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प्रौढ़ शिक्षा पढ़ना-लिखना अभियान हेतु नवागढ़ ब्लाक के स्वयंसेवकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न..


जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण जांजगीर-चांपा के मार्गदर्शन में विकासखण्ड साक्षरता मिशन नवागढ़ द्वारा पढ़ना-लिखना अभियान के तहत स्वयंसेवी शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण 15 से 16 मार्च तक संपन्न हुआ। जिला साक्षरता अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी रा.गा.शि.मि. श्री ब्राम्हणी जी, डाईट प्राचार्य श्रीमती सविता राजपूत व बीईओ श्री विजय कुमार लहरे ने प्रशिक्षण का डाईट भवन में शुभारंभ किया। अतिथियों ने अपने संबोधन में इस प्रदेश व्यापी महाअभियान में निस्वार्थ भावना से जुड़ने व स्वयंसेवी शिक्षकों की सक्रियता की सराहना की। प्राधिकरण के जिला नोडल अधिकारी श्री संतोष कुमार कश्यप ने पढ़ना-लिखना अभियान के क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अभियान में 15 वर्ष से अधिक उम्र के असाक्षरों को साक्षर कर शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा। असाक्षरों को स्वयंसेवी शिक्षक 120 घंटे की पढ़ाई आखर झांपी प्रवेशिका से कराएंगे। डाईट प्राचार्य श्रीमती सविता राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक विशेष कार्यक्रम है जिसमें कंप्यूटर की बुनियादी साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, विधिक साक्षरता, चुनावी साक्षरता, श्रेष्ठ पालकत्व, जीवन मूल्य, आत्मरक्षा इत्यादि का ज्ञान कराया जा रहा है। अभियान के ब्लाक नोडल अधिकारी श्री राजीव नयन शर्मा ने पढ़ना लिखना अभियान का परिचय देते हुए बताया कि नवागढ़ ब्लाक से कुल 2925 असाक्षरों का सर्वे के माध्यम से चिन्हांकन किया गया है जिन्हे साक्षर बनाने के लिए 312 स्वयंसेवक शिक्षकों का चिन्हांकन कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान के लिए मैचिंग बैचिंग अर्थात कौन किसको कहां पढ़ाएगा, का चिन्हांकन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। श्री शर्मा ने स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण में साक्षरता के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पोषण साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, चुनावी साक्षरता व शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से भी अवगत कराया। कुशल प्रशिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने दो दिवसीय प्रशिक्षण मंे वातावरण निर्माण, स्वयंसेवी शिक्षकों की भूमिका, डिजिटल माध्यमों का उपयोग, नवाचारी गतिविधियां, कक्षा संचालन कैसे करें, साक्षरता केंद्र का रखरखाव, प्रौढ़ों को समझना, सिखने की अवधारणा व शिक्षण पद्धति, प्रवेशिका का परिचय, पठन पाठन गतिविधियां, आंतरिक मूल्यांकन एवं परीक्षा प्रक्रिया आदि विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया। पढ़ना-लिखना अभियान के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए आखर झापी किताब के सभी पाठ के विडियों को प्रोजेक्टर प्रदर्शित किया गया। कुशल प्रशिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि 120 घंटे की पढ़ाई के बाद एनआईओ द्वारा बुनियादी साक्षरता का मूल्यांकन किया जाएगा। इस पूरे अभियान में लचीलापन व नवाचारी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण को सफल बनाने में प्रशिक्षकगण श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी, श्री सरकार सिंह लहरे, श्री असीमधर दीवान व श्री मनोज पटेल, श्री सुनील पटेल, कुमारी प्रतिभा रत्नाकर आदि का सराहनीय योगदान रहा। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षार्थियों के लिए भोजन का प्रबंध किया गया तथा पूरे सत्र का पंजीयन फार्म, फीडबैक फार्म भराया गया जिसके आधार पर सभी को प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा। 


































अंतर्राष्ट्रीय संबंध - संयुक्त राष्ट्र संघ एवं उसके प्रमुख अंग

सादर नमस्कार, 
आज हम अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को जानेंगे हम जानेंगे कि लीग आफ नेशन क्या है, संयुक्त राष्ट्र संघ क्या होता है, सुरक्षा परिषद क्या है, वीटो पावर किसे कहते है परिषद की स्थायी व अस्थायी सदस्यता क्या होती है आदि। साथियों आप सभी जानते है कि विश्व के अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का मुख्यालय जेनेवा में ही है। यह स्विटजरलैण्ड में है जो मध्य यूरोप का एक देश है और पूरे देश का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आल्पस पहाड़ों से ढकी हुई है, स्विस लोगों का जीवनस्तर दुनिया में सबसे ऊँचे जीवनस्तरों में से एक है। स्विटजरलैण्ड की राजधानी बर्न है। 
राष्ट्र संघ की स्थापना कैस हुई-
1914 में प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ था जिसमें भले ही सारे दुनिया के देश शामिल नहीं थे किंतु सभी देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित जरूर हुई थी यह विश्वयुद्ध वर्ष 1918 में समाप्त हुआ था जिसे 1919 की वर्साय की संधि के द्वारा समाप्त किया गया था। इस दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना की जो द्वितीय विश्वयुद्ध कभी न हो इसे लीग आफ नेशन अर्थात राष्ट्र संघ कहा गया 10 जनवरी 1920 को इसकी नींव रखी गयी। इसका काम विश्व भर में स्वास्थ्य, व्यापार व श्रमिकों की स्थिति बेहतर करना भी रहा और इन सबका मुख्यालय जेनेवा में बनाया गया। किंतु लीग आफ नेशन की सदस्यता लेने के पहले किसी भी देश को अपने संसद में प्रस्ताव पारित करना होता था और हुआ यू कि इसकी स्थापना करने वाले यूएनए को ही उसके संसद ने प्रस्ताव पारित नहीं किया कि वह इसका सदस्य बनें। इस तरह से लीग आफ नेशन अपनी मजबूती पर कायम नहीं रह सका। अब जर्मनी ने पोलैण्ड पर आक्रमण किया, वह फ्रांस के जमीन पर कब्जा जमाता गया और लीग आफ नेशन मौन साधे रही, जर्मनी ने रूस पर भी कब्जा जमाना शुरू कर दिया और इस तरह से द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरूआत हो गयी वर्ष 1939 से 1945 तक द्वितीय विश्वयुद्ध चला। अब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रूसवेल्ट ने लीग आफ नेशन को सुधारते हुए एक मजबूत संगठन बनाया उन्होंने इसका नाम बदलकर यूएनओ यूनाइटेड नेशन आर्गनाइजेशन संयुक्त राष्ट संघ रखा। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य भविष्य में तृतीय विश्वयुद्ध को होने से रोकना है। संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित है।
यूएनओ के कुल छह अंग है-
महासभा, न्यास, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, सचिवालय, सामाजिक एवं आर्थिक परिषद तथा सुरक्षा परिषद है। इसमें सुरक्षा परिषद को सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। 
महासभा (General Assembly) में यूएनओ के सभी सदस्य देश शामिल है वर्तमान में 193 देश इसके सदस्य है इस एक तरह से विश्व का लघु संसद कहा जाता है। प्रतिवर्ष सितंबर माह में न्यूयार्क के मैनहैटन नामक स्थान में इसकी वार्षिक बैठक होती है। जिसमें सभी सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष अर्थात प्रधानमंत्री शामिल होते है। इसके अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का ही होता है भारत की पहली महिलाध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित रही है।
यूएनओ का दूसरा अंग है न्यास (Trusteeship Council) अर्थात ट्रस्ट पूरे संगठन के खर्च चलाने के लिए कुछ देशों का समूह है जो पूरे संगठन के खर्च के लिए धन जुटाती है हमारा भारत इस पूरे खर्च का करीब एक प्रतिशत धन ही उपलब्ध कराती है।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) यह नीदरलैण्ड के हेग नामक शहर में है इसमें कुल 15 न्यायाधीश होते है एक न्यायाधीश का कार्यकाल 9 साल का होता है।
यूएनओ का चैथा अंग सचिवालय (Secretariat) है जो पूरे संगठन का वर्कप्लान करता है, इसका मुखिया महासचिव कहलाता है इसका कार्यकाल 5 साल का होता है। यूएनओ सचिवालय के नियम पूरे विश्व पर लागू होते है। नार्वे के त्रिगवेली यूएनओ के प्रथम महासचिव बने थे। वर्तमान में पुर्तगाल के एन्टेनियो गुटेरस यूएनओ के महासचिव है। उनके पहले बानकी मून जो कि दक्षिण कोरिया के थे इसके महासचिव रहे। मून कुल दो दो बार महासचिव रह चुके है। घाना के कोफी अन्नान भी यूएनओ के दो बार महासचिव रहे चुके है। भारत से अब तक कोई भी महासचिव नहीं बन सके है।
यूएनओ का पांचवा महत्वपूर्ण अंग है सामाजिक एवं आर्थिक परिषद (Economic and Social Council)
इसका काम पूरे विश्व में सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना और व्यापार को बढ़ावा देना है। इसके द्वारा अनेक संगठनों की स्थापना की गयी है जैसे कि-
आईएलओ- इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन पूरी दुनिया में श्रमिकों के हित के लिए काम करने वाली संस्था है।
एफएओ - फूड एण्ड एग्रीकल्चर आर्गनाइजेशन जो कि पूरे विश्व में खाद्यान्न व्यवस्था देखती है और जरूरतमंद देशों को भोजन उपलब्ध कराती है। इसका मुख्यालय इटली के रोम में है।
यूनेस्को- (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization) पूरी दुनिया में शिक्षा को बढ़ावा देता है और विज्ञान के क्षेत्र में कलिंग पुरस्कार प्रदान करता है।
यूनीसेफ - (United Nations Children's Fund-UNICEF) बच्चों के हितों पर काम करने वाली  संस्था है।
यूएनओ का छठवां और सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है सुरक्षा परिषद इसे पूरी दुनिया की पुलिस व्यवस्था भी कह सकते है। इसमें कुल 15 सदस्य होते है जिसमें से 5 स्थायी सदस्य होते है जबकि 10 अस्थायी सदस्य जो प्रत्येक दो साल में चयनित होते है।
अस्थायी सदस्यों के चुनाव प्रक्रिया में सबसे पहले सुरक्षा परिषद में देशों का नामांकन होता है फिर उसे महासभा में पारित करने भेजा जाता है। सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य देश है- यूएसए, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस व चाइना। इनके पास वीटो पावर होता है अर्थात ये किसी भी विधेयक को पारित करने या न करने के लिए स्वतंत्र है, यूएनओ के संविधान में स्पष्ट है कि यदि किसी विधेयक को इन पांच देशों में से किसी भी एक देश ने पारित नहीं किया तो वह विधेयक अमान्य हो जाता है। रूस ने अपने वीटो पावर का सर्वाधिक उपयोग किया है। भारत के काश्मीर मसले पर रूस ने वीटो लाकर हमारा साथ दिया है। इससे पूर्व भी 1971 के भारत पाक युद्ध में रूस ने भारत के पक्ष में अपने वीटो पावर का उपयोग किया था। यूएनओ का संविधान कहता है कि कोई भी देश किसी अन्य देश पर कब्जा नहीं कर सकता। उदाहरण जब सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर कब्जा किया तो पूरी दुनिया एकजुट होकर उसे मार गिराया था। 1959 में चीन ने तिब्बत देश पर कब्जा जमा लिया था इस बीच पूरी दुनिया उसका विरोध किया था चूंकि चीन यूएनओ के सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो पावर है इसलिए उसके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हो सकी।
भारत के पास वीटो पावर नहीं है अर्थात वह सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है। किंतु हाल ही में भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के रूप् में 8 वीं बार चुना गया है। 192 वोटों में से भारत को 184 वोट मिले है। इसके पहले भारत वर्ष 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य रह चुका है।
भारत ने यूएनओ के एनपीटी व सीटीबीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया और अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु परीक्षण किया है। किंतु भारत 1945 से यूएनओ का संस्थापक सदस्य रहा है जबकि उस समय तक हमारा देश गुलाम देश था। यूएनओ लोकतंत्र का हिमायती है और भारत पूरे विश्व का सबसे प्रमुख लोकतंत्र देश है। हमारा देश यूएनओ को समय समय पर सेना भी उपलब्ध कराती है, डब्ल्यू एच ओ पोलियो की दवा और अब कोरोना वैक्सीन भी उपलब्ध करा रही है। इधर पाकिस्तान ने काश्मीर मुद्दे को यूएनओ में कई बार उठाया जिसके लिए यूएनओ ने डिक्सन आयोग का गठन किया और आयोग ने जांच कर रिपोर्ट दे दी कि यह भारत पाक का आपसी मामला है जिसका यूएनओ से कोई लेना देना नहीं है। जी-4 देशों जिसमें भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रिका व जापान शामिल है। जिसमें स्थायी सदस्यता के लिए प्रबल दावेदार हमारा भारत है। यूएनओ की अधिकारिक भाषा की बात करें तो इसमें कुल 193 सदस्य देश है जिनकी सितंबर में वार्षिक बैठके होती है किंतु सभी देशों की भाषा को इसमें मान्यता नहीं दी गयी है कुल 6 अधिकारिक भाषाएं है जिसमें अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, रशियन, चाइनीज (मंदारिन) व अरबी है। इसका लिखित कार्य English व French में ही होता है।


अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग (नीदरलैण्ड) 


संयुक्त राष्ट्र संघ का ध्वज



 फूड एण्ड एग्रीकल्चर आर्गनाइजेशन रोम (इटली) 


संयुक्त  राष्ट्र संघ का मुख्यालय न्यूयार्क (अमेरिका)


संयुक्त  राष्ट्र संघ 








वीणा वादिनी मां सरस्वती का प्रकटोत्सव बसंत पंचमी से जीवन में होगा नये उत्साह का संचार ...

 प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था और इस दिन की शुरूआत बसंत पंचमी के दिन से माना जाता है जो कि इस साल 2021 में 16 फरवरी को आया है। अवसर है  फूलों पर बहार आने का, खेतों में सरसों का सोना चमकने का, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने का, आमों के पेड़ों पर बौर आने का और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने का। आज माघ महीने का पाँचवां दिन है जिसे पुराने समय से ही बड़े जश्न के रूप में मनाये जाने की परंपरा रही है। परंपरा अबकी बार भी कायम रहेगी और विद्यादायिनी मां सरस्वती की आराधना होगी। संसार भर के ज्ञान पिपासु मानव प्रजाति चाहे वो किसी भी जाति, धर्म व संप्रदाय से हो सभी पर मां सरस्वती का वरदहस्त बना रहे आप सभी को बसंत पंचमी की मंगलमय शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अपनी बात रखता हूं..

शिक्षक साथियों व स्नेहिल विद्यार्थियों पुराणों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।  

हे वाणी वरदायिनी, करिए हृदय निवास।

नवल सृजन की कामना, यही सृजन की आस।।

 

मात शारदा उर बसो, धरकर सम्यक रूप।

सत्य सृजन करता रहूं, लेकर भाव अनूप।।

 

सरस्वती के नाम से, कलुष भाव हो अंत।

शब्द सृजन होवे सरस, रसना हो रसवंत।।

 

वीणापाणि मां मुझको, दे दो यह वरदान।

कलम सृजन जब भी करे, करे लक्ष्य संधान।।

 

वास करो वागेश्वरी, जिव्हा के आधार।

शब्द सृजन हो जब झरे, विस्मित हो संसार।।

हे भव तारक भारती, वर दे सम्यक ज्ञान।

नित्य सृजन करते हुए, रचे दिव्य अभिधान।।

 

भाव विमल विमला करो, हो निर्मल मति ज्ञान।

निर्विकार होवे सृजन, दो ऐसा वरदान।।

 

विंध्यवासिनी दीजिए, शुभ श्रुति का वरदान।

गुंजित होती दिव्य ध्वनि, सृजन करे रसपान।।

 

महाविद्या सुरपुजिता, अवधि ज्ञानस्वरूप।

लोकानुभूति से सृजन, रचे जगत अनुरूप।।

शुभ्र करो श्वेताम्बरी, मन:पर्यव प्रकाश।

मन शक्ति सामर्थ्य से, सृजन करे आकाश।।

 

शुभदा केवल ज्ञान से, करे जगत कल्याण।।

सृजन करे गति पंचमी, पाए पद निर्वाण।।






अकलतरा संकुल के शिक्षकों का खिलौना शिक्षण शास्त्र पर कार्यशाला संपन्न हुआ...


नई शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण बिंदु खिलौना शिक्षण शास्त्र (टाय पेडागाजी) पर आज 13 फरवरी शनिवार को संकुल केन्द्र अकलतरा में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला संपन्न हुआ। कार्यशाला में राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने प्रोजेक्टर पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 के महत्वूपर्ण बिंदूओं पर प्रकाश डालते हुए स्कूलों में बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध कराने और खेल-खेल में बच्चों को सीखने का अवसर प्रदान करने टाय पेडागाजी के उपायों पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान किया। इस दौरान स्कूल स्तर पर खिलौना बनाने एवं उनके शैक्षिक उपयोग व प्रदर्शनी करने, वर्षों पूर्व किस प्रकार के खिलौनों से खेला जाता था, इसकी जानकारी एकत्र कर उन्हें बनाने, ऐसे खिलौने जिसके माध्यम से विभिन्न विषयों को सीखने में सहयोग मिले, इको फ्रेण्डली खिलौने बनाने, संस्कृति, समाज व इतिहास की जानकारी देने वाले खिलौने, सामाजिक एवं मानव मूल्यों को विकसित करने वाले खिलौने, स्वस्थ रहने, अभ्यास, कसरत एवं खेलकूद का अवसर देने वाले खिलौने, विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के लिए खिलौने तथा मनोरंजन, लाजिकल थिंकिंग एवं रचनात्मक कौशल विकसित करने वाले खिलौने के संबंध में विविध जानकारी प्रदान की गयी। मास्टर ट्रेनर राजेश कुमार सूर्यवंशी ने इसके लिए समुदाय में बड़े-बुजुर्गों से चर्चा करने, स्थानीय कारीगरों से मदद लेने, कबाड़ से जुगाड़ आधारित खिलौने बनाने जैसे मुद्दों पर बातचीत की। कार्यक्रम का संचालन शैक्षिक समन्वयक श्री जयंत सिंह क्षत्रिय ने करते हुए कहा कि इन उपायों के आधार पर आगामी दिनों में संकुल स्तर पर वृहद स्तर पर स्वनिर्मित खिलौनों की प्रदर्शनी रखी जायेगी। एक दिवसीय कार्यशाला में बीआरसीसी अकलतरा श्री शैलेन्द्र सिंह बैस, संकुल प्रभारी श्री वस्त्रराज सिंह चौहान, परसाही सीएसी श्री अमरीश सिंह बैस, वरिष्ठ शिक्षक श्री छेदीलाल शर्मा, श्री असीमधर दीवान जांजगीर, श्रीमती रजनी पाण्डेय, श्रीमती रश्मि दुबे, श्रीमती निर्मला दास, श्रीमती तीरथ बाई, श्रीमती माया शर्मा, श्रीमती खलेश्वरी कश्यप, श्रीमती तारामनी केरकेट्टा, श्री ब्रजकिशोर शर्मा, श्री राजेन्द्र कश्यप, श्री दामोदर चौधरी, श्री विजय कंवर, श्री गोपाल सिंह तंवर, श्री अजय सिंह, श्री विनोद कुमार, श्री गोरेलाल खूंटे, श्री भूपेन्द्र लदेर व श्री अनिल देवांगन सहित संकुल के शिक्षकगण उपस्थित रहे।













माता उन्मुखीकरण व शिक्षिकाओं का संभाग स्तरीय कार्यशाला जांजगीर में संपन्न ...


राजीव गांधी शिक्षा मिशन जिला कार्यालय के नेतृत्व में डाईट जांजगीर में आज 12 फरवरी शुक्रवार को स्कूल रेडिनेश प्रोग्राम के तहत संभाग स्तरीय माता उन्मुखीकरण कार्यशाला व महिला शिक्षिकाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंगना म शिक्षा एक नई पहल के तहत आहूत इस कार्यशाला का उद्देश्य कक्षा पहली व दूसरी में जाने वाले बच्चों के पालकों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम हेतु महिला शिक्षिकाओं को तैयार करना तथा घर पर रहकर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने हेतु माताओं को जागरूक करना रहा।  कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी श्री के.एस.तोमर, डीएमसी श्री ब्राम्हणी, उप प्राचार्य डाइट श्री एल.के.पाण्डेय, साक्षरता मिशन जिला प्रमुख श्री संतोष कश्यप, एपीसी श्री हरिराम जायसवाल ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर किया। अतिथियों का स्वागत सत्कार के बाद कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीईओ श्री तोमर ने कहा कि कोरोनाकाल के बाद छोटे बच्चों में दक्षता लाने यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसमें बच्चों के पालकों को सीखने सिखाने के लिए तैयार किया जायेगा। कार्यक्रम को डीएमसी श्री ब्राम्हणी सहित अतिथियों ने संबोधित कर कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संयोजक एपीसी श्री हरिराम जायसवाल ने बताया कि इसके तहत छोटे बच्चों के माताओं को विशेषकर तैयार किया जायेगा जो घर में शिक्षिका की भूमिका में सीखाने का कार्य करेंगी। कार्यशाला में प्रथम संस्था से पहुंचे प्रशिक्षकों सीमा मिश्रा, सावित्री सेन, श्री साहू व श्री वैष्णव की टीम ने बच्चों के स्तर के सरल गतिविधि आधारित प्रशिक्षण चलाकर स्कूल रेडिनेश प्रोग्राम के महत्व को बताया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने किया। इस अवसर पर श्री योगेश चौहान, श्री कन्हैया साहू, श्री विष्णु कश्यप, श्री प्रवीण कहरा सहित राजीव गांधी शिक्षा मिशन जांजगीर के स्टाफ उपस्थित रहे। एक दिवसीय कार्यशाला में कोरबा, रायगढ़ एवं जांजगीर जिले के 72 शिक्षिकाओं सहित कुल 120 पालक, बच्चे व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सहभागिता किया। कार्यशाला उपरांत प्रशिक्षित शिक्षिकाओं द्वारा अपने विकासखण्ड में पालकों को प्रेरित करने का कार्यक्रम चलाया जायेगा।












राष्ट्रीय आईसीटी अवार्ड के लिए जूरी टीम के समक्ष राजेश सूर्यवंशी ने दिया प्रस्तुतीकरण ...

 
शिक्षा के क्षेत्र में दिये जाने वाले सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक आई.सी.टी. अवार्ड 2018 व 2019 के लिए 5 से 11 फरवरी 2021 तक केन्द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (एन.सी.ई.आर.टी.) में चयन समिति की आनलाईन बैठक आहूत की गयी। जिसमें देशभर के सभी राज्यों से चयनित शिक्षकों ने अपने आईसीटी कार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया। इसी कड़ी में मीटिंग के छठवें दिन 10 फरवरी को जिले के राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने अपने आईसीटी कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। 
इस दौरान शिक्षक राजेश सूर्यवंशी ने ग्रामीण अंचल स्थित जिले का पहला सरकारी डिजिटल विद्यालय के संसाधनों का परिचय देते हुए विद्यालय में अब तक अपने द्वारा किये गये नवाचारी गतिविधियों को क्रमशः प्रस्तुत किया। स्कूल में उपयोग कर रहे आईसीटी हार्डवेयर, साफ्टवेयर के बारे में जानकारी दिया। उन्होंने अपने यू ट्यूब चैनल व ब्लाग सहित आनलाईन कक्षा व गूगल फार्म से ली जाने वाली टेस्ट पेपर व आनलाईन क्विज के बारे में बताया। जूरी टीम को श्री सूर्यवंशी ने बताया कि उनका सरकारी आईसीटी विद्यालय विज्ञान प्रसार संस्थान (विपनेट) से रजिस्टर्ड है। स्कूली बच्चों के अलावा कम्यूनिटि अवेयरनेस के लिए भी काम जारी है। श्री सूर्यवंशी ने बताया कि वेस्ट मटेरियल से टीचिंग लर्निंग मटेरियल तैयार कर ब्लाक, डिस्टीक व स्टेट लेवल पर एजुकेशनल स्टाल लगाकर प्रदर्शनी किया जाता है। एनसीईआरटी दिल्ली में 1 व एससीईआरटी छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 6 बार टीचर ट्रेनिंग लेकर जिला व ब्लाक स्तर पर मास्टर टेªनर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहा हूं। साल 2017 में यूरोप के स्वीडन देश से कुछ सैलानी छत्तीसगढ़ पहुंचे थे जिनके द्वारा हमारे विद्यालय की एक्टिविटि का अवलोकन किया गया था। शिक्षक श्री सूर्यवंशी ने बताया कि सभी आनलाईन कोर्सेस मे मैं पार्टिसिपेट कर रहा हूं निष्ठा, दीक्षा, स्वयं पोर्टल, द टीचर एप्प, क्विज माई गव डाट इन, न्यूपा, चाक लिट आदि के माध्यम से 100 से भी अधिक आनलाईन कोर्स अब तक पूर्ण कर चुका हूं।  
 देश के सभी राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों से चयनित शिक्षकों ने लिया हिस्सा
गौरतलब हो कि कोरोना काल की वजह से यह कार्यक्रम 5 से 10 फरवरी 2021 तक आनलाईन प्लेटफार्म जूम मीटिंग एप्प पर आहूत किया गया। जूरी मीटिंग के प्रथम दिवस 5 फरवरी को आन्ध्रा प्रदेश, गुजरात व हरियाणा। द्वितीय दिवस 6 फरवरी को तेलांगना, उत्तराखण्ड, पंजाब व बिहार। तृतीय दिवस 7 फरवरी को तमिलनाडु, असम व कर्नाटक। चतुर्थ दिवस 8 फरवरी को महाराष्ट, मिजोरम, झारखण्ड, जम्मू काश्मीर, मेघालय व मध्यप्रदेश। पंचम दिवस 9 फरवरी को उड़ीसा, पांडुचेरी, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गोवा व मणिपुर, षष्ठम दिवस 10 फरवरी को अण्डमान व निकोबार द्वीप, केरल, छत्तीसगढ़ तथा अंतिम दिवस 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश, दिल्ली व त्रिपुरा से कुल 280 चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने आईसीटी कार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया।

                                                                            चयन सूची   











कार्यक्रम शेड्यूल


         

लोकमाया अखबार 12 फरवरी 2021 


नवभारत अखबार 11 फरवरी 2021  


पायोनियर अखबार 12 फरवरी 2021




कोरोना काल में विद्यार्थियों में दक्षता विकास व उपचारात्मक शिक्षण का मुख्य आधार है चर्चा पत्र- राजेश सूर्यवंशी


कोरोना काल में जब विद्यालय मार्च 2020 से बंद है और डिजिटल प्लेटफार्म सहित पारा मोहल्ला व अन्य वैकल्पिक उपायों से अध्यापन जारी है। ऐसे में विद्यार्थियों को आगे की कक्षा में पहुंचाने के पूर्व उनमें अपेक्षित दक्षता का विकास एवं उपचारात्मक शिक्षण के लिए राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के सहायक संचालक डा.एम. सुधीश के मार्गदर्शन में जारी मासिक पत्रिका चर्चा पत्र प्रमुख आधार है। इसमें दिए गये उपायों को शिक्षक अपने विद्यार्थियों में करते हुए अपेक्षित दक्षता विकास कर सकते है। शिक्षक स्वयं को सीखने के लिए लगातार प्रेरित भी करते रहे इसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर वेबीनार का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विविध शैक्षणिक गतिविधियों पर चर्चा होती है, इसमें सहभागिता करने की जरूरत है।
चर्चा पत्र को नियमित रूप से अध्ययन कर विविध शैक्षणिक गतिविधियां संपादित करने वाले राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी कहते है कि कोरोना की वजह से लाकडाउन के दौरान बच्चों का सीखना जारी रखने हेतु जांजगीर-चांपा जिले के लगभग सभी विकासखण्डों में उत्साही शिक्षकों द्वारा विभिन्न वैकल्पिक माध्यमों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे कार्यों को विभागीय स्तर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पढ़ई तुहर दुआर वेबसाईट में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को विभागीय अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित डिजिटल सर्टिफिकेट से सम्मानित करने का क्रम जारी है। विगत साल भर से हो रही गतिविधियों का अब आंकलन करने का समय आ रहा है। प्रत्येक शिक्षक की यह जिम्मेदारी है कि कक्षा उन्नति के पूर्व उनके बच्चों में आवश्यक दक्षताओं का विकास हो सके। इसके लिए आंकलन करना उनका सत्यापन करना और यदि विद्यार्थी में आंकलन उपरांत अपेक्षित दक्षता का विकास नहीं हो पाया तो प्रत्येक विद्यार्थी में छूट रही दक्षताओं की पहचान कर उसे उपचारात्मक शिक्षण देना हमारी जिम्मेदारी है। इस कार्य को सही तरीके से करने के लिए चर्चा पत्र बहुत महत्वपूर्ण साधन है जिसमें बिंदुवार कार्य योजना दी जा रही है। 
चर्चा पत्र के संदर्भ में शिक्षक राजेश सूर्यवंशी बताते है कि संकुलों में शिक्षकों के साथ चर्चा पत्रों का नियमित वाचन, चर्चा एवं शालाओं में उसका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन किया जाये। अब नवगठित संकुलों में बहुत कम संख्या में स्कूल बचे हैं अतः अकादमिक गुणवत्ता संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए और उपचारात्मक शिक्षण सही सही होना चाहिए यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने चर्चा पत्र में दिए गये बिंदूओं का उल्लेख करते हुए बताया कि-
1. प्रमुख सचिव महोदय द्वारा सभी स्तर पर अधिकारियों द्वारा लगातार मानिटरिंग की व्यवस्था जारी रखने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारी अपने क्षेत्र के शत-प्रतिशत बच्चों एवं शत-प्रतिशत शिक्षकों के माध्यम से बच्चों का विभिन्न नवाचारी तरीकों से सीखना जारी रखवाएंगे।
2. संकुल समन्वयक अपनी नई भूमिका में अपने पदस्थ शाला में संकुल की अन्य बच्चों की उपलब्धि एवं शासन की गुणवत्ता संबंधी विभिन्न योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करते हुए आदर्श प्रस्तुत कर अन्य शालाओं के लिए प्रेरक शाला के रूप में कार्य करेंगे। इस हेतु उन्हें अपनी शाला में अधिक समय देना होगा और अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों की उपलब्धि में फोकस कर कार्य करना होगा। 
3. प्राचार्य, शाला संकुल के अनुमोदन से नव-गठित संकुल समन्वयक अपने संकुल की शालावार अकादमिक समर्थन देने हेतु टूर प्लान बनाएंगे एवं उस दिन पूरे समय उन स्कूल में रहकर कक्षा अध्यापन एवं अन्य कार्यों में सहयोग करेंगे। 
4. पूर्व की भांति संकुल समन्वयकों को उच्च कार्यालयों में विभिन्न प्रशासकीय कार्यों एवं सूचनाएं पहुँचाने के उद्देश्य से बिलकुल भी नहीं बुलाया जाएगा। 
5. प्रमुख सचिव महोदय के निर्देशानुसार ये स्पष्ट रूप से समग्र शिक्षा से संबंधित विभिन्न अकादमिक गुणवत्ता संबंधी कार्यों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए पूर्णतः जिम्मेदार होंगे। अतः इस स्ट्रक्चर से अब किसी भी तरह से अन्य प्रशासकीय कार्यों एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु उपयोग में कदापि नहीं लाया जाए। 
6. प्राचार्य, शाला संकुल इन संकुल समन्वयकों से उनके क्षेत्र में अकादमिक गुणवत्ता लाए जाने में सहयोग के लिए पूर्णतः उत्तरदाई होंगे एवं उनके स्तर तक आने वाले विद्यार्थियों में उनकी कक्षा अनुरूप सभी लर्निंग आउटकम अच्छे से हासिल हो जाए, इस एक उद्देश्य को लेकर कार्य करेंगे ताकि निचली स्तर से आशातीत गुणवत्ता हासिल किए बिना बच्चे अगली कक्षा में चले जाते हैं इसका आरोप एक दूसरे पर लगाने का अवसर नहीं मिले क्योंकि शाला संकुल व्यवस्था में पूर्व प्राथमिक से हायर सेकन्डरी तक बच्चों की उपलब्धि में सतत सुधार की समस्त जिम्मेदारी अब शाला संकुल प्राचार्य की होगी। 
7. समस्त संकुल शैक्षिक समन्वयकों को शाला संकुल योजना के अंतर्गत स्वयं शिक्षण कार्य के अनुभव को वापस लाने के उद्देश्य से कक्षा तीसरी से पांचवी तक के बच्चों का चयन कर उनके साथ निर्धारित समय सीमा तक कार्य करते हुए उनका बेसलाइन एवं एंडलाइन साझा करना है। यह सुनिश्चित करें कि यह जानकारी सही सही भरी जाए क्योंकि इस अनुभव के आधार पर आपको जब अपने शिक्षकों को प्रशिक्षण देना होगा तभी आपको इन बच्चों के साथ कार्य करते हुए शिक्षकों को इन बच्चों की उपलब्धि का आकलन करने का अवसर देना होगा अजो इस दौरान आपके द्वारा प्रमाणित दक्षताओं की प्राप्ति की जानकारी की इस दौरान जांच कर सकेंगे।
8. संकुल समन्वयक अपने संकुल की कमजोर परिणाम देने वाली शालाओं में अधिक समय देते हुए वहां के शिक्षकों के साथ मिलकर उसे सुधारने हेतु अतिरिक्त प्रयास करेंगे। हाई एवं हायर सेकन्डरी के विषय विशषज्ञों के सहयोग से भी विभिन्न विषयों में शिक्षकों का क्षमता विकास किया जा सकेगा।
9. सभी शिक्षक चर्चा पत्र सीधे cgschool.in वेबसाईट से डाऊनलोड कर सकेंगे। अब उन्हें चर्चा पत्र का आडियो फोर्मेट भी पोडकास्ट के रूप में मिल सकेगा। संकुल के प्रत्येक शिक्षक को चर्चा पत्र का उपयोग कर अकादमिक चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता लेनी होगी एवं विभिन्न स्तरों पर अधिकारी गण भी आगे से इसे पढ़कर जिले की शालाओं में एजेंडावार बिन्दुओं को समस्त शालाओं में अनिवार्यत लागू करेंगे। 
10. प्रमुख सचिव महोदय शीघ्र ही शाला संकुल प्राचार्य एवं समस्त संबंधित अमले के साथ शाला संकुल के माध्यम से अकादमिक गुणवत्ता लाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत होने एक वेबीनार लेंगे। तब तक सभी शाला संकुल प्राचार्य अपने यहाँ सभी निर्धारित कार्यों को प्रारंभ करते हुए गुणवत्ता सुधार की दिशा में कार्य जारी रखेंगे।





नवभारत दिनांक 08.02.2021


लोकसदन अखबार 09 फरवरी 2021


इस्पात टाईम्स अखबार 10 फरवरी 2021






 

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