The Digital Teacher

प्राथमिक पी.एल.सी. अभ्यास पुस्तिका “हमर नवागढ़“ का हुआ विमोचन ...


 

समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत प्राथमिक स्तर के बच्चों के मुलभूत दक्षताओं के विकास हेतु नवागढ़ विकासखण्ड स्तरीय प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटि द्वारा तैयार अभ्यास सामग्री एवं बिग बुक पुस्तिका “हमर नवागढ़“ का विमोचन दिनांक 27 जनवरी 2021 को जांजगीर स्थित अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन में एक गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी श्री के.एस.तोमर सहित डीएमसी श्री ब्राम्हणी, एपीसी श्री हरिराम जायसवाल, डाइट सदस्य श्री गोपेश साहू रहे। विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए डीईओ श्री तोमर ने कहा कि कोरोना काल में हमर नवागढ़ शीर्षक से तैयार यह अभ्यास पुस्तिका बच्चों के दक्षता विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने पूरी टीम की मेहनत व लगन की तारिफ करते हुए इसे शत प्रतिशत स्कूलों में पहुंचाने की बात कही। डीएमसी श्री ब्राम्हणी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में ब्लाक में संकुलों की संख्या 18 से बढ़कर 42 हो गयी है, ऐसे में नयी जिम्मेदारी के साथ और बेहतर काम करने में यह अभ्यास पुस्तिका महत्वपूर्ण होगी। अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के मुखिया श्री सुभाष गोस्वामी ने पुस्तिका की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम को श्री गोपेश साहू वश्री  हरिराम जायसवाल ने भी संबोधित करते हुए पुस्तिका की सराहना करते हुए इसे कोरोना काल में बहुत उपयोगी बताया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना से हुआ जिसके बाद सभी अतिथियों का बुके, फूलमाला, शाल व श्रीफल से सम्मान किया गया। स्वागत भाषण बीईओ श्री विजय कुमार लहरे ने दिया जबकि आभार प्रदर्शन एबीईओ श्री तरूण साहू ने किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए नवाचारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी ने विमोचित पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बीआरसीसी श्रीमती रिषिकांता राठौर के कुशल नेतृत्व में 172 पृष्ठों वाली रंगीन पुस्तक में प्राथमिक कक्षा के हिंदी, गणित, अंग्रेजी व पर्यावरण से संबंधित अभ्यास कार्य सहित मनोरंजनात्मक कहानी, कविता शिक्षकों के द्वारा तैयार की गयी है जिसे ब्लाक के सभी 199 प्राथमिक शालाओं में वितरित करने की योजना है। इस दौरान बीआरसीसी श्रीमती रिषीकांता राठौर के सौजन्य से बीईओ श्री लहरे, एबीईओ श्री राजीव नयन शर्मा, श्री तरूण कुमार साहू, श्री संजय देवांगन, श्री इन्द्रमणि सिंह सहित नवाचारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी, पीएलसी सदस्य शीला शर्मा, शैक्षिक समन्वयक श्री बलराम जलतारे का शाल व श्रीफल से डीईओ श्री तोमर के हाथों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शैक्षिक समन्वयक श्री जी.आर.कर्ष, श्री विनोद पाण्डेय, श्री अनिल शर्मा, श्री पुरूषोत्तम साहू, श्री लक्ष्मीचंद देवांगन, श्री गुरूबचन सिंह जाटवर, श्री गिरधर निराला, श्री दिलीप साहू, श्री दिनेश शुक्ला, श्री रामकिशोर साहू, श्री उत्तरा आजाद, श्री रविकांत साव, पी.एल.सी. सदस्यगण शीला शर्मा, शालिनी शर्मा, श्री पी.के. बंजारा, श्री डाली गोपाल, योगेश्वरी तंबोली, चंद्रिका भवानी, ज्योति भारद्वाज, श्री युगल किशोर, सीमा सेमरे, श्री रामनारायण मांझी सहित श्री रामकृष्ण कटकवार, श्री राज सिदार, श्री सौरभ, लेखापाल श्री साहू आदि उपस्थित रहे।






















 

 

विभागीय कार्यों को गति देने अमोदा संकुल के प्रधान पाठकों व शिक्षकों की हुई बैठक ....


आज 12 अक्टूबर 2020 सोमवार को जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लाक के संकुल केन्द्र अमोदा में संकुल अंतर्गत आने वाले समस्त शासकीय प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई व हायर सेकेण्डरी विद्यालयों के प्रधान पाठकों, प्राचार्यों व शिक्षकों की बैठक आहूत की गयी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आयोजित बैठक में इंस्पायर अवार्ड योजना, मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन वितरण, आनलाईन व आफलाईन कक्षाएं आयोजित करने, पढ़ई तुहर दुआर वेबसाईट में बच्चों का असेसमेंट करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदूओं पर चर्चा की गयी। बैठक में नवाचारी शिक्षक व प्रशिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने आनलाईन/आफलाईन असेसमेंट की प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि सभी बच्चों का वेबसाईट में विवरण दर्ज करना होगा जिसके बाद विषवार दक्षताओं का आंकलन करना होगा। यह कार्य अत्यंत अनिवार्य है जिसे जल्द से जल्द पूर्ण करना होगा। उन्होंने कहा कि इंस्पायर अवार्ड के तहत प्रत्येक स्कूलों से 5 बच्चों का नामांकन अनिवार्य किया गया है जिसे समय सीमा में पूर्ण करें। इसके अलावा प्रतिदिन आनलाईन कक्षा लेने के लिए प्रेरित किया गया। शैक्षिक समन्वयक श्री अनिल कुमार पाण्डेय ने कहा कि सभी प्रधान पाठक मोबाईल पर भेजे जा रहे सूचना संदेश को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयीन कार्यों को समय सीमा में संपादित करें। बैठक में शैक्षिक समन्वयक श्री अनिल कुमार पाण्डेय, श्री राजेन्द्र यादव शास.प्राथ.शाला अकलतरी, श्री प्रमोद कुमार साहू प्रधान पाठक शास.प्राथ.शाला गाड़ापाली, श्री धनंजय शुक्ला पूर्व माध्य. शाला गौद, श्री प्रमोद कुमार हंसराज प्रधान पाठक पूर्व माध्य. शाला भादा, श्रीमती ज्योति तंबोली पूर्व माध्य. शाला मौहाडीह, श्री डेमन पाण्डेय पूर्व माध्य. शाला मौहाडीह, श्री लीलाधर साहू शास.जन. प्राथ.शाला अमोदा, श्री गमेन्द्र भारद्वाज शास.प्राथ.शाला अकलतरी, श्री अश्वनी यादव शास.जन. प्राथ.शाला अमोदा, श्री सोनाउराम मांझी शास.प्राथ.शाला केवा, श्रीमती लक्ष्मीन कंवर शास.नवीन प्राथ.शाला अमोदा, श्री चिंतामणी साहू शास.नवीन प्राथ.शाला भैसदा, श्री अनिल देवांगन शास.पूर्व माध्य.शाला पीथमपुर, श्रीमती कांता तिग्गा शास.प्राथ.शाला गौद, श्री विशाल शर्मा शास.जन. प्राथ.शाला पीथमपुर, श्री कन्हैया लाल मरावी शास. पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा), संतोष श्रीवास शास. पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा), श्री हीरालाल कर्ष शास. पूर्व माध्य. शाला नवापारा (अमोदा), श्रीमती रूकमणि डहरिया पूर्व माध्य. शाला पीथमपुर, श्री शिवमणि कश्यप प्राथ. शाला अमोदा, श्री विद्यानंद राठौर शास. नवीन प्राथ. शाला भैसदा, श्री उमाशंकर सूर्यवंशी पूर्व माध्य. शाला अमोदा, श्री सुभाषचंद्र बिंझवार प्राथ.शाला भादा सहित संकुल के शिक्षकगण उपस्थित रहे।







सामयिक चुनौतियां बनाम गाधी दर्शन


समस्त मानव समाज आज जिस त्रासदी से गुजर रहा है और प्रत्येक क्षण भय व किसी अनहोनी से आशंकित हो रहा है वह कही न कही हमारे द्वारा प्रकृति के साथ की गयी हिंसात्मक बर्ताव, लोलुपता और भोग लिप्सा की प्रवृत्ति का ही एक परिणाम है। ऐसे समय में जरूरत है हम मानव समाज को गांधी दर्शन को समझने व अपनाने का क्योंकि गांधी दर्शन में प्रकृति उपभोग की वस्तु नहीं है बल्कि मनुष्य और प्रकृति एक दूसरे की देखभाल करते हुए आगे बढ़ने का नाम है। गांधी दर्शन में मनुष्य व प्रकृति एक अविभाज्य अंग है। आज हम सब कोरोना संकट की त्रासदी से गुजर रहे है जहां हमारी संपत्ति, हमारा पद प्रतिष्ठा सब कुछ धरा रह जा रहा है। ऐसे में हमें विकास की गांधीवादी दर्शन की अवधारणा पर पुनर्विचार करना होगा तब हम समाज में असमानता की बढ़ती खाई, नष्ट होते पर्यावरण, अनिश्चित होते आर्थिक जीवन और तकनीकी द्वारा अपहृत होती निजता की समस्या का हल पा सकेंगे। आज सामयिक चुनौतियों के बीच महात्मा गांधी का जीवन दर्शन एक आशा की किरण की भांति नजर आ रहा है।
हम कोरोना जैसे वैश्विक महामारी से घिर चुके है ऐसे में हमारी जीवनचर्या प्रभावित हो चली है हमारा रहन सहन पूरी तरह से बदल चुका है और यह सब आधुनिक सभ्यता की देन है। हम सब जानते है कि आधुनिक सभ्यता की आलोचना जितनी समग्रता से गांधी जी ने की है वह विचारणीय है। उनका प्रत्येक विचार तर्क और आचरण की कसौटी पर कसा हुआ है जिसे आत्मसात कर हम बहुत सारी समस्याओं से निजात पा सकते है। इस वर्ष हम महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने जा रहे है। गांधी जी के आर्थिक दर्शन का मूल मंत्र था अपनी जरूरत के मुताबिक उत्पादन करना, आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना, लोभ न करना, यदि आप के पास अधिक धन संपत्ति है तो यह समझना कि परमात्मा द्वारा प्रदत्त दौलत के आप मालिक नहीं हैं, अपितु एक ट्रस्टी हैं। और परमात्मा की इस दौलत का जनकल्याण के लिए अधिकतम उपयोग करने की जिम्मेदारी आप पर है किंतु वर्तमान में यह केवल एक सिद्धांत बनकर रह गया है प्रत्येक इंसान जरूरत से अधिक धन का अर्जन संग्रहण कर रहा है और जनकल्याण के लिए चंद हाथ ही आगे बढ़ रहे है। ऐसे में हमें गांधी के आर्थिक दर्शन को आत्मसात करने की जरूरत है।  गांधी जी लिखते हैं- मेरी राय में भारत की- न सिर्फ भारत की बल्कि की सारी दुनिया की अर्थ रचना ऐसी होनी चाहिए कि किसी को भी अन्न और वस्त्र के अभाव की तकलीफ ना सहनी पड़े। दूसरे शब्दों में हर एक को इतना काम अवश्य मिल जाना चाहिए कि वह अपने खाने पहनने की जरूरत पूरी कर सके। वर्तमान में हमारा देश बेरोजगारी से जूझ रहा है धन का असमान वितरण समाज में अपराध को जन्म दे रहा है। किंतु गांधी दर्शन को अपनाकर हम इन समस्याओं से निजात पा सकते है। सामाजिक समता की स्थापना के लिए विकेन्द्रीकृत शासन व्यवस्था को गांधी जी आवश्यक मानते थे। उनके अनुसार ऐसा ही विकेंद्रीकरण देश के आर्थिक जीवन में भी होना चाहिए। वे बड़े बड़े कल कारखानों की स्थापना के विरुद्ध थे। उनके विकेंद्रीकरण के सिद्धांत का विस्तार यदि पर्यावरण के क्षेत्र में करें तो विशाल बांधों की स्थापना के बजाए छोटे छोटे स्टॉप डैम्स की स्थापना और तालाबों के संरक्षण तथा संवर्धन का सिद्धांत सामने आता है। ग्राम स्वराज्य की अवधारणा पर्यावरण मित्र जीवन शैली की आदर्श अवस्था को दर्शाती है। किंतु वर्तमान स्थिति इसके विपरित है बड़े कारखानों से निकलते जहरीले धुएं और कटती हरियाली मन को व्यथित करती है। ऐसे विकास जो चंद पूंजीपतियों के हित में है और करोड़ों मानव प्रकृति के विनाश से व्यथित हो रहे है। कोरोना काल में इस तरह के विकास मानव जीवन बचाने में नाकाम हो रही है। गांधी जी की ग्राम स्वराज्य की कल्पना अनुसार कोई भी गांव अपनी अहम जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं होगा वह अपनी जरूरत का तमाम अनाज और कपड़े के लिए कपास खुद पैदा करेगा जहां गाय, भैस, बकरी स्वतंत्रता पूर्वक चर सकें और गांव के बड़ों व बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन और खेलकूद के मैदान उपलब्ध हो किंतु स्थिति आज ऐसी नहीं है हमें गांधी दर्शन को आत्मसात करने की नितांत आवश्यकता है। इसे अपनाकर बहुत हद तक बेरोजगारी की समस्या से उपर उठ सकते है। आज समाज का प्रत्येक व्यक्ति जिसके पास थोड़ा सा भी खाली जमीन है उसमें वह चाहे तो उपयोगी फसलें उगाकर व उन्हें बेचकर आर्थिक लाभ उठा सकता है। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा अपितु जमीन का सदुपयोग होगा और सेहत भी बना रहेगा जिससे कोरोना जैसे बीमारी से लड़ने हमें आंतरिक बल मिलेगा। आज प्रकृति का दोहन केवल मानव समाज ही कर रहा है जबकि यह समस्त जीव जंतुओं के अधिकार क्षेत्र में है। लाकडाउन में पूरी पृथ्वी जिस तेजी से स्वच्छ हुआ है उससे हमें सीखने की जरूरत है। आज प्रकृति पहले की अपेक्षा ज्यादा तरोताजा है। पक्षियों का चहचहाना मन को कही अधिक सुकून दे रही है बस जरूरत है इस सुकून को बनाये रखने का। आज पूरे देश में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण विभिन्न संस्थान व फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और इस आपदा में उपेक्षित होने के कारण वहां काम करने वाले मजदूरों के पास इस कठिन समय में घर लौटने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. तो, बड़ी समस्या यह है कि क्या लॉकडाउन खुलने के बाद जब स्थितियां सामान्य हो जाएंगी तो क्या यह डरा-सहमा मजदूर दोबारा उन फैक्ट्री तक जाने की हिम्मत भी जुटा पाएगा। ऐसे में जरूरत है गांधी दर्शन अनुसार अपने गांव में रहकर स्वरोजगार की ओर उन्मुख होने की। आज हम शहरों की चकाचैंध में खो चुके है, आधुनिकता जीवन शैली हमारे स्वास्थ्य पर विपरित असर डाल रही है, गांधीवादी दर्शन इन समस्याओं का समाधान है यह सत्य कथन है कि यदि ग्राम उद्योगों का लोप हो गया तो भारत के लाखों गांवों का सर्वनाश ही समझिए। हमें गांवों की ओर लौटने की जरूरत है। स्वस्थ्य दिनचर्या का पालन करके हम कई तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते है। गांधी जी का आर्थिक और राजनीतिक दर्शन भी अहिंसा की ही बुनियाद पर टिका हुआ है। मुनाफे और धन पर अनुचित अधिकार से आर्थिक हिंसा उत्पन्न होती है। ऐसे में हमें सामयिक चुनौतियों से गांधी दर्शन को आत्मसात कर निपट सकते है। महात्मा गांधी ने अपने समय के वैज्ञानिकों, विचारकों, लेखकों, चित्रकारों और संगीतकारों की रचनाशीलता को बहुत गहराई से प्रभावित किया था। आइजक न्यूटन के बाद वैज्ञानिक चिंतन को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले अल्बर्ट आइंस्टाइन ने उनके बारे में कहा था कि आने वाली पीढ़ियां कठिनाई से ही विश्वास कर पाएंगी कि इस पृथ्वी पर हाड़-मांस का कोई ऐसा आदमी भी चलता-फिरता था। उर्दू के प्रसिद्ध शायर अकबर इलाहाबादी तो अपने जीवन के अंतिम वर्षों में गांधी के बहुत बड़े प्रशंसक बन गए थे। महान सितारवादक रविशंकर ने महात्मा गांधी पर एक नया राग की रचना किया था, महात्मा का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, उन्होंने इस राग को  ‘मोहनकौंस’ का नाम दिया। रिचर्ड एटेनबरो की महाकाव्यात्मक फिल्म गांधी तो अब इतिहास में दर्ज हो ही चुकी है। इसे ग्यारह ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया जिसमें से आठ इसे मिले। किंतु दुर्भाग्य है कि आज के , विचारकों, लेखकों, चित्रकारों और संगीतकारों को यह सब सामान्य बात प्रतीत होता है, आज जरूरत है हम सबको गांधी दर्शन को आत्मसात करने उसके बताये मार्गों पर चलने कि ताकि सामयिक समस्याओं से निजात पा सके और एक स्वस्थ्य सुंदर समाज की रचना कर सके। 


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150 वीं जयंती पर राज्य स्तरीय आनलाईन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में हिस्सा ले और पाये जिला शिक्षा अधिकारी सहित विभागीय अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र ....

आयोजक- टीम पढ़ई तुहर दुआर जांजगीर-चांपा (छ.ग.)

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए नीचे दिए लिंक पर जाये –

 https://forms.gle/dDFc8VmquTjx58BS8


दैनिक भास्कर 

हरिभूमि 


 लोकमाया


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पारा मोहल्ला स्कूल सेंदरी में ग्रामीणों व शिक्षकों ने धूमधाम से मनाया शिक्षक दिवस ...


आज 5 सितंबर 2020 शनिवार को नवागढ़ ब्लाक के संकुल केन्द्र धनेली अंतर्गत ग्राम पंचायत सेंदरी में चल रहे पारा मोहल्ला स्कूल में शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया। समुदाय के सहयोग से शास.प्राथ. शाला सेंदरी के शिक्षक दंपत्ति नवाचारी शिक्षक श्री मनोज कुमार पटेल व सहयोगी श्रीमती शकुंतला पटेल द्वारा संचालित पारा मोहल्ला स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित समस्त शिक्षकों को श्रीफल, डायरी, कलम, सैनिटाइजर, मास्क आदि द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक श्री राजेश कुमार सूर्यवंशी रहे। अन्य अतिथियों में ग्राम पंचायत सेंदरी के सरपंच श्रीमती उर्मिला पटेल, जनपद सदस्य श्रीमती फूलमत खरे, शैक्षिक समन्वयक धनेली श्री पुरूषोत्तम लाल साहू, शैक्षिक समन्वयक अमोदा श्री अनिल कुमार पाण्डेय रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती व सर्वपल्ली डा.राधाकृष्णन के छायाचित्र पर धूप दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इसके बाद सभी उपस्थित शिक्षकों व अतिथियों का स्वागत सत्कार किया गया। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि शिक्षक श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि महान विभूति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनुकरणीय कार्यों को स्मरण करते हुए सारा देश आज शिक्षक दिवस मना रहा है। उन्होंने देश में शिक्षा के विकास के लिए जो योगदान दिया, वह अमूल्य है। पर अब की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए समय के साथ हमें अपने पढ़ने पढ़ाने की गतिविधियों में बदलाव लाने की जरूरत है। श्री सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षकीय जीवन पेशे और आजीविका से बढ़कर एक सेवा और साधना है। उन्होंने पटेल शिक्षक दंपत्ति द्वारा गांव में चला रहे पारा मोहल्ला स्कूल व उनके कार्यों की सराहना करते हुए ग्रामवासियों से बेहतर सहयोग की अपील की। कार्यक्रम को पूर्व सरपंच सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नवाचारी शिक्षक श्री मनोज कुमार पटेल व आभार प्रदर्शन शिक्षिका श्रीमती शकुंतला पटेल ने किया। इस अवसर पर शास. पूर्व माध्य.शाला सेंदरी से शिक्षक श्री उमेश राठौर, श्री हरनारायण साहू, श्री उमेश दुबे, श्रीमती ज्ञानेश्वरी भैना, प्राथ.शाला सेंदरी से श्री सनद पाण्डेय, श्रीमती कमलेश्वरी पाण्डेय, श्वेता शर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थीगण व ग्रामीणजन उपस्थित रहे। 




समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें ...




न्यूज चैनल में प्रसारित खबर लिंक को टच करके देखे...





बदलते परिवेश के साथ शिक्षकों में भी बदलाव की अपेक्षा कर रहा समाज- राजेश सूर्यवंशी

 
(शिक्षक दिवस, 5 सितंबर पर विशेष)


भारतवर्ष की प्राचीन संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा रहा है गुरू शिष्य की परंपरा। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, किंतु माता पिता के बाद गुरू का स्थान भी भविष्य तक कोई नहीं ले सकता। जीवन जीने का असली सलीका हमें शिक्षक ही सिखाते हैं। सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के वर्ष 1962 से प्रतिवर्ष 5 सितंबर के दिन देशभर में शिक्षकों के लिए विविध आयोजन किया जाता है। किंतु इस बार परिवेश बदल चुका है, विद्यालय के द्वार बंद है, शिक्षक बच्चों तक पहुंचने लालयित है ऐसे में हमारा समाज शिक्षकों से अपेक्षा कर रहा है व्यापक व सकारात्मक बदलाव की, आज शिक्षा को हर घर तक पहुंचाने के लिए तमाम सरकारी व मानवीय प्रयास किए जा रहे हैं।


 शिक्षक का हर किसी के जीवन में बहुत महत्व होता है। समुदाय में भी उनका अपना एक विशिष्ट स्थान होता है। शिक्षक समाज के ऐसे शिल्पकार होते हैं जो बिना किसी मोह के इस समाज को तराशते हैं। शिक्षक का काम सिर्फ किताबी ज्ञान देना ही नहीं बल्कि सामाजिक परिस्थितियों से छात्रों को परिचित कराना भी होता है। शिक्षकों की इसी महत्ता को सही स्थान दिलाने के लिए ही हमारे देश में सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पुरजोर कोशिशें की, जो खुद एक बेहतरीन शिक्षक थे। सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे। वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे।  


एक अच्छा शिक्षक परिस्थितियों पर नियंत्रण रखते हुए बच्चों की योग्यता, विशेष योग्यता और उनकी कमियों पर भी नजर रखता है, उनकी कला को निखारने का प्रयास करता है। किंतु आज शिक्षक अपने ज्ञान की बोली लगाने लगे हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो गुरु-शिष्य की परंपरा कहीं न कहीं कलंकित हो रही है। आए दिन शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों एवं विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ अपमान की खबरें सुनने को मिलती हैं। विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों का ही दायित्व है कि वे इस महान परंपरा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें। शिक्षकों को भी वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं। एक गुरु ही शिष्य में अच्छे चरित्र का निर्माण करता है।
कबीरदास जी ने भी कहा है- 
सब धरती कागज करूं,
लिखनी सब बनराय।
सात समुन्दर की मसि करूं,
गुरु गुण लिखा न जाय।।
तात्पर्य है कि सब पृथ्वी को कागज, सब जंगल को कलम, सातों समंदर को स्याही बनाकर लिखने पर भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते।


भूतपूर्व राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन की जन्म दिवस पर मनाते है शिक्षक दिवस
वे भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (1952-1962) और द्वितीय राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। उनका जन्मदिन 5 सितम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरूतनी ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम वीरास्वामी तथा माता का नाम सीताम्मा था। राधाकृष्णन के पुरखे पहले कभी सर्वपल्ली नामक ग्राम में रहते थे जिससे वे आजीवन अपने नाम के साथ सर्वपल्ली लिखते रहे। उनकी जीवनी उपलब्धियों से भरी पड़ी हुई है जहां सन् 1939 से 48 तक काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के चांसलर रहे। 1953 से 1962 तक दिल्ली विश्व विद्यालय के चांसलर रहे। वर्ष 1918 में वे मैसुर महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। सन् 1931 से 36 तक आन्ध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे और 1936 से 1952 तक ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे। 1946 में युनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। स्वतन्त्रता के बाद इन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। वे 1947 से 1949 तक इसके सदस्य रहे। उन्हें 1931 में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सर की उपाधि प्रदान की गयी थी। जब वे उपराष्ट्रपति बन गये तो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1954 में उन्हें उनकी महान दार्शनिक व शैक्षिक उपलब्धियों के लिये देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न प्रदान किया था। शिक्षक दिवस सभी देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है। भारत में शिक्षक 5 सितंबर को मनाया जाता है जबकि विश्व शिक्षक दिवस दिनांक 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर


शिक्षक दिवस पर आनलाईन क्विज प्रतियोगिता

दैनिक नवभारत 

दैनिक भास्कर

  पत्रिका

नई दुनिया




आज 5 सितंबर 2020 शिक्षक दिवस की सभी साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं, आज सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन का जन्म दिवस है, आईए उनके जन्म दिवस पर उनकी जीवनी पर आधारित एक आनलाईन क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करें। क्विज में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक अर्जित करने वाले प्रतिभागी को उनके ई-मेल पर एक प्रिंटेड सर्टिफिकेट प्राप्त होगा। क्विज करने की अंतिम तिथि 8 सितंबर 2020 की शाम 5 बजे तक है।

क्विज करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाये –

https://forms.gle/cBLJoX2tG1hyLYhH9


डिजिटल स्कूल में दीक्षांत समारोह के साथ परीक्षाफल की घोषणा, बच्चों को बांटे गये अंकसूची...

नवागढ़ ब्लाक के शास.पूर्व माध्य.शाला नवापारा (अमोदा) में शिक्षा सत्र के अंतिम दिवस आज 29 अप्रैल शनिवार को प्रगति पत्रक वितरण सह दीक्षांत समार...