदर्श संकुल शाला में बोलने की कौशल का विकास करना, श्रीमती कमला रावत अंबिकापुर द्वारा विज्ञान विषय में एएलएम का प्रयोग करने, दिनेश कुमार निषाद कबीरधाम द्वारा कक्षा 3 री के बच्चों में वर्तनी की समझ विकसित करना, दुलेश्वरनाथ योगी कबीरधाम द्वारा छात्रों में भिन्न के जोड़ की अवधारणा की समझ विकसित करना, डी.के. जैन बिलासपुर द्वारा बीएड छात्रों द्वारा कक्षा में टीएलएम का प्रयोग सुनिश्चित करना, अमित सक्सेना कांकेर द्वारा बच्चों में भिन्न की अवधारणात्मक समझ विकसित करना, दिनेश चंद्र नाग कांकेर द्वारा वर्तनी लेखन संबंधी अशुद्धि दूर करना, पी.एन. पाण्डेय बेमेतरा द्वारा स्कूल में उपलब्ध सहायक सामग्री का उपयोग करने, श्रीमती एस. मारू महासमुंद द्वारा प्रथम कालखण्ड में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने क्रियात्मक शोध का वाचन किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को एससीईआरटी द्वारा प्रकाशित शोध पुस्तिका व प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया।

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