The Digital Teacher : May 2020

आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 3 सिंधु घाटी सभ्यता




स्नेही विद्यार्थियों व शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,

कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय  3 सिंधु घाटी सभ्यता को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में 20 प्रश्नों का क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद






(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. सिंधु सभ्यता में मानव नदियों किनारे बसना चाहते थे क्योंकि वहां उन्हें खेती के लिए उपजाउ मिट्टी व पर्याप्त पानी मिलता था।

2. आज से लगभग 4500 साल पहले सिंधु नदी के मैदान में जो सभ्यता विकसित हुई वह सिंधु घाटी की सभ्यता कहलाती है।

3. सिंधु घाटी की सभ्यता के दो प्रमुख शहर हड़प्पा और मोहनजोदड़ों थे।

4. सन् 1921 में सिंधु नदी के किनारे हड़प्पा नामक जगह की खुदाई की गयी वहां से पक्की ईटे, मिट्टी के बर्तन आदि सामान मिली जिससे उस काल की संस्कृति के बारे में पता चला इसलिए इसे हड़प्पा संस्कृति का नाम दिया गया।

5. हड़प्पा और मोहनजोदड़ों वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब व सिंध प्रांत में स्थित है। मोहनजोदड़ों की  खुदाई 1922 में श्री राखलदास बनर्जी के नेतृत्व में की गयी थी।

6. सिंधु घाटी की सभ्यता जिसे हड़प्पा संस्कृति भी कहा जाता है यह सभ्यता लगभग 2600 ई.पू. से 1900 ई.पू. तक विकसित रही है।

7. सिंधु सभ्यता का विस्तार अफगानिस्तान, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात व उत्तर प्रदेश तक था।

8. गुजरात में धोलावीरा व लोथल, राजस्थान में कालीबंगा, पंजाब में रोपड़ तथा उत्तर प्रदेश में आलमगीरपुर सिंधु सभ्यता के प्रमुख केन्द्र थे।

9. सिंधु घाटी की सभ्यता की प्रमुख विशेषता सुनियोजित ढंग से बसे नगर, चैड़ी व सीधी समकोण पर काटती पक्की सड़के, नालियां, पक्की ईंटों से बने मकान, आंगन, शौचालय व स्नानागार थी।

10. मोहनजोदड़ों की खुदाई से स्नानागार (स्नान करने का स्थान) प्राप्त हुई थी।

11. हड़प्पा की खुदाई से अन्नागार (अनाज रखने का स्थान) प्राप्त हुई थी।

12. सिंधुवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि था, वे पशुपालन भी करते थे। इनकी प्रमुख फसलें गेहूं, जौ, तिल व कपास थी।

13. सिंधुवासी कुशल कारीगर थे, उन्हे धातुओं का ज्ञान था, वे कांसा, तांबा, पीतल, रांगा व शीशा आदि धातुओं से परिचित थे।

14. सिंधु सभ्यता में कांसा का अत्याधिक प्रयोग हुआ था इसलिए इसे कांस्ययुगीन सभ्यता भी कहते है किंतु इन्हे लोहा का ज्ञान नहीं था।

15. सिंधु घाटी का शहर लोथल में जलमार्ग द्वारा व्यापार होता था। विदेशी व्यापार के लिए मेसोपोटामिया के शहर प्रमुख केन्द्र थे।

16. लोथल को बंदरगाह का नगर भी कहा जाता है। यहां से जहाज से सामान चढ़ाया व उतारा जाता था इस जगह को गोदी कहते थे।

17. सिंधुवासी दूध, मांस, मछली, जौ, तिल, गेहू आदि खाते थे, सूती व उनी वस्त्र पहनते थे। स्त्री व पुरूष दोनों ही श्रृंगार करते थे तथा मनोरंजन के लिए नृत्य व पासे का खेल खेलते थे।

18. सिंधुवासी मातृदेवी, वृक्ष व पशुओं की पूजा करते थे। पीपल उनका पूजनीय वृक्ष था वे मृतकों का अंतिम संस्कार भी करते थे।

19. सिंधुवासियों की लिपि चित्रलिपि थी जो दाई से बाई ओर लिखी जाती थी तथा इस लिपि को आज तक नहीं पढ़ा जा सका है।

20. सिंधु घाटी की सभ्यता का विनाश संभवतः बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के कारण होना माना जाता है।

21. लोथल की तरह ही छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पांडुका गांव के सिरगिट्टी नामक स्थल में पैरी नदी में प्राचीन बंदरगाह के अवशेष मिले है।

अध्ययन सामग्री का अध्ययन करने के उपरांत नीचे दी गयी लिंक पर जाये और क्विज करें-
https://forms.gle/CKHhHJkigQCV267V8
आज 6 जून शनिवार 2020 को पढ़ई तुहर दुआर योजना अंतर्गत मेरे द्वारा ली गयी जिला स्तरीय आनलाईन क्लास का दृश्य









आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 2 आदिमानव





स्नेही विद्यार्थियों व शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 2 आदिमानव को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में 12 प्रश्नों का क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद




30 मई 2020 को पढ़ई तुहर दुआर योजना के तहत मेरे द्वारा ली गयी आनलाईन कक्षा का दृश्य







(पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. आदि दिमानव छोटे-छोटे समूहों में रहते थे किंतु वे भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरे जगह भटकते रहते थे और स्थायी निवास नहीं करते थे।
2. आदिमानव पेड़ों की पत्तियों, छाल व जानवरों की खाल से अपने शरीर को ढकते थे।
3. आदिमानव लकड़ी, सीप, शंख, चमकीले पत्थरों व हड्डियों से बने आभूषणों का प्रयोग करते थे।
4. आदिमानव लोहा व पीतल जैसे धातुओं से परिचित नहीं थे।
5. आदिमानवों के औजार पत्थरों से बने होते थे उस काल को पाषाण काल कहते है।
6. आदि मानव आग का उपयोग हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा करने, मांस को भूनकर खाने व ठण्ड से अपने शरीर को बचाने के लिए करते थे।
7. छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर व सरगुजा क्षेत्र में आज भी बहुत लोग जंगलों में रहकर आदि मानवों जैसी जीवन व्यतीत कर रहे है।
8. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कबरापहाड़ी व सिंघनपुर गुफा तथा दुर्ग जिले के चितवा डोंगरी व डौंडीलोहारा की गुफाओं में आदि मानवों द्वारा बनाये शैल चित्र उपलब्ध है।
9.  आदि मानव प्रकृति के बहुत करीब थे वे पेड़ पौधों व पशु पक्षियों को अपना सगे संबंधी मानते थे अैर देवी देवताओं में विश्वास रखते थे।
10. आदि मानवों ने धरती में बहुत सारी खोजे की उन्होंने पता लगाया कि कौन सा फल खाया जा सकता है, कौन से पौधे से औषधि बनती है, कौन सा पौधा या फल विषैला होता है।
11. आदि मानवों ने पशु पक्षियों व पेड़ पौधों के गुणों के बारे में बहुत बारीकी जानकारी एकत्र की जो आगे चलकर खेती व पशुपालन का आधार बना।
12. आदि मानवों ने सबसे पहले कुत्ता पाला जो शिकार में उनकी मदद करता था, उसके बाद भेड़, बकरी व गाय पालना आरंभ किया।
13. भारतीय उप महाद्वीप में खेती की शुरूआत आज से करीब 5 से 6 हजार साल पहले हुई है।
14. एक स्थान पर दो तीन साल तक लगातार खेती करने के बाद उस स्थान को छोड़कर अन्य स्थान पर खेती करना स्थानांतरण या झूम खेती कहते है बस्तर व सरगुजा अंचल के कुछ जगहों में यह पद्धति आज भी अपनायी जा रही है।
15. आदि मानव धरती व प्रकृति को ईश्वरीय या दैवीय शक्ति मानकर उन्हे खुश करने के लिए नाच गान करते तथा जानवरों की बलि चढ़ाते थे।
16. खेती आरंभ होने के साथ ही आदि मानव स्थायी बसना आरंभ किये जिसके साथ ही घर, बस्ती गांव तथा मिट्टी के बर्तन आदि बनना आरंभ हुआ।

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आनलाईन अध्ययन सामग्री- कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान (इतिहास) अध्याय 1 इतिहास के स्त्रोत



स्नेही विद्यार्थियों व शिक्षक साथियों सादर नमस्कार,
कोविड 19 के लाकडाउन में आनलाईन पद्धति से बच्चों व शिक्षकों के विषय ज्ञान को बढ़ावा देने कक्षा 6 वीं विषय सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 इतिहास के स्त्रोत को लेकर आनलाईन अध्ययन सामग्री तैयार की गयी है जिसमें पाठ्य पुस्तक सहित पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का संग्रह है अंत में 15 प्रश्नों का क्विज भी उपलब्ध है। इसे बच्चों के साथ शिक्षकगण भी कर सकते है। अपना विषय ज्ञान को जरूर जांचे और सभी बच्चों तक इसे पहुंचाये धन्यवाद







    (पाठ के महत्वपूर्ण बिंदूओं का अध्ययन करें)

1. इतिहास का जनक यूनान का हेरोडोटस है।
2. इतिहास का अर्थ है पुराने समय की घटनाओं का वर्णन करना, इसे अंग्रेजी में हिस्ट्री कहते है।
3. इतिहास जानने के स्त्रोत है- पुराने ग्रंथ, शिलालेख, खुदाई से प्राप्त अवशेष, स्मारक, बर्तन, औजार, हथियार, चित्र, सिक्के व यात्रा संस्मरण आदि है।
4. आदि मानव लिखना व पढ़ना नहीं जानते थे इसलिए वे अपनी बात चित्र बनाकर कहते थे।
5. कबरा पहाड़ी और सिंघनपुर गुफा रायगढ़ जिले में स्थित है जहां आदिमानवों के द्वारा बनाये शैल चित्र है।
6. आदि मानव जबलिखना शुरू किये तब वे अपनी बात पत्थरों पर लिखकर कहने लगे जिसे शिलालेख कहा              गया। इसके अलावा भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र पर भी लेख लिखा गया है।
7. अधिकांश शिलालेख पाली या प्राकृत भाषा में ही लिखे गये है।
8. इतिहास की घटनाओं को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता कहलाते है।
9. महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर में स्थित है।
10. बिलासपुर जिले के किरारी गांव से प्राप्त काष्ठ स्तंभ ऐतिहासिक महत्व का है।
11. प्राचीनकाल की दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह कर जिस स्थान में सुरक्षित रखा जाता है उसे संग्रहालय 
       (म्यूजियम) कहते है।
12. पत्थरों व शिलाओं पर खोदकर लिखी गयी बातें शिला लेख कहलाती है।
13. पत्थर, लोहे व लकड़ियों पर खोदकर लिखी गयी बातें स्तंभ लेख कहलाती है।
14. विशेष प्रकार के पत्तों पर रंगो व स्याही से लिखी गयी बातें भोजपत्र, ताड़पत्र कहलाती है।
15. तांबे के पत्तों पर खोदकर लिखी गयी बातें ताम्र पत्र कहलाती है।
16. वर्तमान को समझने के लिए भूतकाल को जानना जरूरी होता है इसलिए इतिहास का अध्ययन किया जाता है यह हमारे विकास की कहानी है। इससे हम अपनी सभ्यता व संस्कृति के बारे में ज्ञान प्राप्त करते है जो हमें लगातार आगे बढ़ने में मदद देती है।
 


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