जांजगीर। सूर्यांश शिक्षा महा महोत्सव 2017 का 24 से 26 दिसंबर 2017 तक तीन दिवसीय आयोजन जिला मुख्यालय जांजगीर से लगे ग्राम सिवनी (नैला) में आयोजित है। मेला में विद्यार्थियों व शिक्षकों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण सरंक्षण के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने तथा सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम की तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। स्वयं के संसाधन से अपने सरकारी स्कूल को डिजिटल स्कूल में तब्दील कर सफलता पूर्वक संचालित करने वाले शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी के द्वारा यह प्रदर्शनी स्टाल लगाया है जिसमें अनुपयोगी सामानों से अत्यंत ही कम खर्चे में तैयार हस्तचलित और परस्पर क्रियाशील चलायमान विज्ञान माडलों को देखने जोरदार भीड़ उमड़ रही है, स्टाल में अत्यंत कम खर्चे में तैयार सरल सूक्ष्मदर्शी का माडल जिसमें प्याज की झिल्ली से कोशिकाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, खगोली घटनाओ को दिखाते हुए सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण व सौरमण्डल का जीवंत माडल, घरेलू वेस्ट मटेरियल से तथा कम क्षमता वाली मोटर व बैटरी से चलने वाली हवाई जहाज, बबल गन, जीवंत गोबर गैस माडल, सेंसर के माध्यम से आटोमेटिक पानी टंकी भर जाने पर अलार्म बजना, श्वसन प्रक्रिया, टेलीस्कोप, पेरिस्कोप, राकेट लांचर, कोसे का जीवन चक्र, ज्वालामुखी, दिशा सूचक यंत्र, पानी इंडिकेटर आदि क्रियाविधि के साथ स्टाल में दिखाया जा रहा है। स्टाल में उमड़ रहे विद्यार्थियों व शिक्षकों के भीड़ को माडलों का प्रदर्शन कराते हुए नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी बताया कि विज्ञान के छोटे-छोटे प्रयोग जो जादू जैसा लगता है वास्तव में यह केवल विज्ञान है जिसे हर शिक्षक को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है। प्रदर्शनी में कक्षा 6 वीं से 8 वीं स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए चार्ट एवं जीवंत माडलों के माध्यम से विज्ञान के प्रति ज्ञान का बोध कराया जा रहा है। स्टाल में डिजिटल क्लास रूम का जीवंत प्रदर्शन हो रहा है, तो वही वनों की कटाई से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव एवं पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी बताये जा रहे है और अनुपयोगी प्लास्टिक बाटलों से पर्यावरण संरक्षण का माडल प्रस्तुत करते हुए बताया जा रहा है कि इस नवाचार से उन्होंने अपने स्कूल शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा अमोदा वि.ख. नवागढ़ के खाली मैदान को विद्यार्थियों, स्टाफ व समुदाय के सहयोग से करीब दो साल के दरमियान हरे भरे पेड़ पौधों से भरे मैदान में तब्दील कर दिया जिसमें वर्तमान में 200 से भी अधिक पेड़ है जो तेजी से बढ़ रहे है और पूरा स्कूल परिसर आक्सीजन जोन बन गया है। स्टाल में उनके सहयोगी शिक्षक पंचायत सरकार सिंह लहरे है जो खेल-खेल में जादू की ट्रिक से बच्चों को विज्ञान की कलाए समझा रहे है, वे पहले जादू दिखा रहे है उसके पश्चात उसमें छुपी हुई ट्रिक छात्राओं को विज्ञान के माध्यम से समझा रहे है।
पहले नवाचार करते है, सफल होने पर करते है स्टाल में प्रदर्शन
राज्य स्तर पर नवाचारी रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्धि पा चुके, मास्टर ट्रेनर शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी विद्यालय में नित नये नवाचार करते रहते है, जब इसमें सफलता प्राप्त कर लेते है तब उसे शैक्षणिक स्टाल व सेमीनार आदि के माध्यम से प्रस्तुत करते है। जीरो बैलेंस से लेकर लाखों रूपये तक के बजट वाले नवाचार उन्होंने किया है और सफलता भी पायी है। डिजिटल क्लास रूम की स्थापना उनकी नयी सोच थी जिसमें उन्होंने अपने वेतन से लाखों रूपये खर्च किये और प्रत्येक माह मेन्टेनेंस के नाम पर खर्च करते आ रहे है। इसके अलावा जीरो बैलेंस का नवाचार भी किया जिसमें अनुपयोगी प्लास्टिक बाटलों को एकत्र कर ड्रीप इरीगेशन का माडल तैयार किया और 200 पानी की किल्लत से जूझ रहे स्कूल परिसर में 200 से भी अधिक पौधों को सफलता पूर्वक बड़ा कर दिखाया है। इसके पूर्व भी अनेक सार्वजनिक व सामाजिक आयोजनों में उनके द्वारा इस तरह के स्टाल लगाकर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदर्शन किया जा चुका है, खास बात यह है कि ऐसे सारे गतिविधियों में आने वाली खर्चों को वे स्वयं वहन करते है।
राज्य स्तर पर नवाचारी रचनात्मक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्धि पा चुके, मास्टर ट्रेनर शिक्षक पंचायत राजेश कुमार सूर्यवंशी विद्यालय में नित नये नवाचार करते रहते है, जब इसमें सफलता प्राप्त कर लेते है तब उसे शैक्षणिक स्टाल व सेमीनार आदि के माध्यम से प्रस्तुत करते है। जीरो बैलेंस से लेकर लाखों रूपये तक के बजट वाले नवाचार उन्होंने किया है और सफलता भी पायी है। डिजिटल क्लास रूम की स्थापना उनकी नयी सोच थी जिसमें उन्होंने अपने वेतन से लाखों रूपये खर्च किये और प्रत्येक माह मेन्टेनेंस के नाम पर खर्च करते आ रहे है। इसके अलावा जीरो बैलेंस का नवाचार भी किया जिसमें अनुपयोगी प्लास्टिक बाटलों को एकत्र कर ड्रीप इरीगेशन का माडल तैयार किया और 200 पानी की किल्लत से जूझ रहे स्कूल परिसर में 200 से भी अधिक पौधों को सफलता पूर्वक बड़ा कर दिखाया है। इसके पूर्व भी अनेक सार्वजनिक व सामाजिक आयोजनों में उनके द्वारा इस तरह के स्टाल लगाकर शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रदर्शन किया जा चुका है, खास बात यह है कि ऐसे सारे गतिविधियों में आने वाली खर्चों को वे स्वयं वहन करते है।



सरकारी विद्यालय के लिए आपका प्रयास काफी आगे जा चुका है आपके द्वारा लगाये जाने वाले शैक्षणिक स्टाल से न केवल आयोजन की गरिमा बढ़ती है बल्कि समाज को भी एक बेहतर संदेश जाता है आपके प्रयासों को नमन करता हूं..
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