The Digital Teacher

अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन की बेहतर पहल, पी.एल.सी. के साथ सीखने सिखाने की पहल की अब होगी शुरूआत ...

















19 से 22 जून 2018 तक जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ और नवागढ़ ब्लाक के सभी संकुल केन्द्रों से मिडिल के पांचों विषयों व प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण विषय के साथ उन्मुखीकरण कार्यशाला संपन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य सभी संकुलों से विषयवार एक-एक ऐसे शिक्षक तैयार करना जो संबंधित विषय पर अपनी बेहतर समझ के साथ अपने संकुल के विषयवार शिक्षकों के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बनाते हुए सीखने सिखाने की परंपरा को नयी उर्जा दे सके। इसी उद्देश्य को लेकर अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के जांजगीर व शिवरीनारायण इकाई ने उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। नवागढ़ के शासकीय महाविद्यालय के छह कक्षों में विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, गणित व प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण विषय को लेकर नवागढ़ विकासखण्ड के 18 संकुल केन्द्रों अमोदा, अवरीद, धनेली, धुरकोट, गौशाला नैला, गोधना, कटौद, किरीत, केरा, खोखरा, मिसदा, नवागढ़, सदर जांजगीर, सलखन, सेमरा, शिवरीनारायण, सिउड़ व सिवनी तथा पामगढ़ ब्लाक के सभी 14 संकुल केन्द्रों तनौद, खपरी, भदरा, भैसों, भिलौनी, कोसा, खरौद, मुलमुला, कोसला, लोहर्सी, पामगढ़, राहौद, रसौटा व ससहा से शिक्षकों ने हिस्सा लिया। विज्ञान कार्यशाला में हमने प्रथम दिवस 19 जून को कोशिका को लेकर लर्निंग आउटकम तैयार किये और सूक्ष्मदर्शी से कोशिका का अवलोकन से लेकर उसके महत्व पर बातचीत की, द्वितीय दिवस पदार्थों के वर्गीकरण व पृथ्थककरण पर गतिविधि के साथ काम किये तो वही तीसरे दिवस व चतुर्थ दिवस के मध्यान्ह तक को प्रकाश की अवधारणा पर काम किये, इस दौरान पिन होल कैमरा का निर्माण कर उसका अवलोकन किया गया। उन्मुखीकरण कार्यशाला के अंतिम दिवस आज 22 जून को जिला परियोजना अधिकारी श्री संतोष कश्यप, सहायक श्री जायसवाल जी सहित डाइट के वरिष्ठ व्याख्याता श्री प्रद्युम्न शर्मा व श्री गोपेश कुमार साहू ने पहुंचकर सभी का न केवल उत्साहवर्धन किया बल्कि अपने विचारों से भी हम सबको अवगत कराया। कक्षा में परंपरागत अध्ययन अध्यापन के साथ-साथ अब हमें, ऐसा कुछ करने की जरूरत है जिससे कि हमें एक बड़ा मंच मिले और हम विषयवार शिक्षक साथी आपस में अपने अनुभवों को साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें। ताकि एक सीखने वाले समुदाय के रूप में हम शिक्षकों’ की पहचान बने और हमारी शिक्षा संस्कृति का विकास हो सके। इसी क्रम में शिक्षा के प्राथमिक व माध्यमिक दोनों स्तरों पर शिक्षक और शिक्षकों की क्षमता में बढ़ोत्तरी के लिए अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है अब इस गंभीरता को बनाये रखना हम सबकी बड़ी जिम्मेदारी है यदि हम इस पर कामयाब होते है तो जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में हम सभी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बहरहाल इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए हम सभी शिक्षकों के बीच आपसी संवाद को रचनात्मक दिशा देने और मिलकर अकादमिक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रयासरत रहना होगा और इसके लिए टीएलसी की साप्ताहिक बैठकों में हमें अपनी बेहतर उपस्थिति दर्ज करानी होगी। पामगढ़ व नवागढ़ विकासखण्ड के संदर्भ में प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का आइडिया कितना प्रभावशाली होता है यह भविष्य के गर्भ में है किंतु इतना तो तय है कि इससे हम अपनी खुद की दक्षता को इतना बढ़ा सकते है कि हजारों की भीड़ में अपनी अकादमिक क्षमता का प्रदर्शन कर अपनी खुद की पहचान को संकुल, ब्लाक, जिला और राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर सकते है, फिलहाल मैं यही कर रहा हूं, एक शिक्षक के रूप में कुछ बेहतर करने की मेरी जिद ने मुझे सदैव ही सीखते रहने के लिए प्रेरित किया है। अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन से मुझे लगातार अकादमिक समर्थन मिल रहा है जिसके लिए मैं सदैव इनके प्रति नतमस्तक रहूंगा। विज्ञान विषय पर मुझे बतौर मास्टर टेªनर्स सहभागिता करने का अवसर मिला मैंने अपने साथी मास्टर टेªनर्स श्री पीतांबर लहरे जी के साथ अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन जांजगीर इकाई के मुखिया श्री सुभाष जी के मार्गदर्शन में पूरे चार दिनों तक जीव विज्ञान के शरीर की रचनात्मक व कार्यात्मक इकाई कोशिका, रसायन विज्ञान के पदार्थों का वर्गीकरण व पृथ्थककरण तथा भौतिक विज्ञान के प्रकाश पर खूब सारी गतिविधियों, चर्चाओं के माध्यम से सीखने सिखाने की प्रक्रिया को गति प्रदान किये। पूरे कार्यशाला में अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के कुमारी अर्चना, कुमारी मारिया, श्री नवनीत वर्मा जी, श्री विवेक जी, श्री नीरज राणा जी, श्री मनोज जी, श्री अरिजीत जी सहित शिक्षक साथियों श्री संतोष सर्वे पूर्व मा.शाला कामता सलखन, श्री महेश्वर पुरी गोस्वामी पूर्व मा.शाला बनारी गौशाला नैला, श्री सुरित महर्षि पूर्व मा.शाला बोरदा गोधना, श्रीमती अनिता धु्रर्वे पूर्व मा.शाला धाराशिव खोखरा, अराधना लकड़ा पूर्व मा.शाला पामगढ़, श्री रामनाथ कैवर्त पूर्व मा.शाला सेमरिया कोसा, श्री सोमक्ष टण्डन पूर्व मा.शाला लोहर्सी, श्री रूपलाल खूंटे पूर्व मा.शाला खपरी, श्री डार्विन जोगी पूर्व मा.शाला भैसों, श्री अशोक यादव पूर्व मा.शाला रसौटा, श्री देवेन्द्र साहू पूर्व मा.शाला कुटरा धनेली, श्री दलेश्वर प्रसाद मांझी पूर्व मा.शाला सिंघुल शि.ना., श्रीमती मनीषा साहू पूर्व मा.शाला नगारीडीह केरा, श्रीमती ज्योति शुक्ला पूर्व मा.शाला तुलसी मिसदा, श्री सरकार सिंह लहरे पूर्व मा.शाला हीरागढ़ सिउड़, श्री महेन्द्र कुमार साहू पूर्व मा.शाला ढाबाडीह भिलौनी, श्रीमती सुनीता यादव पूर्व मा.शाला खरौद, श्री गनेश्वर लाल साहू पूर्व मा.शाला धरदेई, श्री उमाशंकर सूर्यवंशी पूर्व मा.शाला अमोदा, श्री राजू पालिया पूर्व मा.शाला शुक्लाभाठा, श्रीमती धरमिन गढ़वाल पूर्व मा.शाला सुकली धुरकोट, श्री पवन कुमार साहू पूर्व मा.शाला तुस्मा कटौद व श्री सतीश कुमार पटेल पूर्व मा.शाला चैराभाठा अवरीद से इस चार दिवसीय कार्यशाला में मुझे जुड़ने और सीखने का जो सौभाग्य वह मेरे लिए सदैव अविस्मरणीय रहेगा, आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए अपनी बात समाप्त कर रहा हूं...
(मेर इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट के बारे में अपनी राय साझा करिए। अपने नाम के साथ अपनी टिप्पणी कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। शिक्षा से जुड़े कोई सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो मुझे जरूर साझा करें। मैं उसे अपने ब्लाग पर लेने का प्रयास करूंगा ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।) 


शिक्षकों में सीखने सिखाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन


अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के विद्वान अकादमिक सदस्यों के साथ जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ और पामगढ़ ब्लाक के सरकारी प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं का विषय आधारित आवासीय प्रशिक्षण 14 मई से आरंभ होकर 26 मई तक संपन्न हुआ। पहले चरण में 14 से 18 मई तक जबकि द्वितीय व अंतिम चरण में 22 से 26 मई तक बिलासपुर कोनी स्थित आधारशिला विद्या मंदिर के प्राकृतिक वातावरण के अलग-अलग समूहों में पर्यावरण, गणित, भाषा व विज्ञान विषयों पर सीखने सिखाने का बेहतर अवसर प्राप्त हुआ।  कार्यशाला की शुरूआत विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी नवागढ़ श्री जे.के. बावड़े व सहा. वि.ख. शिक्षा अधिकारी श्री आर.एन.शर्मा के उद्बोधन से हुआ जहां श्री बावड़े ने भारत के बिल गेट्स कहे जाने वाले अजीम हाशिम प्रेमजी के जीवनी व उनके समाज पर योगदान पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने अपील किया कि सीखे हुए ज्ञान को बच्चों तक जरूर पहुंचाये तभी हमारा सीखना सार्थक होगा। विज्ञान पढ़ाना तभी सार्थक होगा जब हम बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास कर सके, हम विज्ञान की कक्षा में कल्पना नहीं बल्कि परिकल्पना, प्रयोग, अवलोकन, विश्लेषण और निष्कर्ष जैसे कौशलों का प्रयोग करें और बच्चों को इन कौशलों में दक्ष करें। आज विज्ञान की कक्षा में रचनात्मकता लाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की महती आवश्यकता है। अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के 5 दिवसीय विषय आधारित कार्यशाला के विज्ञान विषय की पहले दिन की शुरूआत फाउण्डेशन के वरिष्ठ और अनुभवी श्री सुभाष जी के इस प्रेरणादायी चर्चा के साथ शुरूआत हुई। द्वितीय दिवस 23 मई को विज्ञान समूह के हमारे शिक्षक साथियों सहित फाउण्डेशन के अनुभवी सदस्यों के साथ हमने पौधों के वर्गीकरण पर काम किया, समूह कार्य, गतिविधि और प्रदर्शन से एक बीजपत्री, द्विबीजपत्री पौधों पर गहरी समझ बनी। विज्ञान की छोटी छोटी गतिविधियों को बच्चों के साथ करते रहने से उनमें जिज्ञासा बढ़ती है वे स्वयं सवाल बनाते है और करते है, हमें उन्हे उनके परिकल्पना को जांचने अवलोकन करने निष्कर्ष निकालने और उससे किसी सिद्धांत तक पहुंचने के कौशलों का विकास करने में सहभागी बनना पड़ेगा। तीसरे दिवस 24 मई को हम सभी ने मिलकर ग्राफ बनाने, अवलोकनों का प्रेक्षण लेने तथा गणितीय गणना करने के कौशलों पर विज्ञान समूह के शिक्षकों ने काम किया, पैराशूट बनाया और उंचाई से उसे गिराकर परिकल्पना से निष्कर्ष तक पहुंचे और सिद्धांतों की जांच हुई। एक शिक्षक के नाते हमारी सबसे पहली जवाबदेही अपने स्कूली बच्चों के प्रति है न कि सहकर्मी और अफसरों के, हमारा अस्तित्व इसीलिए है कि हमारे विद्यालय में बच्चे है यदि ये नहीं तो हमारी क्या उपयोगिता होगी? इस तरह की समझ के साथ चतुर्थ दिवस 25 मई के प्रथम सत्र में जहां हम सबने एडवर्ड जेनर द्वारा टीका की खोज संबंधी गतिविधियों पर चित्र चार्ट की गतिविधियां करके यह समझने का प्रयास किया कि किसी खोज के लिए वैज्ञानिक किन प्रक्रियाआंे से होकर गुजरते है और समाज विज्ञान को किस तरह से प्रभावित करता है तो वही द्वितीय सत्र में रसायनिक अभिक्रियाओं को समझने उदासीनीकरण अभिक्रिया पर अम्ल, क्षार व लवण के साथ काम करके अपनी समझ बनाया। अंतिम 5 वें दिवस 26 मई को हम सबने प्रकाश संश्लेषण, कोशिका, श्वसन जैसे बिंदूओं पर व्यापक चर्चा परिचर्चा, विडियो प्रदर्शन के माध्यम से अपनी समझ बनायी। कार्यशाला के अंतिम दिवस 26 मई को शिक्षक साथियों से रूबरू होने और अनुभव बांटने पर बात हुई, इस दौरान मैंने कई महत्वपूर्ण बिंदूआंे पर अपनी बात रखी किंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सीखने सिखाने की इस प्रक्रिया को सतत रूप से जारी रखने हम सभी शिक्षक फाउण्डेशन के जांजगीर स्थित शिक्षक अधिगम केन्द्र (टीचर लर्निंग सेंटर-टी.एल.सी.) से जुड़े और अपनी बेहतरी के लिए कार्य करें। श्री सुभाष गोस्वामी जी, श्री रवि सिंह, श्री विवेक सिंह, श्री नीरज राणा, श्री नवनीत वर्मा, श्री अजय कुमार विश्वकर्मा, कुमारी सारिका, कुमारी मारिया, कुमारी अर्चना, राजेश जी, कपिलदेव जी रायगढ़ सहित अजीम पे्रमजी फाउण्डेशन के तमाम अकादमिक सदस्यों के कुशल मार्गदर्शन में विज्ञान विषय के इस आवासीय प्रशिक्षण में मुझे 15 शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ प्रभावी ढंग से सीखने सिखाने में बड़ा सहयोग मिला जिनमें श्री आर.के. द्विवेदी संकुल प्रभारी धुरकोट, श्री के.के. सिंह पूर्व मा.शाला भैसदा अमोदा, श्री गिरधर निराला संकुल प्रभारी नवागढ़, श्रीमती गीता लहरे पूर्व मा.शाला पीथमपुर अमोदा, श्रीमती अनिता धु्रवे पूर्व मा.शाला धाराशिव खोखरा, श्रीमती मीनाक्षी चतुर्वेदी पूर्व मा.शाला बोड़सरा सिवनी, श्री अनिल टण्डन पूर्व मा.शाला उदयभाठा नवागढ़, श्री संजय सिंह राठौर पूर्व मा.शाला अमोरा अवरीद, श्री सुनील कुमार श्रीवास पूर्व मा.शाला बरगांव किरीत, श्री संजय कुमार वर्मा पामगढ़, श्री नरोत्तम लाल कुर्रे पूर्व मा.शाला जगमहंत अवरीद, श्री डेमन पाण्डेय पूर्व मा.शाला मौहाडीह अमोदा, श्री महेश्वर पुरी गोस्वामी पूर्व मा.शाला बनारी गौशाला नैला, श्री हेतराम कुर्रे पूर्व मा.शाला खरखोद पामगढ़ श्री दिलीप यादव पूर्व मा.शाला कन्या नवागढ़ शामिल रहे। कार्यशाला के दौरान डाइट जांजगीर की प्राचार्य श्रीमती सविता राजपूत व सहा.प्राध्यापक श्री यू.के. रस्तोगी जी भी पहुंचे और शिक्षकों से रूबरू हुए, उन्होंने जल्द ही इसी तर्ज पर डाइट में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण आयोजित करने की बात कही और सभी से आग्रह किया कि इस सीखने सिखाने की प्रक्रिया को कक्षा तक ले जाये और बच्चों को इसका लाभ दे। इस पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में शिक्षकों को न केवल शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा गया अपितु सांस्कृतिक गतिविधियों की श्रृंखला से भी जोड़ते हुए उनकी छुपी हुई सांस्कृतिक प्रतिभा को उभारने उन्हे मंच प्रदान किया गया और कानन पेण्डारी जैसे वन्य जीव अभ्यारण का अवलोकन भ्रमण करने का अवसर भी दिया गया, कुल मिलाकर पूरा आयोजन सीखने सिखाने के लिए एक बेहतर और समृद्ध माहौल बना, यह माहौल आगे भी जारी रहे बना रहे इसके लिए हम सबको इस संस्थान की गतिविधियों से जुड़े रहने की जरूरत होगी ...
(मेर इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट के बारे में अपनी राय साझा करिए। अपने नाम के साथ अपनी टिप्पणी कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। शिक्षा से जुड़े कोई सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो मुझे जरूर साझा करें। मैं उसे अपने ब्लाग पर लेने का प्रयास करूंगा ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।)          

शास. उ.मा.शाला अमोदा में बोर्ड का परीक्षा परिणाम रहा शत प्रतिशत


जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखण्ड के संकुल केन्द्र अमोदा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला अमोदा का छ.ग. बोर्ड परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा। विद्यालय में कक्षा 12 वीं में कुल 38 विद्यार्थी थे जिसमें 14 प्रथम श्रेणी में, 19 द्वितीय श्रेणी व 2 तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। कक्षा 10 वीं में कुल 64 विद्यार्थी थे जिसमें 22 प्रथम श्रेणी, 27 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण रहे।
बोर्ड परीक्षा परिणाम के संबंध में प्राचार्य गोविन्द प्रसाद चैरसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि शाला प्रबंधन समिति व स्टाफ की कड़ी मेहनत व एससीईआरटी के प्रोफेसर सतीश पाण्डेय सहित जिले के विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन से कक्षा 12 वीं का परीक्षा परिणाम 92.1 प्रतिशत तथा 10 वीं का 76.6 प्रतिशत रहा। 12 वीं बोर्ड गणित समूह में कांतेश कुमार नामदेव पिता दिलीप कुमार ने 92 प्रतिशत अंकों के साथ शाला में प्रथम स्थान बनाया, कुमारी ज्योति यादव पिता भरत लाल ने 88.6 प्रतिशत अंकों के साथ द्वितीय स्थान, खितेश कुमार चैहान पिता दिलीप कुमार ने 86.2 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान तथा कुमारी तिलोत्मा नामदेव पिता दिलीप कुमार ने 81.6 प्रतिशत अंकों के साथ चतुर्थ स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह से कक्षा दसवीं बोर्ड में कुमारी निहारिका चंद्राकर पिता नोहर लाल ने 85.1 प्रतिशत अंकों के साथ शाला में प्रथम स्थान पर रही, कुमारी संध्या यादव पिता मनोज यादव ने 81.5 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय तथा कुमारी अंजली देवांगन पिता नारायण प्रसाद ने 81 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया है। विद्यालय की इस उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम पर डीईओ जी.पी.भास्कर, बीईओ जितेन्द्र कुमार बावड़े, बीआरसीसी श्रीमती रिषीकांता राठौर, एबीईओ संजय देवांगन, आरएन शर्मा, अभिलाषा अग्रवाल, शाला के प्राचार्य गोविन्द प्रसाद चैरसिया, शैक्षिक समन्वयक अनिल पाण्डेय, सतीशचंद्र शुक्ला, श्रीमती दुर्गा भगत, आरती तिग्गा, श्रीमती अंजना खाखा, यू.एल. तारण, एस.एल.जोशी, विजय ताण्डे आरएमएसए प्रभारी, चंक्रपाल तिवारी, गोवर्धन राठौर, नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्रीमती रेखा देवी कमलेश, सदस्यगण पंचराम कमलेश, सीताराम देवांगन, महावीर करकल, कुशल देवांगन, श्रीमती निशा यादव उपसरपंच, सीताराम यादव सहित विद्यालयीन स्टाफ रमेश लदेर, मनमोहन साहू, सतीश साहू, अशोक देवांगन, सी.एस.राठौर, श्रीमती चांदनी सिंह, कौतुकमणि सिंह, राजेन्द्र सिंह राजपूत, रंजीत कश्यप, सैयन एक्का, शांतनु सूर्यवंशी, श्याम लाल यादव, पीएल राठौर, बृजेश करियारे, मंशाराम कौशिक, शंकर लाल बरेठ सहित समुदाय के लोगों ने बच्चों के उज्जवल्य भविष्य की कामना करते हुए बधाई प्रेषित की है। विदित हो कि बीते शिक्षा सत्र 2016-17 में विद्यालय का हाई स्कूल परीक्षा परिणाम 89.1 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी का 84 प्रतिशत रहा जो कि जिले में प्रथम स्थान पर रहा और एससीईआरटी व माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर में प्राचार्य गोविन्द्र प्रसाद चैरसिया को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है।


मैं विचारों का स्वागत करता हूं, मैं हर चीज के लिए खुला हूं....




‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’ का नारा सुनकर बड़ा सकून महसूस होता है लेकिन मुझे लगता है कि हम केवल इस नारा को लेकर ही बढ़ते चले जा रहे है। परीक्षा नीति को लचीला और किसी को फैल न करने की परंपरा का सबसे कमजोर पक्ष यही है कि आज हम परीक्षाओं का दबाव बच्चों पर नहीं डाल रहे है लेकिन ऐसी पढ़ाई का नतीजा क्या निकल रहा है? हमें एक लक्ष्य बनाकर चलना होगा कि अमुक कक्षा की पढ़ाई के बाद बच्चे को इतना आना चाहिए, या फला कक्षा के बाद विद्यार्थी को इतना आना ही चाहिए क्योंकि वर्तमान में स्थिति विकट है जब हम पाते है कि पांचवी कक्षा का एक छात्र गिनती नहीं कर पाता, वह दूसरी कक्षा की किताब नहीं पढ़ पाता। क्या यही परिणाम हमने सोचा था? मित्रों एक शिक्षक होने के नाते हमारी पूरी बिरादरी की यह महती जिम्मेदारी है कि शिक्षा सबकी पहुंच में हो, उसकी गुणवत्ता बेहतर हो, सबको समान रूप से हासिल हो, खर्च के दायरे में हो और हर चीज के लिए जवाबदेही तय हो। हम सबको मिलकर छात्रों की जिज्ञासा को बढ़ावा देना होगा, ऐसा नहीं है कि यह सब नहीं हो रहा है लेकिन इसे बड़े स्तर पर करने की जरूरत है। आज शिक्षा देना सिर्फ शिक्षकों के हाथ में ही नहीं है। हमें शिक्षा को मनोरंजक और इंटेरैक्टिव बनाना होगा। मैं शिक्षा में तरह-तरह के प्रयोगों का पक्षधर हूं बशर्तें उसके सकारात्मक और गुणात्मक परिणाम परिलक्षित हो। जब कोई बालक सवाल पूछता है तो यह उसके सीखने की शुरूआत होती है। अगर हम छात्र की इस जिज्ञासा को बढ़ाने में कामयाब होते है तो वह आगे चलकर कुछ नया और बड़ा जरूर करेगा। कुल मिलाकर शिक्षा का यही मतलब है। आखिर शिक्षा का अंतिम लक्ष्य ही होता है देश व समाज के लिए एक अच्छा इंसान तैयार करना। इन सबके लिए शिक्षकों के विचार आने चाहे, वो सकारात्मक हो यह जरूरी नहीं क्योंकि मैं तो मैं हर तरह के विचारों का स्वागत करता हूं, मैं हर चीज के लिए खुला हुआ हूं...
(मेर इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट के बारे में अपनी राय साझा करिए। अपने नाम के साथ अपनी टिप्पणी कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। शिक्षा से जुड़े कोई सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो मुझे जरूर साझा करें। मैं उसे अपने ब्लाग पर लेने का प्रयास करूंगा ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।)           




सतत रूप से सीखने सिखाने की प्रक्रिया है शिक्षक प्रशिक्षण



आज का दिन अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के संग...

जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव 2018 में शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी में उमड़ रही भीड़






डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...