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यूनीसेफ का शाला जल और स्वच्छता पर नवागढ़ ब्लाक स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न ...


कोविड 19 अनुरूप व्यवहार और शाला जल एवं स्वच्छता विषय पर यूनीसेफ जिला इकाई व समग्र शिक्षा नवागढ़ जिला जांजगीर-चांपा के संयुक्त तत्वावधान में 8 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को जांजगीर में नोडल शिक्षकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में नवागढ़ ब्लाक से कुल 18 स्कूलों के नोडल शिक्षकों ने हिस्सा लिया। उक्त प्रशिक्षण नवाचारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी (शिक्षक एल.बी., शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा अमोदा) व श्रीमती गीता लहरे (शिक्षक एल.बी., शास.पूर्व माध्य.शाला पीथमपुर) द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जिसमें मार्गदर्शन के लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे व खण्ड समन्वयक श्रीमती रिषीकांता राठौर सहित यूनीसेफ के जिला समन्वयक श्री महेन्द्र यादव उपस्थित रहे। 
 विदित हो कि कोविड वैश्विक महामारी के संक्रमण के दौरान संचालित शालाओं में कोविड अनुरूप व्यवहारों का पालन करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए जल एवं स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था और उचित देखरेख का होना अति आवश्यक है। इसी क्रम में प्रशिक्षण आयोजित कर प्रोजेक्टर पर कोविड अनुरूप व्यवहार परिवर्तन पर जानकारी दी गयी। प्रशिक्षण सत्र में रिसोर्स पर्सन श्रीमती गीता लहरे ने शाला में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, स्कूलों में जल सफाई व स्वच्छता, नोडल शिक्षकों की विद्यालयों में भूमिका, स्वच्छता कार्ययोजना व उसकी निगरानी के मुद्दों पर अपना प्रेजेंटेशन दिया तो वही श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी द्वारा कोविड अनुरूप व्यवहार क्या है? उनका निरंतर अभ्यास कैसे करें? हाथ धुलाई व शौचालय के सही उपयोग हेतु व्यवहारिक जागरूकता, प्रार्थना सभा में हाथ धुलाई प्रतिज्ञा कराने, वाश क्या है? शाला में वाश के आवश्यक तत्व, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए आवश्यक तैयारियां, सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था, हैण्ड वाश की सही प्रक्रिया, फैसिलिटेटर गाइड और संसाधन सामग्री, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन, स्कूल वाश का दैनिक, मासिक, त्रैमासिक व वार्षिक रख रखाव, आदर्श शौचालय, मूत्रालय, रसोई घर के मापदण्डों के बारे में बहुत विस्तार पूर्वक बारीकी जानकारी दी गयी।
 नवागढ़ ब्लाक के कुल 18 नोडल शिक्षकों ने कार्यशाला में की सहभागिता
आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में श्रीमती त्रिवेणी चंदेल शिक्षक (एल.बी.) शास.पूर्व माध्य.शाला पाली संकुल सिवनी, श्रीमती निशा पाण्डेय सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला गौद संकुल गौद, श्रीमती लक्ष्मीन मानिकपुरी सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला पुटपुरा संकुल खोखरा, श्री विश्राम प्रसाद खुंटे सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला केरा संकुल केरा, श्री लक्ष्मण प्रसाद मांझी सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला नगारीडीह संकुल केरा, श्री प्रमोद कुमार साहू प्रधान पाठक शास.प्राथ.शाला गाड़ापाली संकुल पीथमपुर, श्रीमती त्रिवेणी राठौर उ.व.शि. शास.बालक पूर्व मा.शाला नैला संकुल गौशाला नैला, श्रीमती चंद्रकला खरे सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला डाइट जांजगीर संकुल सदर जांजगीर, श्री हमराज कुमार शुक्ला शिक्षक (एल.बी.) शास. पूर्व माध्य.शाला दुरपा संकुल मुड़पार, श्री लालजी पटेल सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला सबरियाडेरा तुस्मा संकुल तुस्मा, श्री रविकांत साव शिक्षक (एल.बी.) शास. पूर्व माध्य.शाला उदयभाठा संकुल उदयभाठा, श्री चंद्रकांत श्रीवास सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला धाराशिव (रोगदा) संकुल धाराशिव, श्रीमती अन्नपूर्णा शुक्ला उ.व.शि. शास.कन्या पूर्व मा.शाला जांजगीर संकुल कन्या जांजगीर, श्री अनिल कुमार राठौर उ.व.शि. शास.पूर्व मा.शाला गौशाला नैला संकुल गौशाला नैला, श्री रामविलास डाहिरे सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला नवापारा संकुल धुरकोट, श्रीमती योगिता राठौर शिक्षक (एल.बी.) शास. पूर्व मा.शाला भड़ेसर संकुल भड़ेसर, श्रीमती विद्या देवी खरसन सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. प्राथ.शाला आमापाली खिसोरा संकुल बुड़ेना व श्री रोशन लाल राठौर सहा. शिक्षक (एल.बी.) शास. नवीन प्राथ.शाला डीहपारा बनारी संकुल बनारी ने सहभागिता निभायी। इस दौरान सभी प्रतिभागियों का पंजीयन कर मास्क, डायरी व पेन प्रदान किया गया साथ ही प्री व पोस्ट टेस्ट माध्यम से प्रतिभागियांे का आंकलन किया गया साथ ही फीडबैक फार्म भराया गया।   

                                                    






















समाचार पत्र में प्रकाशित प्रशिक्षण की खबर


















      




















































प्रशिक्षण आधारित विडियो देखने के लिए क्लिक करें































         


शिक्षकों की प्रेरणा, प्रयास व प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने का दिन है ‘शिक्षक दिवस’


सम्माननीय शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,



साथियों हरेक छात्र के जीवन में शिक्षक का बहुत अहम योगदान होता है और एक छात्र हमेशा अपने गुरु का सम्मान करता है। शिक्षकों के योगदान को देखते हुए उनके सम्मान में हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 1962 में हुई थी। शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी पूरे राज्य भर के शिक्षकों व विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देेते हुए एक बेहतर शिक्षक बनकर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बेहतरी के लिए समर्पित होने की अपील करता हूं। आज मैं अपने उन सभी शिक्षकों को याद कर रहा हूं जिन्होंने मेरे जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है। इसी बात के साथ मैं आज अपनी बात आरंभ कर रहा हूं, आप सभी को ‘शिक्षक दिवस‘ की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां। आज 21 वीं सदी के वर्तमान दौर में शिक्षकों का कार्यक्षेत्र काफी चुनौतीपूर्ण हो चुका है और इस भूमिका का निर्वाह जिस शिद्दत के साथ हमारे शिक्षकगण कर रहे हैं वह तारिफ ए काबिल है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले तमाम सकारात्मक बदलाव आप और हम जैसे शिक्षकों के प्रयासों, प्रतिबद्धता और आंतरिक रूप से प्रेरित होकर काम करने का ही परिणाम है। हमारे शिक्षक साथियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अच्छा काम करके अपनी क्षमता का परिचय दिया है। आज जरूरत इस बात कि है कि हम आपस में एक-दूसरे के छोटे-छोटे सार्थक प्रयासों को प्रोत्साहित करते रहे ताकि हमारे काम करने की ऊर्जा और उत्साह सतत बना रहे। हमें एक दूसरे को प्रोत्साहित करने की संस्कृति का विकास करना है ताकि हमारा काम करने फोकस बना रहे। एक शिक्षक के रूप में हमारे मन में छात्रों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लक्ष्य सदैव सर्वाेपरि रहे। काम करने की स्वतंत्रतता, निर्णय की आज़ादी और शिक्षकों को गैर अकादमिक कार्यों से मुक्त करने के साथ आवश्यक संसाधन सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो हम शिक्षकों को शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बच्चों के ऊपर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। विभिन्न शैक्षिक और सह-शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी से भी बेहतर माहौल बनाया जा सकता है।
                        आज के दौर में बच्चों पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने, अच्छे नंबर लाने और बड़ों की हर अपेक्षा पर खरे उतरने का दबाव है। ऐसे में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से उनके खिलाफ होने वाली हिंसा भी बढ़ रही है, ऐसे में समाज हम शिक्षकों की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देख रहा है कि हम ऐसी स्थितियों से उन्हे उबारे। हमें अभिभावकों के भरोसे पर खरा उतरने की जरूरत है ताकि पालक बालक और शिक्षक से मिलकर चलने वाला स्कूल को समुदाय में अच्छा माहौल मिल सके। हम सबकी यह प्राथमिकता होनी ही चाहिए कि प्रत्येक बच्चे के भीतर हम कम से कम पढ़ना-लिखना और अपने जीवन की समस्याओं पर सोचना, समाधान करने के लिए पहल करना, आत्मविश्वास के साथ अपनी बात कहना, धैर्य के साथ अपने साथियों और बड़ों को सुनने जैसी बुनियादी क्षमताओं का विकास कर सकें।
                    हम आये दिन कई स्कूलों व शिक्षकों की सफलता की कहानी सुनते देखते रहते है। इससे समाज में साफ संदेश जाता है कि सरकारी स्कूलों की दशाएं बदल रही है और हमारे सरकार की तरफ से भी शिक्षा में बदलाव की दिशा में ऐसे प्रयासों को काफी गति मिल रही है। इन तमाम परिस्थितियों हम सभी शिक्षक एक उम्मीद तो कर ही सकते हैं कि हमारे बहुत से शिक्षक साथी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अच्छा काम कर रहे हैं। यह काम सच्चे अर्थों में राष्ट्र के निर्माण का काम है। देश के हित का काम है। ऐसे काम के लिए किस के दिल में आपके लिए सम्मान की भावना नहीं होगी। हम सभी इस बात से अवगत है कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों के खिलाफ दुष्प्रचार अपने चरम पर है, मगर हमारे नवाचारी शिक्षकों की बढ़ती तादात लगातार ऐसे उदाहरण सामने रख रहे है जिससे सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों में सम्मान की भावना जागृत हो रही है।
                        आमतौर पर हम दो प्रकार के जीवन जीते है एक सार्वजनिक व दूसरा नीजि जीवन मैंने अपने शिक्षकीय जीवन में यह अनुभव किया है और कर रहा हूं कि हमारे कुछ शिक्षक साथी अपनी निजी समस्याओं को सार्वजनिक बनाने के अवसर तलाशते रहते है। हमें ऐसी नीजि समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाने से बचना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता दिखता है। स्कूल के समय में हम अपना समय केवल बच्चों के लिए व्यतीत करें ताकि बच्चों की शिक्षा और उनके जीवन के सबसे रचनात्मक लम्हों को हम  सामाजिक बुराइयों बचा सके, तभी हम सच्चे अर्थों में अपने शिक्षक होने की सार्थकता को साबित कर पाएंगे।
                            हम शिक्षकों के कारण ही यह संसार आज एक बेहतर संसार है। नई पीढ़ियों को बनाने में शिक्षकों का बड़ा योगदान है। किंतु हमारी आज की पीढ़ी के मन में शिक्षकों के लिए वह सम्मान नहीं है जो पूर्व में हमारे शिक्षकों के प्रति हमारी पीढ़ी में होता था। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने सामाजिक जीवन के साथ एक शिक्षक के तौर पर असंख्य छात्रों को ज्ञान दिए। हर व्यक्ति की सफलता के पीछे शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो कई तरीकों से छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आज शिक्षक दिवस के मौके पर मैं सरकारी स्कूल में शिक्षा को बेहतर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहता हूं कि कोई भी शिक्षक नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण, अनुशासन व दृढ़ संकल्प से उत्कृष्ट शिक्षक बन सकता है। हमारा यह दायित्व बनता है कि कोरोना संकट में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। उन्हें ऊर्जावान बनाएं रखने के लिए हमें समय-समय पर नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखना होगा जिससे उनका उत्साहवर्धन होता रहे और उनकी पढ़ाई निरंतर जारी रहे। 
                            हमारे स्कूलों में कई विद्यार्थी ऐसे होते है जिन्हे स्कूल जाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता जबकि कुछ बच्चे बड़ी प्रसन्नता से विद्यालय जाते हैं इसका एकमात्र कारण केवल पढ़ाई ना करने की इच्छा नहीं है, बल्कि कई अन्य कारक होते हैं जिससे बच्चे स्कूल जाने की प्रति अनिच्छा व्यक्त करते हैं, और अगर जबरदस्ती चले भी जाए, तो पूरे दिन उदास रहते हैं। ऐसे में यह हम शिक्षकों व अभिभावकों का कर्तव्य है कि बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाए। उन्हें परिस्थिति से डरने ना दें और उनके विचारों को इतना मजबूत बनाएं, कि वह खुद शिक्षक से शिकायत कर सकें। एक बार बच्चा परिस्थिति का सामना करना सीख गया, तो वह स्कूल के प्रति सकारात्मक होने लगेगा। शिक्षकों को चाहिए कि वे कक्षा में बुद्धिमान बच्चों की ही प्रशंसा न करें अपितु सभी बच्चों का मनोबल बढ़ाएं जिससे वे खुद को लेकर आत्मविश्वासी बने रहे। हम बच्चों को यह सिखाएं कि वे खुद पर विश्वास रखें और हीन भावना मन में ना आने दे। अपनी कमजोरियों को भी आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करें, और अपनी क्षमताओं पर भी भरोसा रखें। हर विद्यार्थी यह मानें कि वह अपने आप में बहुत खास हैं। मैं शिक्षकों व विद्यार्थियों से अपील करता हूं कि हम खुद को सक्रिय बनाएं हम ऐसी क्रियाओं में स्वयं को संलग्न करें, जिनमें हमारी सक्रियता बढे। सुबह पैदल चले, शारीरिक कार्य करें, खेल आदि का अभ्यास करें। इससे हमारी आलसी प्रवृत्ति बदलेगी और हम सक्रिय हो पाएंगे। हम कक्षा में बच्चों को रटने की जगह सीखने की प्रक्रिया पर बल दे, हमारे बच्चे जो भी पढ़ रहे हैं उससे रटे नहीं बल्कि समझे कि पाठ में आपको क्या समझाया जा रहा है। एक बार जब विषय वस्तु आपके समझ में आ जाएगी तब विद्यार्थी उससे संबंधित प्रश्नों को हर तरह से हल कर पाएंगे। बतौर शिक्षक हमें कक्षा में बच्चों को साफ सुथरी व स्पष्ट लिखावट में मदद करनी चाहिए। हम उन्हें सिखाए कि स्वच्छ, सुंदर और सुडौल अक्षर का निर्माण, अक्षर, शब्द और वाक्य से वाक्य के बीच की दूरी को ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। वाक्य की बनावट भी ठीक होनी चाहिए। साथ ही उसमें व्याकरण संबंधी कोई त्रुटि ना हो। बच्चों का मानसिक विकास के साथ ही शारीरिक विकास बहुत आवश्यक है, हमें स्कूलों में खेलकूद की गतिविधियों को भी समय-समय पर आहूत करना चाहिए क्योंकि खेल से मिली हार उन्हें जीवन में चुनौतियों का सामना करने एवं हार स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है। खेल के दौरान गिरना एवं चोट लगना उनके दर्द सहने की क्षमता को बढ़ाता है, उन्हें अधिक सहनशील बनाता है।

आप सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस 5 सितंबर 2021 की पुनः मंगलमय शुभकामनाएं



शिक्षक दिवस के अवसर पर लोकमाया अखबार में प्रकाशित मेरा लेख ...




जांजगीर-चांपा जिला शिक्षा गौरव पुरस्कार से सम्मानित हुए राजेश कुमार सूर्यवंशी ... 
आज 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय जांजगीर में प्रयास कैरियर अकादमी द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस सम्मान समारोह में राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी को जांजगीर-चांपा विधायक नारायण प्रसाद चंदेल ने शाल, श्रीफल व मोमेंटों से सम्मानित किया। इस समारोह में सेवानिवृत्त प्राचार्य, बीईओ नवागढ़ सहित जनप्रतिनिधि अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान जिले भर से कुल 11 नवाचारी शिक्षकों सहित उपस्थित सेवा निवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया गया। अपने मंचीय उद्बोधन में विधायक श्री चंदेल ने नवाचारी शिक्षक श्री सूर्यवंशी के विद्यालयीन गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि छोटे से गांव में डिजिटल स्कूल और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में शिक्षक द्वारा किया जा रहा प्रयास अत्यंत सराहनीय है। विदित हो कि वर्ष 2017 में विधायक श्री चंदेल ने नवाचारी शिक्षक के स्कूल नवापारा (अमोदा) पहुंचकर उनके किये जा रहे कार्यों का अवलोकन किया था। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने इस सम्मान के लिए प्रयास कैरियर अकादमी के पूरे टीम का आभार व्यक्त किया है। 




लोकमाया अखबार में प्रकाशित खबर 



नवभारत अखबार में प्रकाशित खबर





  

प्रौढ़ शिक्षा हेतु एस.सी.एफ. व फोकस ग्रुप पेपर निर्माण कार्यशाला में शामिल हुए जांजगीर-चांपा जिले के प्रतिनिधि ...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुक्रम में संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद छ.ग. तथा राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के तत्वाधान में 18 व 19 अगस्त 2021 तक दो दिवसीय  राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर में किया गया जिसमें डाइट जांजगीर से व्याख्याता श्री प्रद्युम्न कुमार शर्मा तथा शैक्षणिक जिला सक्ती से नवाचारी शिक्षक श्री पुष्पेंद्र कौशिक प्रतिनिधि के रुप में सम्मिलित हुए। दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिवस पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक एवं नोडल अधिकारी श्री प्रशांत पाण्डेय, शिक्षा महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक श्री आलोक शर्मा, डा. नीलम अरोरा, समग्र शिक्षा के सहायक संचालक डा.एम सुधीश, प्रीति सिंह व नेहा शुक्ला के द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या, राज्य की पाठ्यचर्या तथा फोकस ग्रुप पेपर पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।
कार्यशाला से लौटकर श्री प्रद्युम्न कुमार शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा एनसीएफ (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) विकसित करने हेतु सभी राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केन्द्र में रखकर प्रौढ़ शिक्षा हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के एस.सी.ई.आर.टी. में एस.सी.एफ. (स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क) एवं फोकस ग्रुप पेपर विकसित करने हेतु दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। श्री शर्मा ने बताया कि संपन्न हुए राज्य स्तरीय कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रौढ़ शिक्षा में नवाचारी तरीके अपनाए जाएं जिससे प्रौढ़ लोग आसानी से शिक्षा की मुख्यधारा में वे अपने आप को जोड़ सके। प्रौढ़ शिक्षा के लिए स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क कैसे बनाएं पर पहले पांच बिंदुओं बुनियादी साक्षरता तथा संख्या ज्ञान, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल विकास, बुनियादी शिक्षा तथा सतत शिक्षा पर समझ बनाई गई तत्पश्चात राज्य से आए हुए विभिन्न प्रतिनिधियों द्वारा उपरोक्त बिंदुओं पर चर्चा परिचर्चा के आधार पर प्रस्तुतीकरण किया गया। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय ने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा के लिए ऐसी कार्य योजना बनाई जाएगी जो व्यावहारिक एवं आकर्षक हो जिससे प्रौढ़ आकर्षित हो सके। एस.सी.ई.आर.टी के अतिरिक्त संचालक डा. योगेश शिवहरे ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने जिन पांच विषयों में अलग-अलग समूहों में चर्चा की है इसे अपने जिलों में जाकर चर्चा करनी है। प्रदेश में शत् प्रतिशत् साक्षरता दर प्राप्त करने के लिए ऐसी पाठ्यचर्या का निर्माण करना होगा जो नवीन और पुरानी चीजों से अलग हटकर पूरी तरह से नवाचारी हो।  
                   


















शिक्षा के चहुंमुखी विकास से होगा देश व समाज का सर्वांगीण विकास- राजेश कुमार सूर्यवंशी...


(स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ पर विशेष)
आज 15 अगस्त 2021 को हम सब आजादी की 75 वां वर्षगांठ मना रहे है। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले के राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने जिले भर के शिक्षकों, विद्यार्थियों, आम नागरिकों व पालकों से बच्चों के शैक्षिक विकास में सहभागी बनने की अपील की है क्योकि शिक्षा के चहुंमुखी विकास से होगा देश व समाज का सर्वांगीण विकास हो सकता है। आजादी के इस उत्सव के अवसर पर शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कहा है कि 15 अगस्त एक ऐसा अवसर है जब हम सब तिरंगे को लहराते हुए स्वाधीनता दिवस समारोहों में भाग लेकर और देशभक्ति से भरे गीत सुनकर उत्साह से भर जाते हैं। हम सबके लिए यह स्वाधीनता के गौरव को महसूस करने का दिन है। हमारा भारत देश इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की 75 वें वर्षगांठ को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के रूप में मना रहा है। जिसका श्रेय चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, खुदीराम बोस, अशफाकउल्ला खान, छत्तीसगढ़ के सेनानी वीर नारायण सिंह व वीर गुण्डाधूर सहित उन तमाम देशभक्तों व शहीद जवानों को जाता है जिनके बलिदान के बल पर ही हम सब आज एक स्वतंत्र देश के निवासी हैं। इस अवसर पर आइए हम सब अपने स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान को कृतज्ञता के साथ याद करे क्योंकि उनके बलिदान हमारे स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों की नींव पर ही आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है। हमारे दूरदर्शी राष्ट्र-नायकों ने अपने देशभक्ति विचारों को राष्ट्रीयता के एक सूत्र में पिरोकर गुलाम भारत देश को दमनकारी विदेशी शासन से मुक्त कराया और भारत माता की संतानों के भविष्य को सुरक्षित किया हम सब उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते है।
राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी कहते है कि हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल जैसे महापुरूष हमारे स्वाधीनता आंदोलन के मार्गदर्शक रहे। उनके व्यक्तित्व में एक संत और राजनेता का जो समन्वय दिखाई देता है, वह भारत की मिट्टी में ही संभव था। सामाजिक संघर्ष, आर्थिक समस्याओं और जलवायु परिवर्तन से परेशान आज की दुनिया गांधीजी की शिक्षाओं में समाधान पाती है। समानता और न्याय के लिए उनकी प्रतिबद्धता हमारे गणतंत्र का मूलमंत्र है। साथियों इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं है, हमारे विद्यार्थी आज हमारे साथ उपस्थित नहीं है, इसका कारण स्पष्ट है। पूरी दुनिया कोविड 19 के घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुंचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है। इस वैश्विक महामारी के कारण हम सबका जीवन पूरी तरह से बदल गया है। इस बड़ी चुनौती का सामना करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने पूर्वानुमान करते हुए प्रभावी कदम उठाए जिसके चलते घनी आबादी और विविध परिस्थितियों वाले हमारे विशाल देश ने इस चुनौती का डटकर सामना किया है। हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि वैश्विक महामारी को समाप्त करने में हम अपना योगदान दे। कोविड टीका अवश्य लगवाये और कोरोना प्रोटोकाल का पालन करें। इस कोरोना काल में जब हम बच्चों से भौतिक रूप से दूर है किंतु वर्चुअल तरीकों से हम उन्हे शिक्षा दे रहे है। हमारा शिक्षा विभाग पढ़ई तुंहर दुआर, अंगना म शिक्षा जैसे अनेकों उपायों से बच्चों को पढ़ाने के लिए योजना चला रही है, आनलाईन तरीकों से आज शिक्षक प्रशिक्षण सुचारू रूप से चल रहा है ऐसे में हम सबका कर्तव्य बनता है कि इसमें अपना बेहतर योगदान दे। 
आज इस पुनीत अवसर पर हम उन सभी डाक्टरों, नर्सों, पुलिसकर्मियों, सफाई कर्मचारी, डिलीवरी स्टाफ, वाहन चालक, सरकारी कर्मचारी, समाजसेवी संगठन और उदार नागरिकों का हृदय से धन्यवाद करते है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। दुर्भाग्यवश उनमें से अनेक योद्धाओं ने इस महामारी का मुकाबला करते हुए अपने जीवन का भी बलिदान दिया है हम सब उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते है। साथियों भारत देश की यह परंपरा रही है कि हम केवल अपने लिए नहीं जीते हैं बल्कि पूरे विश्व के कल्याण की भावना के साथ कार्य करते हैं। भारत की आत्मनिर्भरता का अर्थ स्वयं सक्षम होना है। पूरे विश्व के अनेकों देशों को हमारे देश ने कोविड टीका भेजकर वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात् समस्त विश्व एक ही परिवार है की उस मान्यता को साकार किया है, जिसका उद्घोष हमारी परंपरा में बहुत पहले ही कर दिया गया था। हमारे भारतीय सेना के जवान सूबेदार नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में भाला फेक प्रतियोगिता  में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे विश्व के समक्ष भारत का सर गर्व से ऊंचा किया है यह हम सबके लिए फक्र की बात है हम अपने विद्यार्थियों को खेल के प्रति भी जागरूक करें।
राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि आज अवसर हमारे वीर जवानों की शहादत को याद करने का भी है जिन्होंने सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत माता के वे सपूत राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे। आज हमारा पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन कर रहा है। कोविड काल में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। एक अदृश्य वायरस ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि प्रकृति मनुष्य के अधीन है। मेरा मानना है कि अब हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाते हुए सादा जीवन-शैली को अपनाने की आवश्यकता है। हमारे विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार शिक्षा प्रदान करने की दृष्टि से केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू किया है। मुझे विश्वास है कि इस नीति से गुणवत्ता से युक्त एक नई शिक्षा व्यवस्था विकसित होगी जो भविष्य में आने वाली चुनौतियों को अवसर में बदलकर नए भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी। हमारे युवाओं को अपनी रूचि और प्रतिभा के अनुसार अपने विषयों को चुनने की आजादी मिली है। इससे उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा। हमारी भावी पीढ़ी इन योग्यताओं के बल पर न केवल रोजगार पाने में समर्थ होगी बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी। नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में अध्ययन को महत्व दिया गया है जिससे बालमन सहजता से पुष्पित-पल्लवित हो सकेगा। साथ ही इससे भारत की सभी भाषाओं को और भारत की एकता को आवश्यक बल मिलेगा। उन्होंने जिले भर के शिक्षकों से कहा है कि इस वैश्विक महामारी का सामना करने में जिस समझदारी और धैर्य का परिचय हम सब शिक्षक दे रहे हैं उसकी मैं सराहना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप सब इसी प्रकार, सतर्कता और जिम्मेदारी बनाए रखेंगे। हमारे पास विश्व-समुदाय को देने के लिए बहुत कुछ है विशेषकर बौद्धिक, आध्यात्मिक और विश्व-शांति के क्षेत्र में। इसी लोक-मंगल की भावना के साथ मैं प्रार्थना करता हूं कि समस्त विश्व का कल्याण हो। 
शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे राजेश कुमार सूर्यवंशी
जांजगीर-चांपा जिले में राजेश कुमार सूर्यवंशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाने जाते है। राष्ट्रीय, राज्य व जिले स्तर पर अनेक पुरस्कारों से नवाजे जा चुके है।शिक्षक राजेश सूर्यवंशी को जिले में पहला सरकारी डिजिटल स्कूल आरंभ करने का श्रेय जाता है। राजेश कुमार सूर्यवंशी डिजिटल पाठ्यपुस्तकों और आडियों, विडियों, इन्टरैक्टिव छवियों, मानचित्रों, प्रश्न संग्रहों जैसे ई संसाधनों का उपयोग करते हुए जल व पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ते हुए समय-समय पर शैक्षणिक प्रदर्शनियों, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं, अनुसंधान गतिविधियों व आनलाईन कोर्सेस में भाग लेकर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रयासरत मानव संसाधन व विकास मंत्रालय भारत सरकार के हाथों पुरस्कृत एक राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक है जो स्वयं के संसाधनों से सरकारी स्कूल को डिजिटल स्कूल में तब्दील करने के बाद अब आई.सी.टी. तकनीकी का उपयोग कर राज्य भर के उत्साही शिक्षकों व विद्यार्थियों के साथ आनलाईन व आफलाईन तरीकों से जुड़कर नित नये नवाचारी गतिविधियों के लिए समर्पित है।





दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में प्रकाशित मेरा लेख दिनांक 15-08-2021



लोकमाया में प्रकाशित मेरा लेख दिनांक 15-08-2021


डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...