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राज्य स्तरीय ईको बाल मेला व सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब प्रतियोगिता में जांजगीर-चांपा जिले का उत्कृष्ट प्रदर्शन, पर्यावरण मंत्री ने मा. मोहम्मद अकबर ने किया पुरस्कृत...














छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल आवास व पर्यावरण विभाग छ.ग.शासन द्वारा राज्य स्तरीय ईको बाल मेला व सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब प्रतियोगिता का आयोजन 11 से 12 अक्टूर 2022 तक राजधानी रायपुर स्थित अग्रसेन धाम व्ही.आई.पी. रोड रायपुर में किया गया। आयोजन में जांजगीर-चांपा जिले के ईको क्लब जिला समन्वयक श्री गोपेश कुमार साहू व्याख्याता डाइट जांजगीर के नेतृत्व में सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब के रूप में शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) के कक्षा 8 वीं के विद्यार्थी रजनी यादव, मनीष कुमार यादव, सुमित कुमार साहू ने अपने नोडल शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन, पं.रामसरकार पाण्डेय शासकीय उ.मा.शाला कुटरा के विद्यार्थी अभिषेक कुमार कश्यप (कक्षा 12 वीं), कुमारी आकांक्षा शर्मा (कक्षा 10 वीं), तथा कुमारी मनोरमा सूर्यवंशी (कक्षा 10 वीं) ने अपने नोडल व्याख्याता श्री अनुराग तिवारी के मार्गदर्शन में तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पामगढ़ से विद्यार्थी यशस्वी यादव (कक्षा 8 वीं), यज्ञ विश्वकर्मा (कक्षा 9 वीं) तथा प्रवीण यादव (कक्षा 11 वीं) ने अपने नोडल शिक्षिका अंकिता ठाकुर के मार्गदर्शन में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में निबंध, चित्रकला, भाषण सहित सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब के स्टाल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें सभी विधाओं में बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। स्टाल प्रदर्शनी में डिजिटल विद्यालय के ईको क्लब की साल भर की गतिविधियों को फोटो, विडियो, प्रोफाईल, वर्किंग साईंस माडल आदि आकर्षण का केन्द्र रहा। मिडिल स्तर से निबंध प्रतियोगिता में डिजिटल स्कूल नवापारा (अमोदा) के विद्यार्थी सुमित कुमार साहू को राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ वही स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पामगढ़ की विद्यार्थी कुमारी यशस्वी यादव को भाषण में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इन्हे पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि माननीय मोहम्मद अकबर आवास व पर्यावरण मंत्री तथा श्री आर.पी.तिवारी सदस्य सचिव छ.ग.पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा प्रमाण पत्र व मोमेन्टो से सम्मानित किया गया।
नेशनल ग्रीन कोर कार्यक्रम के तहत आयोेजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के पहले दिन 11 अक्टूबर मंगलवार को उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव छ.ग.शासन श्री सुब्रत साहू रहे, उन्होंने प्रदर्शनी में शास.पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) नवागढ़ के वाटर हार्वेस्टिंग का चलित माडल का अवलोकन कर बालिका का हौसला आफजाई किया। विद्यालय की बालिका कुमारी रजनी यादव ने अपर मुख्य सचिव छ.ग.शासन श्री साहू को माडल का डेमो दिखाते हुए बताया कि वर्षा जल का संचयन कर पानी का विभिन्न कार्यों में उपयोग करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग का चलित माडल अत्यंत उपयोगी है। वही सिंगल यूज प्लास्टिक के टापिक पर स्कूल की बालिका ने मंच से अपना भाषण प्रस्तुत किया। वही बालक सुमित कुमार साहू ने सिंगल यूज प्लास्टिक के थीम पर निबंध प्रतियोगिता में तथा मनीष कुमार यादव ने चित्रकला प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अपने प्रदर्शनी के दौरान स्कूल के विद्यार्थियों ने बताया कि 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक जिसमें ईयर बड्स एवं स्ट्रा, गुब्बारे के लिए प्लास्टिक की डंडिया, स्टिक, कैंडी, आइस्क्रीम की डंडिया, प्लास्टिक के कप, प्लेट, गिलास, काटे चम्मच, चाकू, मिठाई डिब्बे, निमंत्रण कार्ड, पैकेजिंग सामग्री, 100 माईक्रान से कम मोटाई के प्लास्टिक, थर्मोकोल सजावटी सामान आदि है अब हमें इनके उपयोग की आदतों को समाप्त करने की जरूरत है ताकि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रख सके। प्रतियोगिता के दूसरे दिवस 12 अक्टूबर बुधवार को सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब चयन प्रतियोगिता में विद्यालय की बालिका ने मंच से स्कूल के ईको क्लब के गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान उन्होंने राज्य भर से पहुंचे आंगतुकों, अतिथियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि पालीथीन की जगह कपड़े या कागज के थैलियों का उपयोग करें, अधिकाधिक वृक्ष लगाये व पृथ्वी को हरा भरा रखे, घर से निकले कचरे से वर्मी कंपोस्ट तैयार करें तथा जैविक कृषि को बढ़ावा दे, उच्च ध्वनि वाले पटाखों का प्रयोग न करें, बिजली का सदुपयोग करें तथा सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए ऊर्जा संरक्षण कर पृथ्वी को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें। विद्यालय के इस उपलब्धि पर जिले के विभागीय अधिकारियों, पालकों, शाला प्रबंधन समिति सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं व विद्यार्थियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्जवल्य भविष्य की कामना की है। 

                              






















































इको क्लब सदस्यों ने चलाया पेयजल स्त्रोत व शौचालय स्थलों पर सफाई अभियान ...


पृथ्वी जल वायु इको क्लब शास. पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) में आज 8 सितंबर शनिवार बैगलेस डे पर स्कूल परिसर स्थित शौचालयों व पेयजल स्त्रोत स्थल पर व्यापक सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता जागरूकता का संदेश दिया गया।  
इको क्लब के प्रभारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि स्वच्छता अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल में सभी विद्यार्थियों के लिए जल, शौचालय, सफाई और स्वच्छता सुविधाओं की एक क्रियाशील व्यवस्था हो ताकि विद्यार्थियों में उपयुक्त स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी व्यवहार विकसित व प्रोत्साहित करने के हमें मदद मिल सके। स्कूल परिसर के भीतर बच्चों और शिक्षकों सहित आगंतुकों के लिए पीने का जल, हाथ धोने की व्यवस्था, शौचालय और साबुन की सुविधाओं का होना नितांत आवश्यक है। इसके साथ ही स्कूल व गांव में जल, सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करने का मकसद यह है कि बच्चों, उनके परिवारों और समुदायों में स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवहार में सुधार लाया जा सके ताकि सभी स्वच्छता संबंधी व्यवहारों से प्रोत्साहित हो सके। इसके लिए हम विद्यालय प्रबंधन समिति को जिम्मेवार एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहे है। इस गतिविधि से बच्चों के मन में विद्यालय एवं समुदाय के प्रति गौरव एवं स्वामित्व का भाव पैदा होता है और स्वच्छता संबंधी व्यवहार को अपनाकर बच्चों में स्वस्थ मनमस्तिष्क का निर्माण होता है जिससे सिखने सीखाने की प्रक्रिया, अधिगम कौशल एवं सहभागिता, विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति में बढ़ोत्तरी होती है। इस अवसर पर प्रधान पाठक श्री भानूप्रताप महाराणा, श्री कन्हैयालाल मरावी, श्री हेमंत यादव सहित इको क्लब के सदस्य आशा साहू, सिमरन यादव, पूजा कंवर, श्रुति चौहान, छाया यादव, खुश्बू बरेठ, मंजू साहू, गीतांजली यादव, संजना यादव, रजनी यादव, सुमित कुमार साहू, अनिल कुमार यादव, मनीष कुमार यादव, महारथी साहू, प्रशांत कश्यप, दीपक कश्यप, शिवा केंवट, कुश कुमार यादव, गौरव यादव, हिमेश देवांगन आदि उपस्थित रहे।
 



                  

इको क्लब की मासिक बैठक में स्वच्छ जल व शौचालयों के रखरखाव पर हुई चर्चा...

इको क्लब पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) की मासिक बैठक 1 अक्टूबर शनिवार 2022 को आहूत की गयी जिसमें विगत माह में क्लब के गतिविधियों की समीक्षा की गयी साथ ही आगामी माह में होने वाली क्लब की गतिविधियों की योजना तैयार की गयी। इस दौरान विद्यालय में सभी विद्यार्थियों हेतु स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता व शौचालयों के नियमित रख रखाव सफाई पर चर्चा की गयी। विगत माह में विश्व ओजोन दिवस, विश्व हिंदी दिवस, पोषण मास अभियान, विश्व रैबीज दिवस, अंतरराष्टीय वृद्धजन दिवस व गांधी जयंती जैसे आयोजनों को समारोह पूर्वक मनाया गया। वही अक्टूबर 2022 में आने वाले विविध आयोजनों को मनाये जाने की योजना बनायी गयी। उक्त सभी आयोजनों के दौरान पौधारोपण कर उसे वृक्ष बनाने का संकल्प पारित किया गया है। क्लब के संबंध में जानकारी देते हुए प्रभारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि छात्र-छात्राओं में जीवन कौशल विकास, आत्मसम्मान बढ़ाने, जल व पर्यावरण संरक्षण सहित विविध शैक्षणिक नवाचारी गतिविधियों में सहभागिता निभाने के उद्देश्य से शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष  श्री चंदराम साहू, शाला आपदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रीमती सावित्री बाई चौहान, प्रधान पाठक श्री भानूप्रताप महाराणा के मार्गदर्शन में इको क्लब का गठन किया गया है। इस क्लब का नाम पृथ्वी-जल-वायु इको क्लब रखा गया है। क्लब के माध्यम से विद्यार्थी रचनात्मक गतिविधि से जुड़ रहे है साथ ही विद्यार्थीगण अपने अभिभावक, पड़ोस एवं समुदाय को पर्यावरण व जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही पर्यावरण गतिविधियों में संलग्न कर रहे है। विभिन्न तरह के प्रोजेक्ट बनाने से लेकर स्वच्छता कार्यक्रम चलाने, बच्चों के नाखून, बाल आदि की प्रार्थना सभा में जांच करने, खेल व शारीरिक गतिविधियों का आयोजन करने, योग, ड्रामा, वाद-विवाद, सांस्कृतिक गतिविधियां, भाषण, निबंध लेखन, पत्र लेखन, चित्रकला, साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन इको क्लब के देखरेख में संपन्न हो रहा है। वर्षभर महापुरूषों की जयंती समारोह, दिवस विशेष कार्यक्रम, विश्व स्तर के दिवस जैसे आयोजनों को समारोह पूर्वक मनाया जाता है तथा प्रत्येक आयोजन को यादगार बनाने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इको क्लब के के प्रभारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी है। गठित क्लब में सदस्यों की संख्या 20 है जिसमें 10 छात्र सुमित कुमार साहू, अनिल कुमार यादव, मनीष कुमार यादव, महारथी साहू, प्रशांत कश्यप, दीपक कश्यप, शिवा केंवट, कुश कुमार यादव, गौरव यादव, हिमेश देवांगन तथा 10 छात्राएं आशा साहू, सिमरन यादव, पूजा कंवर, श्रुति चौहान, छाया यादव, खुश्बू बरेठ, मंजू साहू, गीतांजली यादव, संजना यादव, रजनी यादव शामिल है।




राज्य स्तरीय ईको क्लब प्रतियोगिता व ईको बाल मेला हेतु डिजिटल स्कूल के 3 बच्चों का चयन ...



नवागढ़। राज्य स्तरीय ईको क्लब चयन प्रतियोगिता व 2 दिवसीय ईको बाल मेला का आयोजन राजधानी स्थित अग्रसेन धाम व्हीआईपी रोड रायपुर में 11 व 12 अक्टूबर को किया जा रहा है। उक्त प्रतियोगिता में नवागढ़ ब्लाक के शास. पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा) के 3 होनहार बच्चों का चयन हुआ है जो नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी के नेतृत्व में सहभागिता करेंगे। राज्य स्तरीय आयोजन में भाषण, चित्रकला व निबंध लेखन प्रतियोगिता होगी साथ ही ईको बाल मेला प्रदर्शनी लगायी जायेगी जिसमें स्कूल में वर्षभर हुए विविध शैक्षणिक रचनात्मक गतिविधियों का स्टाल लगाकर प्रदर्शन किया जायेगा। इस संबंध में विद्यालय के शिक्षक व ईको क्लब प्रभारी राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि स्कूली बच्चों में पर्यावरणीय शिक्षा एवं उनमें पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता लाये जाने के लिए नेशनल ग्रीन कोर कार्यक्रम के तहत स्कूल में ईको क्लब का गठन किया गया है। विद्यालय द्वारा वर्षभर किये गये विभिन्न आयोजनों, जन जागरूकता अभियान, पर्यावरणीय कार्य, सामुदायिक सहभागिता, स्कूल के बाहर की गतिविधियां, प्रदर्शनी आदि गतिविधियों के आधार पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु जिले से सर्वश्रेष्ठ ईको क्लब के रूप में विद्यालय का चयन किया गया है। विद्यालय में पृथ्वी जल वायु नाम से ईको क्लब गठित है जिसके माध्यम से जल व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विविध गतिविधियां करायी जा रही है। विद्यालय के कक्षा 8 की छात्रा व क्लब की सदस्य रजनी यादव, मनीष कुमार यादव व सुमित कुमार साहू का चयन उक्त प्रतियोगिता हेतु किया गया है। विद्यालय की इस उपलब्धि पर ईको क्लब के जिला समन्वयक श्री गोपेश कुमार साहू (व्याख्याता, डाइट जांजगीर), बीआरसीसी नवागढ़ श्रीमती रिषीकांता राठौर, संकुल प्राचार्य अमोदा श्री सतीष कुमार साहू, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्री चंदराम साहू, शाला आपदा प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्रीमती सावित्री बाई चौहान, प्रधान पाठक श्री भानूप्रताप महाराणा, श्री कन्हैया लाल मरावी, श्री हेमंत यादव सहित पालकों व विद्यार्थियों ने हर्ष व्यक्त किया है। 
                                                                                     




सुमित कुमार साहू


रजनी यादव

मनीष कुमार यादव






वायुसेना को मिली स्वदेशी ताकत, रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने लाइट काम्बैट हेलीकाप्टर देश को किया समर्पित...



भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) को और एडवांस व ताकतवर बनाने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर (LCH) के पहले बैच का आज 3 अक्टूबर 2022 सोमवार को राजस्थान के जोधपुर में एक समारोह में आईएएफ इन्वेंट्री को शामिल किया गया। इस हेलीकॉप्‍टर को प्रचण्ड नाम दिया गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में मेड-इन-इंडिया लाइट काम्बैट हेलीकाप्टरों (Light Combat Helicopter) को भारतीय वायु सेना को सौंपा गया। पाकिस्तान और चीन से जारी विवाद के बीच भारतीय वायुसेना की ताकत में और इजाफा हुआ है। आज हर भारतीय अपने आप को देश की इस उपलब्धि से गौरवान्वित महसूस कर रहा है। एचएएल हल्का लड़ाकू हेलीकाप्टर एक बहु भूमिका हेलीकाप्टर है जिसे हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में भारतीय वायु सेना और भारतीय थलसेना द्वारा इस्तेमाल के लिए विकसित किया जा रहा है। हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत का एक सार्वजनिक प्रतिष्ठान है, जो हवाई संयन्त्र निर्माण करता है। इसका मुख्यालय बंगलुरु में है। HAL की भारत में आठ स्थानों पर 19 उत्पादन इकाइयाँ और 10 अनुसंधान और डिजाइन केंद्र हैं।  


लाइट काम्बैट हेलिकाप्टर में गजब की चुस्ती-फुर्ती, गतिशीलता देखने को मिलेगी। ऊंचे स्थानों में वार करने के लिए इसका रेंज बढ़ाया गया है। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी और सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह हेलीकाप्टर स्पीड, विस्तारित रेंज, उच्च ऊंचाई प्रदर्शन, काम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (सीएसएआर), दुश्मन वायु रक्षा के विनाश (डीईएडी) की भूमिका निभाने के लिए हर मौसम में मुकाबला करने की क्षमता से लैस हैं। यह काउंटर इंसर्जेंसी (सीआई) आपरेशन, धीमी गति से चलने वाले विमान और रिमोटली पायलट एयरक्राफ्ट (आरपीए), उच्च ऊंचाई वाले बंकर बस्टिंग आपरेशन, जंगल और शहरी वातावरण में काउंटर इंसर्जेंसी आपरेशन और जमीनी बलों को समर्थन और परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक शक्तिशाली मंच होगा। इसमें दो लोग बैठ सकते हैं। 51.10 फीट लंबे हेलिकाप्टर की ऊंचाई 15.5 फीट तथा वजन 5800 किलोग्राम है। यह 268 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। जानकारी मुताबिक यह हथियारों और ईंधन के साथ 5,000 मीटर की ऊंचाई से लैंड और टेक आफ कर सकता है। आर्म्ड फोर्सेज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लद्दाख और रेगिस्तानी क्षेत्र में हेलिकाप्टरों को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की योजना है।



Indian Air Force (IAF) में शामिल हो चुका यह नया हेलिकाप्टर हवाई युद्ध में सक्षम है और संघर्ष के दौरान धीमी गति से चलने वाले विमानों, ड्रोन और बख्तरबंद वाहनों से निपटने में अत्यंत माहिर है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ  सिंह ने सुरक्षा कैबिनेट कमेटी के साथ वायु सेना और सेना के लिए 15 एलसीएच की खरीद को मंजूरी दी थी। हेलीकाप्टरों में से 10 भारतीय वायुसेना के लिए और पांच सेना के लिए है। भारतीय सेना में अब लगातार स्वदेशी हथियारों और सामान को शामिल किया जा रहा है। हाल ही में भारतीय नौ सेना में पहले स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत को शामिल किया गया था। भारतीय वायुसेना ने पिछले 3-4 सालों में चिनूक, अपाचे अटैक हेलीकाप्टर और अब एलसीएच को शामिल करने के साथ कई हेलीकाप्टरों को अपने बेड़े में शामिल किया है। भारतीय वायु सेना अब चिनूक हेलिकाप्टरों में महिला पायलटों को भी तैनात कर रहा है, जो उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर नियमित आपूर्ति मिशन पर जा रहे हैं।









 

गांधी जयंती पर बच्चों व शिक्षकों ने देखी गांधी फिल्म, गांव में चलाया स्वच्छता अभियान...



जांजगीर-चांपा जिले के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्म दिवस को स्वच्छता अभियान के रूप में मनाया गया। इस दौरान एक स्वच्छता जागरूकता रैली निकाली गयी जिसमंे बच्चों व शिक्षकों ने घर-घर जाकर स्वच्छता अभियान का महत्व बताया। इस अवसर पर राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गाँधी के वास्तविक जीवन पर आधारित वर्ष 1982 में बनी फिल्म गांधी जिसके निर्देशक रिचर्ड एटनबरो तथा बेन किंग्सले गाँधी की भूमिका में है, का डिजिटल कक्ष में प्रदर्शन किया गया। बच्चों ने गांधी के जीवनी से प्रेरित होकर आज से अपना कार्य स्वयं करने व समय पर पूर्ण करने की शपथ ली। गांधी व शास्त्री की जयंती को यादगार बनाने स्कूल परिसर में फलदार पौधे रोपित कर उसे वृक्ष बनाने का संकल्प लिया गया। इस संबंध में कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक श्री राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि 2 अक्टूबर को रविवार अवकाश की वजह से इस आयोजन को 1 अक्टूबर शनिवार को विद्यालय में मनाया गया है। वर्ष 2014 में गांधी जयंती के अवसर पर देश भर में स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की गयी थी जिसके 8 वर्ष पूरे होने पर विद्यालय परिवार ने गांव में स्वच्छता जागरूकता रैली निकालकर घर, परिवेश, गांव, गली व पेयजल स्त्रोतों को साफ रखने की अपील किया तथा दैनिक जीवन में स्वच्छता का महत्व बताया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्री चंदराम साहू, श्रीमती सावित्री चौहान, प्रधान पाठक श्री भानूप्रताप महाराणा, शिक्षक श्री कन्हैयालाल मरावी, श्री हेमंत यादव सहित विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा।

डिजिटल क्लासरूम में बच्चों ने देखी गांधी फिल्म- गाँधी 1982 में बनी फिल्म है जो लोकप्रिय भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, अहिंसावादी राष्ट्रनायक एवं भारत के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी जिन्हें आदरभाव के साथ बापू और महात्मा गांधी भी कहा जाता है उनके वास्तविक जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन रिचर्ड एटनबरो द्वारा किया गया है और इसमें बेन किंग्सले गाँधी की भूमिका में है। इस फिल्म के लिए दोनों को अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अकादमी पुरस्कार के साथ आठ अन्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुए। यह भारतीय और यूनाइटेड किंगडम की फिल्म निर्माता कंपनियों द्वारा बनाई गई सांझा फिल्म थी। इसका प्रीमियर नई दिल्ली में 30 नवम्बर 1982 को हुआ था।












           मोहनदास करमचंद गांधी जी का जीवन परिचय 



प्रारंभिक जीवन –

महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को ब्रिटिश भारत में गुजरात राज्य के काठियाड जिले के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।  इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतली बाई था। इनके पिता पोरबंदर के दीवान थे। पुतली बाई इनके पिता की चौथी पत्नी थी क्योकि इनसे पहले उनकी तीन पत्नियों की प्रसव के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। इनके भाई का नाम लक्ष्मीदास और करसन दास और एक बहन थी जिनका नाम रालियातबेन था।

वैवाहिक जीवन –

14 वर्ष की भी आयु पूरी न कर पाने से पहले ही मई 1883 में इनका विवाह कस्तूरबाई माखनजी कपाड़िया (कस्तूरबा गाँधी) से कर दिया गया। 1885 ईo में इनकी पहली संतान का जन्म हुआ पर वह कुछ दिन ही जीवित रह सकी। बाद में 1888 में इनके पुत्र हरीलाल का जन्म हुआ 1892 में मणीलाल, 1897 में रामदास का और 1900 में देवदास का। यही इनके चार पुत्र थे। 1944 में पूना में कस्तूरबा गाँधी की मृत्यु हो गयी।

शिक्षा व करियर –

गाँधी जी ने राजकोट से सन 1887 में हाईस्कूल किया और कानून की पढाई के लिए 1889  में बम्बई से इंग्लैण्ड गए और 1891 में बेरिएस्टर की डिग्री प्राप्त की। बापस लौटने के बाद राजकोट और बम्बई में वकालत शुरू की परन्तु कामयाब नहीं हुए। फिर दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय व्यापारी अब्दुल्ला ने उन्हें मुक़दमे की पैरवी के लिए आमंत्रित किया और तब गाँधी जी 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए। वहां पद भारतीयों के सतह हो रहे भेद भाव से ये दुखी हुए और वहीँ रह कर उनके लिए कुछ करने की ठान ली। यहीं पर इनके साथ भी एक दुखद घटना हुयी जब ये दक्षिण अफ्रीका में डबरन से प्रिटोरिया एक रेल से रिजर्वेशन करा के जा रहे थे तो मैरिट्सबर्ग में एक अंग्रेज ट्रेन में चढ़ा उसे एक अश्वेत (गाँधी जी ) के साथ रेल में सफर करना श्रम की बात लगा और उसने स्थानीय पुलिस की मदद से गाँधी जी को ट्रेन से नीचे उतरवा दिया। बस इसी घटना ने गाँधी जी के ह्रदय में अंग्रेजो के प्रति क्रांति की भावना के बीज बो दिए और वही दिन था जब गाँधी जी ने मन में निश्चय कर लिया कि अंग्रेजो तुमने मुझे रेल ने निकला है एक दिन मैं तुम्हे अपने देश से निकाल फेकूंगा और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को यह कर दिखाया। वहीं पर इन्होने 1894 में नटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की। 1904 में फीनिक्स आश्रम की स्थापना की और 1910 में टॉलस्टाय फार्म की स्थापना की। सत्याग्रह/अवज्ञा आंदोलन का पहला प्रयोग गाँधी जी ने यहीं पर 1906 में किया।  दक्षिण अफ्रीका से इनकी बापसी 9 जनवरी 1915 को हुयी और ये मुंबई के अपोलो बंदरगाह पर उतरे इसी दिन भारत में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है।

महात्मा गाँधी जी के लोकप्रिय भजन :- 

रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम। 
सीताराम सीताराम, भज प्यारे, तू सीताराम। 
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान। 
राम रहीम करीम एक समान, हम सब है उनकी संतान। 
सब मिला मांगे यह वरदान, हमारा रहे मानव का ज्ञान। 

राजनीतिक जीवन :- 

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का तृतीय चरण (1919 – 1947)

दक्षिण अफ्रीका से भारत बापसी के बाद ये गोपाल कृष्ण गोखले के संपर्क में आये और उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बना लिया और उन्ही के जरिये ये भारतीय राजनीती में सक्रीय हुए। 1916 ईo में गाँधी जी ने अहमदाबाद के पास साबरमती आश्रम की स्थापना की। अखिल भारतीय राजनीती में इनका पहला साहसिक कदम चम्पारण सत्याग्रह था।

चम्पारण सत्याग्रह (1917) –

इस सत्याग्रह के लिए चम्पारण के रामचंद्र शुक्ल ने गाँधी जी को चम्पारण आने के लिए आमंत्रित किया था। चम्पारण सत्याग्रह बिहार के चम्पारण जिले में किसानो पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में किया गया था। यहाँ पर किसानो को अपनी जमीन के ३/20 हिस्से पर नील के खेती करना और उसे यूरोपीय मालिकों को एक निर्धारित दाम पर बेचना अनिवार्य कर दिया गया था।  इसे ही तिनकठिया पद्यति भी कहा जाता था। इस सत्याग्रह के बाद सरकार द्वारा एक आयोग गठित किया गया और किसानो की समस्या को सुलझा दिया गया इस तरह इनका पहला सत्याग्रह सफल रहा। एन जी रंगा ने गाँधी जी के इस सत्याग्रह का विरोध किया था। इसी सत्याग्रह के दौरान रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इन्हे ‘माहात्मा’ की उपाधि दी।

अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) –

चम्पारण की सफलता के बाद इनका अगला कदम अहमदाबाद की एक कॉटन टेक्सटाइल मिल और उसके मजदूरों के बीच मजदूरी बढ़ाने को लेकर हुए विवाद में हस्तक्षेप करना था। विवाद का कारण प्लेग बोनस था जिसे मिल मालिक प्लेग के ख़त्म होने के बाद ख़त्म करना चाहते थे लेकिन मजदुर प्रथम विश्व युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई के मद्देनजर इस बोनस को जारी रखने की मांग कर रहे थे। अंत में आंदोलन के बाद मजदूरों की माँगो को स्वीकार कर लिया गया और 35% बोनस देने की माँग मान ली।

खेड़ा सत्याग्रह (1918) –

गुजरात के खेड़ा जिले में किसानो की फसल नष्ट हो जाने के बाबजूद भी किसानो से लगान बसूला जा रहा था जिससे किसानो की दशा बहुत ख़राब हो गयी थी अतः गाँधी जी और विट्ठल भाई पटेल ने यहाँ आंदोलन किया और सरकार ने यह घोषणा कर दी की जो किसान लगान दे सकते है उन्ही से लगान बसूला जाये और इस तरह यह आंदोलन समाप्त हो गया।

खिलाफत आंदोलन ( 1919-22) –

यह आंदोलन खलीफा की सत्ता की पुनर्स्थापना के लिए चलाया गया था। दरअसल हुआ ये था कि प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय मुसलमानो ने अंग्रेजो की सहायता इस शर्त पर की थी कि वे इनके धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा करेंगे परन्तु युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार अपने वाडे से मुकर गयी और ब्रिटेन व तुर्की के बीच हुयी ‘सेवर्स की संधि’ के तहत तुर्की के सुल्तान के सारे अधिकार छीन लिए गए।  उस समय इस्लाम जगत में तुर्की के सुल्तान का बहुत सम्मान था वे सब उन्हें अपना खलीफा मानते थे परन्तु ब्रिटिश सरकार के इस कारनामे के बाद वे सब सरकार से नफरत करने लगे। लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुए कलकत्ता अधिवेशन (सितंबर 1920) में खिलाफत आंदोलन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। इस आंदोलन का सर्वाधिक विरोध चितरंजन दास ने किया था। कुछ अन्य कांग्रेसी नेताओं जैसे – जिन्ना, एनी बेसेंट और बिपिन चंद्र पाल ने भी इसका विरोध किया और कांग्रेस छोड़ दी। 1924 में यह आंदोलन उस वक्त समाप्त हो गया जब तुर्की में कमाल पाशा के नेतृत्व में सरकार बनी और खलीफा के पद को समाप्त कर दिया गया।

असहयोग आंदोलन (1920-22) –

गाँधी जी ने यह आंदोलन 1 अगस्त 1920 को प्रारम्भ किया। दिसंबर 1920 के कांग्रेज के नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। इस आंदोलन के खर्च हेतु 1921 ईo में तिलक स्वराज फण्ड की स्थापना की गयी जिसमे ६ माह के भीतर ही 1 करोड़ रूपये जमा हो गए।  इस आंदोलन में एक नई चीज सामने आयी कि इस बार वैधानिक साधनो के अंतर्गत स्वराज्य प्राप्ति की विचारधारा को त्याग दिया गया और इसके स्थान पर सरकार के सक्रिय विरोध की बात सामने आयी।इस आंदोलन के तहत गांधीजी ने अपनी कैसर-ए-हिंद की उपाधि त्याग दी साथ ही जमनालाल बजाज ने ‘राय बहादुर’ की। इस आंदोलन के दौरान बहुत से वकीलों ने अपनी वकालत त्याग दी।  इस आंदोलन की सफलता के लिए गाँधी जी ने कुछ नियम अपनाने को कहा जो की निम्न है –

  • कर न देना
  • हाथ से बने खादी कपड़ो का अधिकाधिक प्रयोग
  • छुआछूत का परित्याग
  • सम्पूर्ण देश को कांग्रेस के झंडे के नीचे लाना
  • हिन्दू मुस्लिम एकता
  • स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग
  • अहिंसा पर बल
  • कानूनों की अवज्ञा करना
  • मद्य वहिष्कार

इसी आंदोलन के दौरान काशी विद्यापीठ और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना हुयी। 1021 में लॉर्ड रीडिंग वायसराय बनकर भारत आये और दमन चक्र प्रारम्भ हुआ नेताओं की गिरफ़्तारी होने लगी जिसमे सबसे पहले गिरफ्तार होने वाले प्रमुख नेता मुहम्मद अली थे। नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ़ वेल्स के भारत आगमन पर काले झंडे दिखाए गए जिससे सर्कार क्रुद्ध हो गयी और कठोर दमन चक्र प्रारम्भ कर दिया जिससे आंदोलन और गरमा गया। 5 फरवरी 1922 को संयुक्त प्रान्त के गोरखपुर जिले के चौरा-चौरी में किसानो के जुलुस पर प्रशासन ने गोली चलवा दी जिससे क्रुद्ध भीड़ ने तीन फूंक दिया जिसमे एक थानेदार सहित 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गयी। इस घटना से क्षुब्ध होकर गाँधी जी ने 12 फरवरी को बारदोली में कांग्रेस समिति की बैठक बुलाई जिसमे असहयोग आंदोलन के स्थगन की घोषणा कर दी।

इसके बाद सरकार ने 22 मार्च को गाँधी जी को गिरफ्तार कर लिया और 6 साल की सजा सुनाई गयी परन्तु बाद में इन्हे आपरेश (आंतो के आपरेशन के लिए) कराने के लिए 2 साल बाद ही 5 फरवरी 1924 को रिहा कर दिया गया (इन दो सालो में ही कांग्रेस दो गुटों चितरंजन दास व मोतीलाल ग्रुप और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी व पटेल ग्रुप में बँट गयी)।

मृत्यु –

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की हत्या 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन में हिन्दू महासभा से सम्बंधित एक हिन्दू राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे नामक ने कर दी। इनकी शवयात्रा 8 किलो मीटर लम्बी थी। बाद में गोडसे को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और 15 नवम्बर 1949 को फाँसी दे दी गयी। महात्मा गाँधी की समाधि राजघाट (नई दिल्ली) में स्थित है।

गाँधी जी के अन्य नाम :- 

महात्मा – रवीन्द्रनाथ टैगोर ने

राष्ट्रपिता – सुभाषचंद्र बोस ने

बापू – जवाहरलाल नेहरू ने

मलंग बाबा – खुदाई खिदमतगार ने

जादूगर – शेख मुजीब उर रहमान ने

अर्द्धनग्न फ़कीर – विंस्टन चर्चिल ने

सदी का पुरुष – अलबर्ट आइंस्टीन ने

महात्मा गाँधी जी द्वारा लिखित पुस्तकें :- 

1909 में ‘हिन्द स्वराज’ लिखी

सत्य के साथ प्रयोग ( My Experiment With Truth ) – आत्मकथा (प्रकाशन – 29 नवंबर 1925 से 3 फरवरी 1929 तक)

Satyagrah in South Africa

On Non Violence

The Words of Gandhi

Non Violent Resistance

सम्मान व पुरस्कार :- 

1930 ईo में टाइम पत्रिका द्वारा पर्सन ऑफ़ ईयर चुने गए।

इनका नाम 5 बार शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए भेजा गया परन्तु इनका चुनाव नहीं हुआ।

महात्मा गाँधी के बारे में अन्य तथ्यात्मक जानकारी :- 

  • महात्मा गाँधी का सबसे पुराना आश्रम – फीनिक्स (डरबन)
  • इन्होंने अछूतों को हरिजन कहा।
  • 12 अप्रैल 1919 को रवीन्द्र नाथ टैगोर ने महात्मा गाँधी जी के नाम एक पत्र लिखकर भेजा जिसमें पहली बार इन्हें ‘माहात्मा‘ के नाम से सांबोधित किया।
  • 4 जून 1944 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से रेडियो पर महात्मा गाँधी को सम्बोधित एक सन्देश दिया जिसमे उन्होंने ही सबसे पहले इन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहा।


लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय

शास्त्री जी भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री थे कार्यकाल के दौरान नेहरु जी की मृत्यु हो जाने के कारण 9 जून 1964 में शास्त्री जी को इस पद पर मनोनित किया गया इनका स्थान तो द्वितीय था, परन्तु इनका शासन ‘अद्वितीय’ रहा इस सादगीपूर्ण एवम शान्त व्यक्ति को 1966 में देश के सबसे बड़े सम्मान ‘भारत-रत्न’ से नवाज़ा गया शास्त्री जी एक महान स्वतंत्रता संग्रामी थे, वे महात्मा गाँधी व जवाहर लाल नेरु के पद चिन्हों पर चलते थे इन्होने 1965 की भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के समय देश को संभाले रखा, और सेना को सही निर्देशन दिया.शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में मुगलसराय (उत्तरप्रदेश) ब्रिटिश भारत में हुआ था शास्त्री जी का जन्म उत्तरप्रदेश के एक कायस्थ परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था, वे प्राथमिक शाला के अध्यापक थे और इन्हें ‘मुंशी जी’ कहकर संबोधित किया जाता था इनकी माता का नाम राम दुलारी था

लाल बहादुर शास्त्री का आरंभिक जीवन 

लाल बहादुर जी को बचपन में परिवार के सदस्य ‘नन्हे’ कहकर बुलाते थे बचपन में ही शास्त्री की के पिता का स्वर्गवास हो गया इसमें बाद लाल बहादुर जी की माता इन्हें लेकर अपने पिता हजारी लाल के घर मिर्जापुर आ गई कुछ समय पश्चात इनके नाना का भी देहांत हो गया

इनकी प्राथमिक शिक्षा मिर्ज़ापुर में ही हुई एवम आगे का अध्ययन हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी-विद्यापीठ में हुआ लाल बहादुर जी ने संस्कृत भाषा में स्नातक किया था काशी-विद्यापीठ में इन्होने ‘शास्त्री’ की उपाधि प्राप्त की. इस वक्त के बाद से ही इन्होने ‘शास्त्री’ को अपने नाम के साथ जोड़ दिया इसके बाद इन्हें शास्त्री के नाम से जाना जाने लगा 1928 में इनका विवाह ललिता शास्त्री के साथ हुआ इनके छह संताने हुई.  इनके एक पुत्र अनिल शास्त्री काँग्रेस पार्टी के सदस्य रहे

लाल बहादुर शास्त्री एक जवान सत्याग्रही 

स्वतन्त्रता की लड़ाई में शास्त्री जी ने मरो नहीं मारो का नारा दिया, जिसने पुरे देश में स्वतन्त्रता की ज्वाला को तीव्र कर दिया 1920 में शास्त्रीजी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और ‘भारत सेवक संघ’ की सेवा में जुड़ गये यह एक ‘गाँधी-वादी’ नेता थे, जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन देश और गरीबो की सेवा में लगा दिया शास्त्री जी सभी आंदोलनों एवम कार्यक्रमो में हिस्सा लिया करते थे, जिसके फलस्वरूप कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा . इन्होने सक्रिय रूप से 1921 में ‘अहसयोग-आन्दोलन’, 1930 में ‘दांडी-यात्रा’, एवम 1942 में भारत छोडो आन्दोलन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में आजादी की लड़ाई को भी तीव्र कर दिया गया नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने ‘आजाद हिन्द फ़ौज’ का गठन कर उसे “दिल्ली-चलो” का नारा दिया और इसी वक्त 8 अगस्त 1942 में गाँधी जी के ‘भारत-छोडो आन्दोलन’ ने तीव्रता पकड़ ली थी इसी दौरान शास्त्री जी ने भारतीयो को जगाने के लिए “करो या मरो” का नारा दिया, परन्तु 9 अगस्त 1942 को शास्त्री जी ने इलाहबाद में इस नारे में परिवर्तन कर इसे “मरो नहीं मारो” कर देश वासियों का आव्हान किया इस आन्दोलन के समय शास्त्री जी ग्यारह दिन भूमिगत रहे, फिर 19 अगस्त 1942 को गिरफ्तार कर लिए गये


Q : लाल बहादुर शास्त्री जी के बचपन का नाम क्या था ?

Ans : लाल बहादुर वर्मा

Q : लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश के लिए क्या किया ?

Ans : आजादी में लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और किसानों के हित के लिए कार्य किये

Q : लाल बहादुर शास्त्री जब देश के प्रधानमंत्री थे तब उनके मंत्रीमंडल में इंदिरा गांधी किस पद पर थी ?

Ans : सूचना एवं प्रसारण मंत्री

Q : लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कब और कहां हुआ ?

Ans : 2 अक्टूबर 1909 में उत्तरप्रदेश के वाराणसी के मुगलसराय क्षेत्र में हुआ

Q : लाल बहादुर शास्त्री किस जाति के थे ?

Ans : कायस्थ

Q : लाल बहादुर शास्त्री किस राजनैतिक पार्टी से संबंध रखते थे ?

Ans : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी

Q : लाल बहादुर शास्त्री जी का उपनाम क्या था ?

Ans : वर्मा बाद में उन्हें शास्त्री नाम मिला

Q : लाल बहादुर शास्त्री की हत्या कैसे हुई ?

Ans : ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौता साइन करने के बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई

Q : लाल बहादुर शास्त्री जी की क्या हत्या हुई थी ?

Ans : लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु का कारण अभी तक राज बना हुआ है

वृद्धजन दिवस पर डिजिटल स्कूल में हुआ में गांव के बुजुर्गों का सम्मान ....

जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लाक अंतर्गत शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में 1 अक्टूबर 2022 शनिवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया। जिसमें गांव के सेवाभावी वरिष्ठजनों को स्कूल परिसर में आमंत्रित कर स्कूल स्टाफ द्वारा फूल, पुष्प हार व श्रीफल से सम्मानित किया गया। इस दौरान इस दिवस को यादगार बनाने परिसर में फलदार पौधे भी रोपित कर उसे वृक्ष बनाने का संकल्प लिया गया। 
इस अवसर पर गांव के बुजुर्ग महिला पुरूषों पुष्पगुच्छ व श्रीफल से सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रधान पाठक श्री भानूप्रताप महाराणा ने अपने संबोधन में कहा कि उम्रदराज लोगों को घर की नींव समझा जाता है और उनके आशीर्वाद को किसी भी काम में सबसे बड़ा सहायक माना जाता है इसलिए हमारे देश में सभी अपने से बड़ों का सम्मान और आदर करते हैं। उन्होंने कहा कि आज वृद्धजनों के सम्मान और उनकी देखभाल के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वृद्द्धजन दिवस मनाया जा रहा है। हम सभी का यह कर्तव्य है कि अपने समाज में बड़ों का सम्मान करें उनकी सेवा के लिए तत्पर रहे। उन्होंने बताया कि दुनियाभर में रह रहे वृद्धों और उम्रदराज लोगों के साथ होने वाले भेदभाव, अपमान जनक व्यवहार, उपेक्षा और अन्याय पर रोक लगाने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाया जाता है। कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने इस दिवस के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष इस दिवस की थीम है-एक बदलती दुनिया में, वृद्धजन की सहनशीलता। इस संबंध में वैश्विक मंच का जिक्र करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अन्तरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर, तेजी से बदलती दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा वृद्ध महिलाओं और पुरुषों की सहनशीलता की तरफ ध्यान आकर्षित कर अपने वीडियो सन्देश में कहा है कि- “पिछले कुछ वर्षों के दौरान नाटकीय परिवर्तन हुए है और वृद्धजन खुद को अक्सर संकटों के बीच में पाते हैं।” उन्होंने कहा कि वृद्धजन अनेक तरह की चुनौतियों के लिये नाज़ुक हालात में हैं, जिनमें कोविड-19 महामारी, बद से बदतर होता जलवायु संकट, विस्तारित संघर्ष व लड़ाइयाँ, और बढ़ती निर्धनता शामिल हैं फिर भी इन जोखिमों के मद्देनजर वृद्धजन ने हमें उनकी असाधारण सहनशीलता के साथ प्रेरित किया है।” 

विश्व में वृद्धों एवं प्रौढ़ों के साथ होने वाले अन्याय, उपेक्षा और दुर्व्यवहार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 01 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे भिन्न-भिन्न-नामों से जाना जाता है जैसे- ‘अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस’, ‘अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस’, ‘विश्व प्रौढ़ दिवस’ अथवा ‘अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ इत्यादि। इस अवसर पर अपने वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करने एवं उनके सम्बन्ध में चिंतन करना आवश्यक होता है। विश्व में इस दिवस को मनाने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, परन्तु सभी का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि वे अपने बुजुर्गों के योगदान को न भूलें और उनको अकेलेपन की कमी को महसूस न होने दें। हमारा भारत तो बुजुर्गों को भगवान के रूप में मानता है। भारत में वृद्धों की सेवा और उनकी रक्षा के लिए कई कानून और नियम बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने भारत में वरिष्ठ नागरिकों के आरोग्यता और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1999 में वृद्ध सदस्यों के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों को स्वयं के लिए तथा उनके पति या पत्नी के बुढ़ापे के लिए व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित करना मुख्य है, इसमें परिवारों को अपने परिवार के वृद्ध सदस्यों की देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही 2007 में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक संसद में पारित किया गया है। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्थापना, चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। लेकिन इन सबके बावजूद हमें अखबारों और समाचारों की सुर्खियों में वृद्धों की हत्या, लूटमार, उत्पीड़न एवं उपेक्षा की घटनाएं देखने को मिल ही जाती हैं। वृद्धाश्रमों में बढ़ती संख्या इस बात का साफ सबूत है कि वृद्धों को उपेक्षित किया जा रहा है। हमें समझना होगा कि अगर समाज के इस अनुभवी स्तंभ को यूं ही नजरअंदाज किया जाता रहा तो हम उस अनुभव से भी दूर हो जाएंगे जो इन लोगों के पास है। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनजागृति का माहौल निर्मित करना होगा, आज हमें बुजुर्गों एवं वृद्धों के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने के साथ-साथ समाज में उनको उचित स्थान देने की कोशिश करनी होगी ताकि उम्र के उस पड़ाव पर जब उन्हें प्यार और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो वो जिंदगी का पूरा आनंद ले सकें। वृद्धों को भी अपने स्वयं के प्रति जागरूक होना होगा, जैसा कि जेम्स गारफील्ड ने कहा भी है कि यदि वृद्धावस्था की झुर्रियां पड़ती हैं तो उन्हें हृदय पर मत पड़ने दो। कभी भी आत्मा को वृद्ध मत होने दो।’

 
इस अवसर पर शिक्षक श्री कन्हैया लाल मरावी, श्री हेमंत कुमार यादव सहित गांव के बुजुर्ग व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।









डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...