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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 2 आदिमानव





स्नेही विद्यार्थियों व शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 2 आदिमानव को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में 12 प्रश्नों का क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद




30 मई 2020 को पढ़ई तुहर दुआर योजना के तहत मेरे द्वारा ली गयी आनलाईन कक्षा का दृश्य







(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. आदि दिमानव छोटे-छोटे समूहों में रहते थे किंतु वे भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरे जगह भटकते रहते थे और स्थायी निवास नहीं करते थे।
2. आदिमानव पेड़ों की पत्तियों, छाल व जानवरों की खाल से अपने शरीर को ढकते थे।
3. आदिमानव लकड़ी, सीप, शंख, चमकीले पत्थरों व हड्डियों से बने आभूषणों का प्रयोग करते थे।
4. आदिमानव लोहा व पीतल जैसे धातुओं से परिचित नहीं थे।
5. आदिमानवों के औजार पत्थरों से बने होते थे उस काल को पाषाण काल कहते है।
6. आदि मानव आग का उपयोग हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा करने, मांस को भूनकर खाने व ठण्ड से अपने शरीर को बचाने के लिए करते थे।
7. छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर व सरगुजा क्षेत्र में आज भी बहुत लोग जंगलों में रहकर आदि मानवों जैसी जीवन व्यतीत कर रहे है।
8. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कबरापहाड़ी व सिंघनपुर गुफा तथा दुर्ग जिले के चितवा डोंगरी व डौंडीलोहारा की गुफाओं में आदि मानवों द्वारा बनाये शैल चित्र उपलब्ध है।
9.  आदि मानव प्रकृति के बहुत करीब थे वे पेड़ पौधों व पशु पक्षियों को अपना सगे संबंधी मानते थे अैर देवी देवताओं में विश्वास रखते थे।
10. आदि मानवों ने धरती में बहुत सारी खोजे की उन्होंने पता लगाया कि कौन सा फल खाया जा सकता है, कौन से पौधे से औषधि बनती है, कौन सा पौधा या फल विषैला होता है।
11. आदि मानवों ने पशु पक्षियों व पेड़ पौधों के गुणों के बारे में बहुत बारीकी जानकारी एकत्र की जो आगे चलकर खेती व पशुपालन का आधार बना।
12. आदि मानवों ने सबसे पहले कुत्ता पाला जो शिकार में उनकी मदद करता था, उसके बाद भेड़, बकरी व गाय पालना आरंभ किया।
13. भारतीय उप महाद्वीप में खेती की शुरूआत आज से करीब 5 से 6 हजार साल पहले हुई है।
14. एक स्थान पर दो तीन साल तक लगातार खेती करने के बाद उस स्थान को छोड़कर अन्य स्थान पर खेती करना स्थानांतरण या झूम खेती कहते है बस्तर व सरगुजा अंचल के कुछ जगहों में यह पद्धति आज भी अपनायी जा रही है।
15. आदि मानव धरती व प्रकृति को ईश्वरीय या दैवीय शक्ति मानकर उन्हे खुश करने के लिए नाच गान करते तथा जानवरों की बलि चढ़ाते थे।
16. खेती आरंभ होने के साथ ही आदि मानव स्थायी बसना आरंभ किये जिसके साथ ही घर, बस्ती गांव तथा मिट्टी के बर्तन आदि बनना आरंभ हुआ।

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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 1 इतिहास के स्त्रोत



स्नेही विद्यार्थियों व शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 इतिहास के स्त्रोत को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में 15 प्रश्नों का क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद







    (पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. इतिहास का जनक यूनान का हेरोडोटस है।
2. इतिहास का अर्थ है पुराने समय की घटनाओं का वर्णन करना, इसे अंग्रेजी में हिस्ट्री कहते है।
3. इतिहास जानने के स्त्रोत है- पुराने ग्रंथ, शिलालेख, खुदाई से प्राप्त अवशेष, स्मारक, बर्तन, औजार, हथियार, चित्र, सिक्के व यात्रा संस्मरण आदि है।
4. आदि मानव लिखना व पढ़ना नहीं जानते थे इसलिए वे अपनी बात चित्र बनाकर कहते थे।
5. कबरा पहाड़ी और सिंघनपुर गुफा रायगढ़ जिले में स्थित है जहां आदिमानवों के द्वारा बनाये शैल चित्र है।
6. आदि मानव जबलिखना शुरू किये तब वे अपनी बात पत्थरों पर लिखकर कहने लगे जिसे शिलालेख कहा              गया। इसके अलावा भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र पर भी लेख लिखा गया है।
7. अधिकांश शिलालेख पाली या प्राकृत भाषा में ही लिखे गये है।
8. इतिहास की घटनाओं को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता कहलाते है।
9. महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर में स्थित है।
10. बिलासपुर जिले के किरारी गांव से प्राप्त काष्ठ स्तंभ ऐतिहासिक महत्व का है।
11. प्राचीनकाल की दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह कर जिस स्थान में सुरक्षित रखा जाता है उसे संग्रहालय 
       (म्यूजियम) कहते है।
12. पत्थरों व शिलाओं पर खोदकर लिखी गयी बातें शिला लेख कहलाती है।
13. पत्थर, लोहे व लकड़ियों पर खोदकर लिखी गयी बातें स्तंभ लेख कहलाती है।
14. विशेष प्रकार के पत्तों पर रंगो व स्याही से लिखी गयी बातें भोजपत्र, ताड़पत्र कहलाती है।
15. तांबे के पत्तों पर खोदकर लिखी गयी बातें ताम्र पत्र कहलाती है।
16. वर्तमान को समझने के लिए भूतकाल को जानना जरूरी होता है इसलिए इतिहास का अध्ययन किया जाता है यह हमारे विकास की कहानी है। इससे हम अपनी सभ्यता व संस्कृति के बारे में ज्ञान प्राप्त करते है जो हमें लगातार आगे बढ़ने में मदद देती है।
 


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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 8 वीं विषय विज्ञान अध्याय 2 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक


शिक्षक साथियों सादर नमस्कार
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 8 वीं विज्ञान के अध्याय 2 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद








                            (पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. हम जो कपड़े पहनते है वे प्राकृतिक या कृत्रिम रेशों से बने होते है। 
2. कृत्रिम, संश्लेषित या मानव निर्मित रेशे विभिन्न रासायनिक पदार्थों से मानव द्वारा तैयार किये जाते है।
3. रेयान, नायलान, डेक्रान, टेरेलीन व डरवन संश्लेषित रेशे कहलाते है।
4. सश्लेषित रेशे की खासियत होती है कि यह सिकुड़ती नहीं, जल्दी सूखती है और इन्हे इस्तरी करने की                 जरूरत नहीं होती है।
5. छोटे-छोटे रासायनिक पदार्थों से मिलकर बनी बड़ी पदार्थ बहुलक या पालीमर कहलाती है।
6. बहुलक प्रकृति में भी पाये जाते है कपास एक बहुलक का उदाहरण है जो सेलुलोज कहलाता है।
7. रबर, रेशम, लकड़ी बहुलक है।
8. काष्ठ लुगदी के रासायनिक उपचार से प्राप्त मानव निर्मित रेशा रेयान या कृत्रिम रेशम कहलाता है।
9. प्रथम पूर्ण रूप से मानव निर्मित संश्लेषित रेशा नाइलान है।
10. पालिएस्टर एक संश्लेषित रेशा है इससे बने कपड़े में सिलवटे नहीं पड़ती और ये आसानी से धुल जाते हैै।
11. कृत्रिम रेशे गर्म करने पर पिघल जाते है जो इसका हानिकारक गुण है।
12. प्लास्टिक भी एक बहुलक है इसका पुनः चक्रण किया जाता है।
13. ऐसा प्लास्टिक जो गर्म करने पर मुड़कर विकृत हो जाती है थर्मोप्लास्टिक कहलाता है।
14. पालिथीन और पी.वी.सी. थर्मोप्लास्टिक का उदाहरण है इससे खिलौने, कंघी व बर्तन आदि बनाये जाते है।
15. बैकेलाइट थर्मोसेटिंग प्लास्टिक है जो कि उष्मा और विद्युत का कुचालक होता है।
16. प्लास्टिक अनअभिक्रियाशील अर्थात जल व वायु से अभिक्रिया नहीं करते है।
17. वे पदार्थ जो प्राकृतिक क्रिया से अपघटित हो जाते है जैव निम्नीकरणीय कहलाते है।
18. वे पदार्थ जो प्राकृतिक क्रिया से अपघटित नहीं होते है जैव अनिम्नीकरणीय        कहलाते है।
19. आग बुझाने वाले कर्मचारियों के कपड़े मेलामाइन से बने होते है जो आग नहीं पकड़ते है।
20. हमें पालिथीन की जगह कपास व जूट से बने थैलियों का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इससे पर्यावरण                 प्रदूषित नहीं होता है।
21. कचरा एकत्र करने के लिए दो तरह के प्लास्टिक बाल्टी उपयोग में लायी जा रही है जिनका रंग हरा व                  नीला  होता है।

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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय विज्ञान अध्याय 2 हमारा पर्यावरण


शिक्षक साथियों सादर नमस्कार
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विज्ञान के अध्याय 2 हमारा पर्यावरण को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद








(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. हवा, पानी, मिट्टी, पौधे व जंतु आदि पर्यावरण के घटक कहलाते है। दो प्रकार के घटक होते है-सजीव व निर्जीव
2. पौधों की पत्तियों का हरा रंग क्लोरोफिल के कारण होता है।
3. पर्यावरण के निर्जीव घटक वायु, जल, मिट्टी व प्रकाश है।
4. पर्यावरण के सजीव घटक पौधे व जंतु है।
5. ऐसे जीव जो पौधों व जंतु दोनों खाते है वे सर्वाहारी कहलाते है।
6. पौधों में क्लोरोफिल होने के कारण वे अपना भोजन स्वयं बना पाते है।
7. शाकाहारी, मांसाहारी व सर्वाहारी जीव परपोषी कहलाते है।
8. पौधे उत्पादक तथा जीव जंतु उपभोक्ता कहलाते है।
9. जंतु उपभोक्ता कहलाते है।
10. पर्यावरण के सजीव व निर्जीव घटक एक दूसरे पर निर्भर होते है।
11. खाद्य श्रृंखला सदैव पौधों से आरंभ होता है।
12. खाद्य जाल में प्रत्येक जीव एक से अधिक जीवों को खाता है। एक जीव कई खाद्य श्रृंखला में रह सकता है तथा कई खाद्य श्रृंखला आपस में जुड़कर खाद्य जाल बनाते है।
13. बीजों को जीव जंतुओं द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलाना प्रकीर्णन कहलाता है।
14. वायु प्रदूषण के लिए वाहनों को धुएं, कारखानों से निकले धुएं तथा कचरा जलाने से उत्पन्न धुआ उत्तरदायी होती है।
15. वर्षा के जल को एकत्र करना वर्षा जल संग्रहण कहलाता है।
16. ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता कम होती है, स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है तथा चिड़चिड़ापन, सिरदर्द व चक्कर आता है।
17. प्रकृति में संतुलन बनाये रखने के लिए वनों की कटाई रोकनी चाहिए। अधिकाधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिए तथा वन्य जीवों की सुरक्षा करनी चाहिए। 
18. छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख वनस्पतियां साल, सागौन व बीजा, शीशम, बांस व तेंदू, महुआ, सरई व सेमल है।
19. अत्याधिक वर्षा से बाढ़ आती है तथा बारिश न होने से सूखा पड़ता है।
20. पर्यावरण प्रदूषित वायु से, प्रदूषित जल से व तीव्र ध्वनि से प्रदूषित होता है।

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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय विज्ञान अध्याय 3 पदार्थ की प्रकृति


 शिक्षक साथियों सादर नमस्कार


कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विज्ञान के अध्याय 3 पदार्थ की प्रकृति को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पु़स्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद














(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)
1. सभी वस्तुएं पदार्थ से मिलकर बनी होती है। पदार्थों का भार होता है तथा ये स्थान घेरते है।
2. पदार्थ की तीन अवस्थाएं है - ठोस, द्रव्य व गैस
3. सोडावाटर बनाने में नमक व शक्कर, पानी व कार्बन डाई आक्साइड का उपयोग होता है।
4. निश्चित आकार और स्थान घेरने वाले पदार्थ ठोस पदार्थ है।
5. जिनके आर पार देखा जा सकता है पारदर्शी पदार्थ कहलाता है।
6. जिनके आर पार धुंधला रूप में देखा जा सकता है अल्प पारदर्शी पदार्थ कहलाता है।
7. ऐसे पदार्थ जो ऊष्मा को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने देता है ऊष्मा के सुचालक कहलाते है।
8. ऐसे पदार्थ जो विद्युत को अपने में से प्रवाहित होने देते है विद्युत का सुचालक कहलाती है।
9. चुंबक की ओर आकर्षित होने वाले पदार्थ चुंबकीय पदार्थ कहलाते है।
10. गैस के फैलने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है जिसे विसरण कहते है।
11. विद्युत सेल में दो ध्रुव (टर्मिनल) होते है। एक सिरे पर धन ध्रुव (टर्मिनल) तथा दूसरे सिरे पर ऋण ध्रुव (टर्मिनल) होता है।
12. जलवाष्प पदार्थ की गैसीय अवस्था कहलाती है।
13. रेत जल में अघुलनशील है जबकि नमक, नीला थोथा (कापर सल्फेट) व कपड़ा धोने का सोडा घुलनशील पदार्थ है।
14. सोना अचुंबकीय पदार्थ है जबकि निकल व कोबाल्ट चुंबकीय पदार्थ है।
15. इत्र की गंध विसरण की क्रिया के कारण दूर से महसूस किया जा सकता है।
16. शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है।
17. वायु ऊष्मा की कुचालक होती है।
18. बिजली का काम करते समय हमें पैरों में जूते व चप्पल पहनना चाहिए, मेन स्विच बंद करके काम करना चाहिए तथा हाथों में दस्ताना पहनना चाहिए।
19. गैस स्थान नहीं घेरते है। इनका आकार निश्चित नहीं होता तथा गैस का भार होता है।
20. मोमबत्ती तीनों अवस्था ठोस, द्रव्य व गैस में होती है। बुझे मोमबत्ती का सफेद धुआं मोम की वाष्प होती है। मोम के वाष्प के पास माचिस तीली ले जाते ही वह जल जाती है।


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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 8 वीं विषय विज्ञान अध्याय 1 आकाश दर्शन


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कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 8 वीं विज्ञान के अध्याय 1 आकाश दर्शन को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पु़स्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद







(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)


1. चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं यह सूर्य के प्रकाश से चमकती है।
2. प्रकाश की गति 3 लाख कि.मी. प्रति सेकण्ड है।
3. सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 8ण्3 प्रकाश मिनट का समय लगता है।
4. प्राचीन काल से ही धु्रव तारे का उपयोग दिशा जानने के लिए किया जाता रहा है।
5. सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा अल्फा सेंटारी है।
6. पृथ्वी से सूर्य की दूरी 15 करोड़ कि.मी. दूर है।
7. तारों की दूरिया प्रकाश वर्ष में मापी जाती है।
8. तारे स्वयं प्रकाश व उष्मा उत्सर्जित करते है।
9. पृथ्वी तथा अन्य ग्रह, सूर्य तथा चंद्रमा, उल्का पिण्ड आदि मिलकर आकाश गंगा की रचना करते है।
10. आकाश में कुछ क्षणों के लिए दिखाई देने वाली चमकीली रेखा जलते हुए उल्का पिण्ड होते है।
11. मृग या ओरायन कालपुरूष के नाम से जाना जाता है।
12. सात चमकदार तारों का समूह वृहद सप्तर्षि या बिग डिपर कहलाता है।
13. धूमकेतु 76 साल में एक बार दिखाई देता है पिछली बार इसे 1986 में देखा गया था।
14. उल्का के बिना जले हुए पिण्डों को उल्का पिण्ड कहते है।
15. हेली की पूछ हमेशा सूर्य से विपरित दिशा में ही होती है।
16. छोटे-छोटे पिण्ड क्षुद्र ग्रह व ग्रहिकाएं कहलाती है।
17. प्लूटो को वामन ग्रह का दर्जा दिया गया है यह ग्रहों की बिरादरी से बाहर है।
18. वरूण ग्रह सूर्य से आठवंे नंबर का ग्रह है इसके उपग्रह भी 8 है और यह अत्याधिक ठण्डा ग्रह है।
19. दूरबीन की सहायता से खोजा गया पहला ग्रह है अरूण।
20. शनि सूर्य से दूरी के क्रम में 6 वां है इसके तीन वलय है।
21. बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है इसके 28 ज्ञात उपग्रह है।
22. मंगल ग्रह लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है यहां जल व जीवन के कोई प्रमाण अब तक नहीं मिले है।
23. बुध व शुक्र ऐसे ग्रह है जिसके कोई भी उपग्रह नहीं है।
24. शुक्र ग्रह को भोर व सांध्य का तारा कहते है इसके घने बादलों से युक्त वायुमण्डल है।
25. बुध अत्याधिक गर्म ग्रह है इसमें वायुमण्डल नहीं है इसमें पर्वत व चट्टान से युक्त स्थल है।
26. उपग्रह ऐसे खगोलीय पिण्ड है जो दूसरे ग्रह की परिक्रमा करते है।
27. धु्रव तारा सदैव उत्तर दिशा में स्थिर प्रतीत होता है।
28. पृथ्वी अपने अक्ष के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
29. उत्तर से दक्षिण की ओर दिखने वाली तारों की धुंधली पट्टी आकाश गंगा है।
30. ब्रम्हाण्ड के भीतर लाखों आकाश गंगाए है जिनमें से एक आकाश गंगा हमारी भी है।

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